दांव पर बीजेपी सरकार की ”कथनी और करनी”! CSEB और NRDA में बवाल,रिटायर अधिकारियों को पिछले दरवाज़े से संविदा नियुक्ति…

रायपुर : छत्तीसगढ़ में बिजली विभाग एक ओर जहाँ जनता पर लादे जा रहे भारी-भरकम बिजली बिलों के भुगतान, बड़े उद्योगपतियों को बिजली बिलों में सब्सिडी (छूट ) दिए जाने और स्मार्ट मीटर को लेकर सुर्ख़ियों में है| वही अब,पिछले दरवाज़े से रिटायर वरिष्ठ अधिकारियों को उपकृत करने के मामले में भी पीछे नहीं है| उसकी कार्यप्रणाली से आम जनता के बीच राज्य की बीजेपी सरकार की छवि पर जहाँ ”अडानी समूह” की पिछलग्गू बनने की मुहर लग रही है,जबकि जिम्मेदार पदों पर अयोग्य और रिटायर अधिकारियों को पिछले दरवाजे से “कॉन्ट्रेट अपॉइंटमेंट” देने के फ़ैसले से महकमें में बवाल मच गया है| महकमे के कई वरिष्ठ अधिकारी इस नई परंपरा को कायम करने से आहत बताए जा रहे है|

”CSEB” के अलावा कई ऐसे महत्त्वपूर्ण महकमे है,जहाँ बड़े औद्योगिक समूहों के इशारों पर “काम के पदों” पर ”मनपसन्द” रिटायर अधिकारियों को जिम्मेदार पदों की कुर्सी सौंपी जा रही है| यह भी बताया जाता है,कि अडानी समूह के हितों से जुड़े सरकारी महकमों के चलनशील पदों पर पिछले दरवाज़े से होने वाली नियुक्ति राज्य की बीजेपी सरकार को मुंह चिढ़ा रही है| दरअसल,विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान केंद्र से लेकर प्रदेश बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं ने महत्त्वपूर्ण पदों पर “कॉन्ट्रेट अपॉइंटमेंट” प्रदान किए जाने की नीति का जमकर विरोध किया था|

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रिटायरमेंट के उपरांत रिक्त पदों पर विभागीय स्तर पर ही, वरिष्ठता और नियमों के आधार पर नियुक्ति किए जाने के प्रावधान पर ज़ोर देते हुए तमाम नेताओं ने सुशासन का दावा किया था| उन्होंने,वरिष्ठ अधिकारियों के हितो से किसी भी तरह के विभागीय कुठाराघात से इंकार किया था| लेकिन,ढाई साल के कार्यकाल के बीतते-बीतते अब उन महकमों में पिछले दरवाज़े से उपकृत होने वाले रिटायर अधिकारियों की तैनाती का सिलसिला शुरू हो गया है,जो सरकारी महकमे “अडानी समूह” के रडार पर है| ऐसी नियुक्ति की पारदर्शिता सवालों के घेरे में हैं।

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वही इस मामले से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अनभिज्ञ बताए जाते है,सूत्र यह भी दावा कर रहे है,कि शीर्ष नौकरशाही के स्तर पर ही तुग़लकी फैसले लिए जा रहे है | इसके चलते बीजेपी सरकार की प्रदेश में नकारात्मक छवि बन रही है | 

यह भी बताया जाता है,कि बीजेपी संगठन की मंशा के विपरीत शीर्ष नौकरशाही के एक तरफ़ा फैसलों से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार की “कथनी और करनी” पर विपक्ष भी हमलावर नजर आने लगा है| ताज़ा मामला, CSEB में मुख्य विद्युत निरीक्षक के पद पर हालिया 30.6.2026 को रिटायर हुए एस.के.नेताम को पुनः ”कॉन्ट्रेक्ट अपॉइंटमेंट” (संविदा नियुक्ति ) दिए जाने से जुड़ा बताया जाता है | जबकि,उनके रिटायरमेंट के बाद विभाग में इस पद पर सबसे वरिष्ठ उप मुख्य विद्युत निरीक्षक के पद पर सी. एस .खान्डे कार्यरत बताए जाते है| छत्तीसगढ़ शासन ऊर्जा विभाग के अंतर्गत मुख्य अभियंता व मुख्य विद्युत निरीक्षक पद के लिए खान्डे की योग्यता-अर्हता निर्धारित और नियमानुसार बताई जाती है|बावजूद इसके,उच्च पद पर तैनात योग्य अधिकारी को दरकिनार कर संविदा पर नियुक्त रिटायर अधिकारी को जिम्मेदार कुर्सी सौंपने की कवायत से बवाल मच गया है|

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यह भी बताया जाता है,कि रिटायर होने के उपरांत एस.के नेताम,अपने समकक्ष सी. एस .खान्डे से लगभग माह भर कनिष्ठ हो गए है,ऐसे में उनकी वरिष्ठता भी अब सवालों के घेरे में बताई जाती है| बताया जाता है,कि एस.के.नेताम,मुख्य अभियंता पद पर पदोन्नत ही नहीं हो पाए है,ऐसे में वरिष्ठ पद पर उनकी नियुक्ति की चर्चाओं ने महकमे में खलबली मचा दी है|

