
रायपुर/दिल्ली : छत्तीसगढ़ में बीजेपी सरकार की शान के प्रतीक के रूप में दावा किए जाने वाले नारे “सुशासन” पर अब “कुर्की” का ख़तरा मंडराने लगा है|कोरबा की एक अदालत ने अब DGP-SP कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का फ़रमान जारी किया है|अदालती कानूनी कार्यवाही के बीच दावा किया जा रहा है,कि राज्य के “अयोग्य डीजीपी” आम जनता से गिन-गिन कर बदला ले रहे है ?

उनकी माने तो,प्रदेश में बीजेपी सरकार के लगभग तीन साल के कार्यकाल में कांग्रेस ने जितना सरकार की साख पर चोट नहीं मारी,उससे कहीं ज्यादा दुगुनी गति “अयोग्य डीजीपी” की कार्यप्रणाली से सत्ता और संगठन को नुकसान उठाना पड़ रहा है,बावज़ूद इसके छत्तीसगढ़ शासन जहाँ मौन धारण किए हुए है,वही सत्ता के कर्णधारों की चुप्पी ने आम जनता के जान-माल और सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए है|‘सुशासन’ का खोखला दावा या सिस्टम की नाकामी को लेकर सड़कों से लेकर अदालती गलियारों तक कोहराम मचा हुआ है?

बिलासपुर में साम्प्रदायिक दंगा भड़काने की घटना पर अंकुश लगते ही,कोरबा से एक ओर हैरान करने वाली ख़बर सामने आई है,यहाँ की एक अदालत ने DGP-SP कार्यालय की संपत्ति पर कुर्की का आदेश जारी किया है,अर्थात छत्तीसगढ़ शासन के जिस दफ्तर से कानून चलता है,अदालती प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाता है, उसी संस्था पर स्थानीय अदालत ने कुर्की का वार कर पुलिस मुख्यालय की कार्यप्रणाली की पोल खोलकर रख दी है| इस कुर्की आदेश के सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनैतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है,हुक्मरानों से पूछा जा रहा है,कि “अयोग्य डीजीपी” अपनी ग़ैर जिम्मेदारी पूर्ण कार्यप्रणाली से आम जनता से गिन-गिन कर बदला ले रहे है?

पुलिस मुख्यालय की नाकामी के चलते पीड़ितों को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है,सवाल उठ रहा है,कि डीजीपी ना तो,पीड़ितों की सुनते है,और ना ही अदालती आदेशों की सुध लेते है,ऐसे में ऱोजाना कार्यालयीन समय में आख़िर “डीजीपी साहब” करते क्या है ? खोज का विषय बन गया है ? सरकारी कुर्सी तोड़ने के अलावा उनका पुलिस महकमें और आम जनता से कोई सरोकार है भी या नहीं ? सुप्रीम कोर्ट के बाद निचली अदालते भी डीजीपी की कार्यप्रणाली से दो-चार हो रही है |फिर भी राज्य की बीजेपी सरकार आख़िर ”मौन” क्यों है ? क्या अयोग्य डीजीपी को पुलिस मुख्यालय में थोपने के बाद एक बार फिर योग्य डीजीपी के चयन का फ़ैसला “अमन चैन सिंग साहब” के सुपुर्द कर दिया गया है ?

दरअसल,राजनैतिक गलियारों में चर्चा आम है,कि प्रदेश में अडानी उद्योग के हितों के मद्देनजर चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी और फॉरेस्ट चीफ का चयन और फ़ैसला सिर्फ “अमन चैन सिंग साहब” के हाथों में है| उनके सामने सत्ता के कर्णधार भी पानी भरते है | लेकिन,अयोग्य अफसरों पर “साहब” की मेहरबानी और ”मुहर” का ख़ामियाजा आम वोटरों को भुगतना पड़ रहा है | यह भी बताया जाता है,कि सिर्फ अयोग्य डीजीपी ही नहीं,बल्कि 2001 बैच के आईपीएस आंनद छाबड़ा,2005 बैच के आईपीएस शेख़ आरिफ और 2007 बैच की उनकी आईएएस पत्नी शम्मी आबिदी,2007 बैच के आईपीएस प्रशांत अग्रवाल पर “साहब” की ”विशेष कृपा” के चलते इन अफसरों के खिलाफ दर्जनों गंभीर शिकायतों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया है|

