भू-माफ़िया बन गया छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड ?गरीबों के ”EWS” मकानों  पर बड़ा खेल ? पुराने पंजीयन रद्द कर अपनों को उपकृत करने की  तैयारी…

रायपुर : छत्तीसगढ़ में गरीबों के आशियाने को ‘रीसेट’ कर अपनों को उपकृत करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है| दरअसल,2 वर्ष पूर्व बुलाए गए नवा रायपुर अटल नगर में लगभग आधा सैंकड़ा EWS आवासों के पंजीयन निरस्त कर नए सिरे से अपनों को उपकृत करने की योजना का भांडा फोड़ हुआ है|यह भी बताया जाता है,छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने पंजीयन शुल्क के भुगतान के बाद लगभग 49 हितग्राहियों से मकान आबंटन की कागजी प्रक्रिया पूरी कराई गई |हितग्राहियों से नियमों के तहत लगभग 2 वर्ष पूर्व पंजीयन शुल्क की राशि 25 हज़ार वसूले गए,साथ ही पात्र पाए गए,ऐसे हितग्राहियों को आश्वस्त किया गया था,कि शेष रकम 5 लाख 75 हज़ार की अदायगी आवास आबंटन के दौरान सुनिश्चित की जाएगी |लेकिन,अब बारी जब आवास आबंटन की आई तो,छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने अपने ही नियम-कायदों से मुंह मोड़ लिया|

बताया जाता है,कि बंद कमरे में अफसरों ने ऐसा खेल-खेला की,जिसे देख-सुन कर हितग्राहियों के पैरों तले ज़मीन ख़िसक गई है | बताया यह भी जाता है,कि पूर्व पंजीयन एवं आवास आबंटन प्रक्रिया को धत्ता बताते हुए,अफसरों ने नया फरमान जारी कर दिया है| इसके तहत 2 वर्ष पूर्व वसूली गई,पंजीयन शुल्क की रकम हितग्राहियों को वापस कर,उनके आबंटन रद्द करने के साथ-साथ इस योजना पर ही विराम लगाने की तैयारी कर ली गई है| इस सिलसिले में जारी कवायत को लेकर अब दस्तावेज भी सामने आ गए है|

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यह भी बताया जाता है,कि अब ऐसे EWS मकानों को अपने करीबी नाते-रिश्तेदारों और सदस्यों के अलावा निवेशकर्ताओं को सौंपने के लिए चुनिंदा अफसरों ने “मास्टर माइंड” प्लान तैयार किया है | इसकी बानगी से जुड़ा पत्र सामने आने के बाद रियल स्टेट कारोबार में खलबली है| उधर,पीड़ित हितग्राही दलील दे रहे है,कि यह मामला गरीबों के साथ अन्याय करने जैसा है| जबकि,वे हाउसिंग बोर्ड को निर्धारित शेष राशि 5 लाख 75 हज़ार रूपये का विधिवत भुगतान करने के लिए तैयार है| उनकी माने,तो नवा रायपुर के सेक्टर-19 में निर्माणाधीन EWS मकानों की जमीन अब प्राइम लोकेशन में आंकी जा रही है| इसलिए इस योजना में आखिरी समय बदलाव कर अफसरों ने अपनों को उपकृत करने और गरीबों को उनका आवास बसने से पहले ही खदेड़ने का उपक्रम शुरू कर दिया है| 

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छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड आम जनता को सर्व-सुविधायुक्त मकान उचित दाम पर मुहैया कराए जाने को लेकर सुर्ख़ियों में रहता है | लेकिन,राज्य में सुशासन की लहर के बीच उसकी छवि अब भू-माफिया जैसी नज़र आने लगी है|पीड़ितों के मुताबिक, ये योजना में बदलाव नहीं,बल्कि जनता के साथ विश्वासघात कर अनुचित लाभ कमाने की चाल के रूप में वे इसे आंक रहे है |

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उधर, EWS मकानों के पंजीयन रद्द कर उन्हें नए दामों पर बेचने की हाउसिंग बोर्ड की तैयारी सुचारु बताई जाती है|जबकि,प्रदेश में छत्तीसगढ़ शासन ”सबका साथ-सबका विकास” का नारा बुलंद कर रहा है|पीड़ित हितग्राहियों ने साफ़ किया है,कि वो हाउसिंग बोर्ड के वचनों पर भरोसा करे या फिर विष्णुदेव साय सरकार की वचनबद्धता पर ? ऐसे सरकारी दस्तावेजों को देख कर पीड़ित हितग्राहियों के अरमानों पर से पानी फिर रहा है| बताते है ,कि पंजीयन शुल्क के भुगतान के बाद हितग्राही अपने परिवार के लिए एक अदद आशियाने का सपना संजो रहे थे| लेकिन,भू-माफिया की तर्ज़ पर लाभ कमाने में जुटा हाउसिंग बोर्ड ने अविश्वसनीय राह पकड़ ली है|  

