
दिल्ली/बिलासपुर/रायपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पुलिस हिरासत में मौत का मामला राज्य सरकार की गले की फांस बनता नजर आ रहा है,प्रकरण की जाँच में जुटी सीबीआई को अब संदेहियों द्वारा नष्ट किए जा रहे,सबूतों को लेकर जूझना पड़ रहा है| एक जानकारी के मुताबिक,पुलिस हिरासत में आरोपी के साथ मार-पीट किए जाने के दौरान आख़िरी समय पूछताछ में जुटे थाने में मौज़ूद रहे पुलिसकर्मियों पर अब सीबीआई की तिरछी नज़र,बताई जा रही है| पुलिस हिरासत में ”थर्ड डिग्री’‘,फिर जेल दाखिल और इसके बाद विचाराधीन बंदी की मौत के मामले को रफ़ा-दफ़ा करने के लिए अब सबूतों के साथ छेड़छाड़ का नया खेल सामने आया है |

बताया जा रहा है,कि मामले की जाँच में जुटी CBI की नजर अब उन इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और मोबाइल को ठिकाने लगाए जाने पर टिकी है,जो घटना के दौरान संदेही पुलिसकर्मी अपने हाथों में थामे हुए थे| यह भी बताया जा रहा है,कि सीबीआई जाँच का एलान होते ही,कई पुलिसकर्मियों ने अपने मोबाइल और सिम कार्ड ठिकाने लगा दिए है,ऐसे पुलिस कर्मी नए मोबाइल फ़ोन-हैंडसेट लेकर सीबीआई की पूछताछ में उपस्थित हो रहे है| ऐसे मोबाइल्स अचानक पुलिसकर्मियों के हाथ आ गए है,जो सीबीआई को चकमा देने के लिए कारगर आंके जा रहे है |

सूत्रों का यह भी दावा है,कि CBI ने 30 जुलाई 2026 को बिलासपुर के सिविल लाइंस थाने में दर्ज FIR नंबर 1036 को अपनी जांच के मुख्य बिंदुओं में शामिल कर नए तथ्यों को सिरे से खंगालना शुरू कर दिया है।इस बीच मृतक श्रवण सूर्यवंशी उर्फ सरवन तामरे की आबकारी एक्ट में हुई गिरफ़्तारी और मामले के चालान पेश करने को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है |

सूत्रों के मुताबिक,हिरासत में मौत की घटना के बीत जाने के लगभग 11 माह बाद स्थानीय थाने के पुलिसकर्मियों ने मृतक आरोपी के ख़िलाफ़ अदालत में चालान पेश करने की कवायत भी शुरू की थी| जबकि नियमानुसार, मृतक आरोपियों के खिलाफ चालान पेश नहीं किया जाता है |सूत्र बताते है,कि इस तथ्य की पड़ताल भी की जा रही है,कि आरोपी के मौत के कई महीनों बाद उसके ख़िलाफ़ चालान पेश करने का कदम भी क्या वाकई स्थानीय संदेही पुलिस कर्मियों ने उठाया था ? इसके लिए अदालती दस्तावेजों के अध्ययन किए जाने की जानकारी सामने आई है |

हालाँकि,पुलिस और सीबीआई की ओर से इस तथ्य को लेकर आधिकारिक रूप से अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है| सूत्र यह भी तस्दीक करते है,कि कोई ”देवेंद्र” नामक संदेही ने घटना के दौरान उपयोग में लाए जा रहे,मोबाइल के बजाए,नया नवेला मोबाइल सेट लेकर एजेंसी के समक्ष अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी|

इस घटना को गंभीरता से लेते हुए एजेंसी ने जब इलेक्ट्रॉनिक गैजेटस और डिजिटल सबूतों की ओर गौर फ़रमाया तब पता पड़ा,कि घटनाक्रम से बच निकलने के लिए मोबाइल और डिजिटल उपकरणों को बड़ी तेज़ी के साथ,’‘इधर से उधर” कर दिया गया था| सूत्र यह भी तस्दीक करते है,कि कुछ संदेहियों ने अपने मोबाइल फ़ोन “सेप्टिक टैंक” में फ़ेंक दिए है| ऐसे मोबाइल की जप्ती के प्रयास भी शुरू कर दिए गए है |

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में जनवरी 2024 में श्रवण सूर्यवंशी उर्फ सरवन तामरे की हिरासत में हुई मौत के मामले में अब CBI प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सुप्रीम अदालत में सौंपने की तैयारी में है,इसे लेकर एजेंसी की पड़ताल जोरों पर बताई जा रही है |CBI को 13 अक्टूबर को होने वाली इस मामले की अगली सुनवाई से पहले जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल करना है।

लिहाज़ा,एजेंसी ने आरोपियों की शिनाख्ती और आला अधिकारियों के रवैये और कार्यप्रणाली को लेकर दस्तावेज़ी और डिजिटल सबूतों को तेज़ी से जुटाना शुरू कर दिया है, साथ ही उन अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है,जिनके संज्ञान में मृतक श्रवण सूर्यवंशी उर्फ सरवन तामरे की गिरफ्तारी,अदालती प्रक्रिया और जेल दाखिल करने की कानूनी कार्यवाही की गई थी|सीबीआई ने केंद्रीय जेल बिलासपुर से मृतक का मेडिकल ब्यौरा भी इक्कठा किया है,इसके साथ ही जेल प्रहरियों और स्टाफ से भी पूछताछ की गई है |

सूत्र तस्दीक करते है,कि जेल और पुलिस रिकॉर्ड खंगालने के साथ-साथ एजेंसी ने संदेही पुलिसकर्मियों से पूछताछ कर उनके बयानों को दर्ज किया है | विचारधीन बंदी श्रवण की हिरासत में मौत किन परिस्थितियों और वजह से हुई ?इसे लेकर CBI ने मेडिकल रिपोर्ट से भी कई जानकारी एकत्रित की है | यह भी बताया जाता है,कि सीबीआई ने अपनी FIR में आरोपी के नाम की जगह अज्ञात व्यक्ति लिखकर विवेचना आगे बढ़ाई है | सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में है कि कहा कि अगर जांच में कोई अधिकारी हिरासत में हिंसा और मौत के लिए जिम्मेदार पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस सिलसिले में कोर्ट ने सीबीआई को सख्त निर्देश जारी किए है|हिरासत में मौत के इस प्रकरण पर अब मोबाइल-गैजेट गायब होने से विवेचना को लेकर सवाल उठने लगे है,इस मामले में जारी जाँच को लेकर सीबीआई के मौन ने रहस्य बढ़ा दिया है| जबकि,छत्तीसगढ़ पुलिस भी प्रकरण के संबंध में वस्तुस्थिति स्पष्ट करने के मामले में प्रेस-मीडिया से दूरियां बनाए हुए है|

फ़िलहाल, FIR में दर्ज ‘‘अज्ञात” थ्योरी के साथ-साथ हिरासत में मौत के गुनहगारों की शिनाख्ती को लेकर एजेंसी का गलियारा सरगर्म बताया जा रहा है,कई वरिष्ठ अफसरों के नपने के आसार भी जाहिर किए जा रहे है|
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