यही नहीं,इन अफसरों के ठिकानों पर ED और CBI की छापेमारी के बावज़ूद बीजेपी सरकार ने कोई कार्यवाही नहीं की,यहाँ तक की भ्रष्टाचार और घोटालों के मामलों में ”कारण बताओ नोटिस” तक जारी करने के मामले में भारी कोताही बरती गई| ज़ाहिर है,बीजेपी के सुशासन पर वही “लॉबी” हावी बताई जाती है,जिसने ”भू-PAY” के नेतृत्व में “कांग्रेस” का पट्टा पहन लिया था|

जानकारी के मुताबिक,यही अफसर अपनी ग़ैर जिम्मेदार पूर्ण कार्यप्रणाली के बावजूद भी बीजेपी शासन काल में उपकृत हो रहे है|मुख़्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार की छवि पर इसका नकारात्मक असर भी देखा जा रहा है| कोरबा न्यायालय की हालिया कार्रवाई को, पीड़ित परिवारों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, जबकि पुलिस महकमे में हज़ारों की तादाद में दौड़ रहे सरकारी वाहनों की बीमा स्थिति और जवाबदेही को लेकर भी गंभीर सवाल उठ गए हैं।

राजनैतिक गलियारों में दलीले यह भी दी जा रही है,कि “साहब” का फैसला शिरोधार्य है,लेकिन योग्य अफसरों को आशीर्वाद मिलने से बीजेपी सरकार की साख और विश्वसनीयता बढ़ेगी,ना की अयोग्य के सिर पर हाथ रखने से ? उनका यह भी मानना है,कि जनता से जुड़े पुलिस महकमे की निष्क्रिय कार्यप्रणाली से लोगों में इंकम्बेंसी (Incumbency) तेज़ी से विकसित हो रही है,वैसे भी वोट जनता को देना है,सिर्फ कोई औद्योगिक ईकाई विशेष को नहीं ? लिहाज़ा,डीजीपी चयन में गंभीरता बरती जानी चाहिए| राज्य में नौकरशाही के महत्वपूर्ण पदों पर चयन ट्रांसफर पोस्टिंग के फैसलों पर पर्दे के पीछे से कौन अपनी मुहर लगा रहा है ? अब इस पर से धुंधलका हटने लगा है,लोगों को समझ आने लगा है,कि सुशासन और पारदर्शिता अब कैसे ”दूर की कौड़ी” सबित हो रहा है ? “सरकार कौन चला रहा है ?” ये सवाल आमतौर पर प्रशासनिक गलियारों में गूंजता रहता है,लेकिन अब ऐसे फैसलों के दूरगामी परिणाम सामने आने से सरकार की ”चाबी धारी” व्यक्तित्व भी नजर आने लगे है |

दावा तो यह भी किया जा रहा है,कि मंत्रालय में आम लोगों के लिए प्रवेश पास अनिवार्य है|जबकि,अडानी समूह के कर्ता-धर्ताओं के लिए प्रवेश पास प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने के बजाए यहाँ सुरक्षा काउंटर में एक पुस्तिका रख दी गई है| इस पुस्तिका में सिर्फ नजरे दौड़ा कर (चिड़िया हस्ताक्षर) कर औद्योगिक ईकाईयों के कर्ता-धर्ता बेरोक-टोक आवाजाही करते है| मंत्रालय की यह सुरक्षा व्यवस्था भी पुलिस मुख्यालय का अभिन्न अंग बताई जाती है| ऐसे में अयोग्य डीजीपी की बेरुख़ी यहाँ भी कोई नया ”गुल” खिला सकती है,अंदेशा इसका भी जाहिर किया जा रहा है |

कहा जा रहा है,कि सड़कों पर पुलिस महकमा आम जनता के वाहनों की दस्तावेजी पड़ताल के साथ-साथ वाहन बीमा पर गौर फरमाता है,लेकिन महकमे के वाहनों की वैधानिक स्थिति को लेकर अदालत में आधिकारिक पोल खुल रही है,ऐसे वाहन सड़कों पर ”यमराज” साबित हो रहे है |छत्तीसगढ़ में खाकी के किले पर अदालत की चोट से आम जनता हैरत में है,सियासी सरगर्मियां भी तेज़ है,लेकिन प्रदेश की बीजेपी सरकार और उसका गृह मंत्रालय चैन की बंसी बजाने में व्यस्त बताया जाता है| प्रदेश में सुशासन के दावों के बीच DGP-SP दफ्तर की संपत्ति अब कुर्की की जद में आ गई है| प्रशासनिक व्यवस्था का नमूना तो देखिए, DGP-SP कार्यालय पर कुर्की का संकट मंडरा गया है |