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छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल (मुख्यालय, पर्यावास भवन, सेक्टर-19, नवा रायपुर अटल नगर-492002) से जारी यह पत्र रियल स्टेट कारोबार में EWS मकानों की ऊँची बोली की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है| क्रमांक 745/एफ / संपदा शाखा/26 नवा रायपुर अटल नगर, दिनांक 05/06/2026 के इस पत्र में हाउसिंग बोर्ड ने अपनी मंशा साफ़ कर दी है|सूत्रों की माने तो,नए सिरे से किन-किन हितग्राहियों को आवास आबंटित किया जाएगा,उनके नाम,भुगतान और लाभ-कमाई का खांका भी संबंधित अधिकारियों ने तय कर लिया है|

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एक जानकारी के मुताबिक,नवा रायपुर इलाके में इसी तर्ज पर NRDA और हाउसिंग बोर्ड की जमीनों की ख़रीद-फ़रोख़्त का लंबा सिलसिला जारी है|यह भी बताया जाता है,कि EWS हितग्राहियों के बदले अपनों को उपकृत करने वाली योजना से विभाग के चलनशील अफसरों ने कई वरिष्ठों को भी अवगत करा दिया है| इसमें उपायुक्त, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल वृत्त-नवा रायपुर (छ.ग.), संपदा अधिकारी,छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल राज. परि. प्रक्षेत्र-नवा रायपुर (छ.ग.) के कर्ता-धर्ता शामिल बताए जाते है| 

जानकारी के मुताबिक,अटल आवास योजनांतर्गत, बेलभाठा अभनपुर रायपुर में निर्माणाधीन रिक्त आवासीय संपत्ति का आबंटन करने के लिए कवायतें जोरो पर है| बताते है,कि इस सिलसिले में दौड़ाए जा रहे कागज़ी घोड़ों में पत्र क्रमांक 489 दिनांक 04.05.2026 एवं क्रमांक-02 को पृष्ठांकित पत्र क्रमांक 490 दिनांक 04.05.2026,इस नए कारोबार की कलई खोल रहा है|इस पत्र में कमाऊं योजना से जुड़े अफसरों ने दावा किया है,कि वर्तमान में मार्च 2024 से मण्डल में समस्त संपत्तियों (विशेष आवासीय एवं प्रधानमंत्री सह-मुख्यमंत्री योजना को छोड़कर) का विक्रय ऑनलाईन ऑफर के माध्यम से किया जा रहा है। ऐसे कारणों का हवाला देते हुए,पूर्व के समस्त पंजीयन को निरस्त एवं पंजीयनकर्ताओं की राशि वापस करते हुए निर्माणाधीन भवनों का अद्यतन मूल्य निर्धारण पश्चात नवीन विज्ञापन प्रकाशित कर ऑनलाईन ऑफर के माध्यम से पंजीयन प्राप्त करने की कार्यवाही सुनिश्चित की गई है। 

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यह भी तथ्य सामने आया है,कि EWS मकानों को रियायती दरों पर मुहैया कराए जाने वाली इस योजना की नींव वर्ष 2021 में रखी गई थी | इस दौरान कई लोगो ने अटल आवास के लिए दिलचस्पी दिखाई थी| लेकिन,योजना में बग़ैर कोई ठोस विचार किए ना केवल आबंटन रद्द कर दिए गए बल्कि,गरीबों के लिए बनाए गए, मकान को “ऑफर” में बेचने का फैसला अफसरों ने अपने ही स्तर पर ले लिया है| इतना ही नहीं,योजनाओं में हिस्सेदारी के तहत केंद्र सरकार से EWS मकानों के लिए छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड ”केंद्रीय सब्सिडी” भी ले चुका हैं | 

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सूत्र यह भी तस्दीक करते है,कि सरकार द्वारा घोषित योजना में बदलाव की जानकारी ना बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के संज्ञान में लाई गई और ना ही छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड केअध्यक्ष से अनुमोदन हेतु किसी प्रक्रिया  का पालन किया गया| यह भी बताया जाता है,कि हाउसिंग बोर्ड के CEO सुनील सिंह ने इस लाभदायक योजना का खांका खींचने के बाद ततसंबंध में आदेश जारी किया था| उन्हें राजनैतिक मैदान में पूर्व डिप्टी सीएम TS सिंहदेव के कृपापात्र बताया जाता है| फ़िलहाल,नकटी कांड के बाद नवा रायपुर में EWS मकानों को लेकर छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के बड़े खेल ने “सरकारी विश्वसनीयता” को संदेह के घेरे में ला खड़ा कर दिया है| इस मामले  में  प्रतिक्रिया लेने के लिए न्यूज़ टुडे छत्तीसगढ़ ने हाउसिंग बोर्ड के CEO सुनील सिंह समेत अन्य पदाधिकारियों से संपर्क किया,लेकिन कोई प्रतिउत्तर नहीं मिल पाया |

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