जानकारी के मुताबिक,अधीक्षण अभियंता के पद पर संविदा देने के लिए विभाग में उस पद पर पदोन्नति हेतु उपयुक्त अधिकारी उपलब्ध नहीं होने का शपथ पत्र देना आवश्यक है | लेकिन,ऐसा कोई शपथ पत्र सामने नहीं आने से महकमे में गहमा-गहमी जारी है| जबकि,दूसरी ओर कायदे-कानूनों को दरकिनार कर रिटायर अधिकारी को पिछले दरवाज़े से “संविदा” नियुक्ति देने के लिए वित्त विभाग से मंजूरी की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है|

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हालाँकि,वित्त मंत्री ओ पी चौधरी ऐसी कोई मंजूरी को हरी झंडी देंगे ?अब तक साफ़ नहीं हो पाया है| वित्त और पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी के प्रभार वाले आवास एवं पर्यावरण विभाग ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के पूर्व प्रमुख अभियंता हरिओम शर्मा को 30 जून 2026 को रिटायरमेंट के महज 8 दिन बाद नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRDA) में मुख्य अभियंता के रिक्त पद पर एक वर्ष के लिए संविदा नियुक्ति को मंजूरी दी थी|विवादित सेवा रिकॉर्ड को लेकर हरिओम शर्मा की नियुक्ति पर भी सवालिया निशान लग रहे है |

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बताते है,कि 8 जुलाई 2026 को जारी यह नियुक्ति आदेश इसलिए चर्चा में है,क्योंकि शर्मा की कार्यप्रणाली सेवाकाल के दौरान तदर्थ भर्ती, सेवा वैधता,एसीबी-ईओडब्ल्यू प्रकरण और कई प्रशासनिक विवादों से जुडी पाई गई है। उनके खिलाफ एसीबी-ईओडब्ल्यू में प्रकरण विचाराधीन बताया जाता है| उनकी तदर्थ और अस्थायी नियुक्ति आखिर कब और कैसे स्थायी सेवा में तब्दील हो गई ? यह मामला भी सुर्ख़ियों में है|

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उधर,NRDA के बाद CSEB में सुशासन पर आंच के बाद “कथनी और करनी” के दांवो का मामला आम जनता के बीच बीजेपी के अरमानों की हवा निकाल रहा है| दावा यह भी किया जा रहा है,कि ऊर्जा विभाग में मुख्य विद्युत निरीक्षक का पद अब मुख्य अभियंता स्तर के समकक्ष है,नियमतः करेंट चार्ज विद्यमान वरिष्ठ अधिकारी को ही दिया जाना चाहिए| लेकिन,महकमे में चर्चा है,कि एक “अहमदाबादी” फरमान के बाद CSEB के हालात पूरी तरह से बदल गए है,यहाँ अब उल्टी गंगा बह रही है| छत्तीसगढ़ शासन के प्रति निष्ठा बनाए रखने के बजाए उन अफसरों को ज्यादा तरज़ीह दी जा रही है,जो पूरी शिद्द्त के साथ खास औद्योगिक समूह के लिए अपनी सरकारी सेवाएं प्रदान कर रहे है|

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जानकारी के मुताबिक,CSEB के संयंत्रों में ”अडानी समूह” की बड़ी ठेकेदारी बताई जाती है|यह समूह CSEB के तमाम बिजली संयंत्रों में कोल आपूर्ति से लेकर परिवहन तक बतौर MDO अपनी आधिकारिक अनधिकृत पकड़ बनाए हुए है| उसके MDO की शर्तें राज्य के हितों के ठीक विपरीत आंकी जा रही है|

यही वजह है,कि प्रदेश में बिजली के दाम आसमान छू रहे है यह भी बताया जाता है,कि ऊर्जा,CSEB, माइनिंग,फारेस्ट और अन्य निर्माण एजेंसियों से रिटायर हुए कई वरिष्ठ अफसरों के लिए “अडानी समूह” उपयुक्त शरणस्थली साबित हो रहा है|

सरकारी महकमों से रिटायर ऐसे दर्जनों अफसरों की मंत्रालय से लेकर विभिन्न प्रशासनिक हलकों में तूती बोल रही है| पिछले दरवाजे से संविदा नियुक्ति का मामला राजनैतिक गलियारों में बीजेपी को मुंह चिढ़ा रहा है|दरअसल,चुनावी मैदान में ”चलनशील” नौकरशाहों को नहीं बल्कि,बीजेपी के सक्रिय नेताओं को उतरना है|फ़िलहाल देखना गौरतलब होगा,कि नौकरशाही के बेलगाम होते कदम,साय सरकार के लिए कितने फलदायी साबित होते है |

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