जानकारी के मुताबिक,मामला कोरबा में VIP ड्यूटी में लगी एक बस के हादसे से जुड़ा बताया जाता है| प्रकरण के मुताबिक, पुलिस विभाग की बिना बीमा वाली वीवीआईपी व्यवस्था में तैनात मिनी बस ने दो लोगों को कुचल दिया था,इस सड़क दुर्घटना में दो युवकों की मौत हुई थी | पीड़ितों ने न्याय के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था,कई महीनों की सुनवाई के बाद इस मामले में अदालत ने अब सख्त कदम उठाया है। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, कोरबा ने पीड़ितों को 43 लाख 14 हजार 200 रुपये की मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किए जाने पर छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और कोरबा पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी किया है।

जानकारी के मुताबिक,मामला वर्ष 2023 के एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना से जुड़ा बताया जाता है| प्रकरण के अनुसार,27 सितंबर 2023 की शाम करीब साढ़े छह बजे रायगढ़ जिले के खरसिया थाना क्षेत्र अंतर्गत पिपरिया-परपोड़ी मुख्य मार्ग पर पुलिस विभाग की मिनी बस ने बाइक सवार दो युवकों को ज़ोरदार टक्कर मारी थी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बैजनाथ कंवर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल रवि यादव ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।

बताया जाता है,कि घटना के बाद मृतकों के परिवारों ने आर्थिक सहायता के लिए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, कोरबा में अलग-अलग प्रकरण दाखिल किए थे। इस तारतम्य में प्रथम अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण की पीठासीन अधिकारी गरिमा शर्मा ने 14 जनवरी 2026 को दोनों मामलों में सुनवाई पूरी करते हुए अब फैसला सुनाया है।

अधिकरण ने अपने आदेश में दुर्घटना के लिए मिनी बस चालक की लापरवाही को जिम्मेदार बताया है। न्यायालय के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त वाहन पुलिस महानिदेशक, छत्तीसगढ़ के नाम पर पंजीकृत था और उस समय वाहन की बीमा अवधि भी समाप्त हो चुकी थी। इसी वजह से पुलिस महानिदेशक और कोरबा पुलिस अधीक्षक को भी मामले में पक्षकार बनाया गया था। अदालत ने बैजनाथ कंवर के आश्रितों को 26 लाख 9 हजार 200 रुपये और रवि यादव के आश्रितों को 17 लाख 5 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। दोनों मामलों में कुल 43 लाख 14 हजार 200 रुपये की राशि तय की गई थी। इसके अलावा इस राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन,पुलिस मुख्यालय ने इस अदालती आदेश की अवहेलना की थी |
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न्यायालय ने आदेश में यह भी निर्देशित किया था, कि तय राशि एक महीने के भीतर पीड़ित परिवारों को उपलब्ध कराई जाए, लेकिन आदेश के बावजूद पांच महीने से अधिक समय बीत गया और मृतकों के परिजनों को मुआवजे की राशि नहीं मिल सकी। पीड़ितों ने न्यायालय के आदेश को डीजीपी के संज्ञान में भी लाया था,बावजूद इसके पुलिस मुख्यालय के कानों में ”जूं तक नहीं रेंगी”|

आखिरकार मुआवजा राशि का भुगतान नहीं होने पर पीड़ित पक्ष ने अधिवक्ताओं के माध्यम से पुनः वसूली के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू की थी। अदालत ने सुनवाई के बाद अब सख्ती दिखाते हुए डीजीपी और एसपी कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी किया है। फ़िलहाल,पुलिस मुख्यालय की कार्यप्रणाली सुर्ख़ियों में है|आम जनता को पुलिस मुख्यालय में एक अदद डीजीपी का बेसब्री से इंतज़ार है|





