
बिलासपुर/दिल्ली : छत्तीसगढ़ में ”कस्टोडियल डेथ” जैसे गंभीर मामलों में पुलिस के लचर रवैये और विवेचना में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सीबीआई सक्रिय हो गई है|उसने एक टीम का गठन कर प्रकरण की उच्च स्तरीय जाँच शुरू कर दी है,माना जा रहा है,कि CBI की रडार में वो IPS अफसर भी शामिल बताए जाते है,जिनकी कार्यप्रणाली पर सर्वोच्च अदालत ने कड़ी आपत्ति जाहिर कर कायदे-कानूनों का गंभीर उल्लंघन पाया था| ऐसे अपीलीय और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली को भी सीबीआई ने जाँच के घेरे में ले लिया है|

सूत्रों का दावा है,कि ”कस्टोडियल डेथ” के मामले में सीबीआई ”कर्तव्यविमुख” पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ भी आपराधिक प्रकरण दर्ज करने में कोताही नहीं बरतेगी ? उसके मुताबिक,मामले की जाँच-पड़ताल के लिए बिलासपुर में सीबीआई की एक टीम ने अपना डेरा डाल लिया है|सेंट्रल जेल बिलासपुर से लेकर पुलिस के थानों तक सीबीआई की सुगबुगाहट तेज़ है,यह भी बताया जाता है,कि घटना से जुड़े कई महत्त्वपूर्ण साक्ष्यों और दस्तावेजों को सीबीआई की टीम ने एकत्रित करना भी शुरू कर दिया है|

जानकारी के मुताबिक,सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रदेश के ‘‘DGP” को “पूरी तरह अयोग्य” (Totally Incompetent) करार दिए जाने के बाद प्रदेश के DGP स्वयं भी अदालत में एक ”पार्टी” बन गए है| यही नहीं मौजूदा ”DGP” की अकार्यकुशल कार्यप्रणाली से देश की सर्वोच्च अदालत से छत्तीसगढ़ शासन को शर्मनाक फटकार के दौर से गुजरना पड़ रहा है|अदालत से “पूरी तरह अयोग्य” ठहराए गए DGP को पद पर बनाए रखने का मामला अब सीबीआई जाँच के दौरान विवादों से घिरता नजर आ रहा है| “सुप्रीम कोर्ट” में पार्टी बन चुके ”DGP” को यथावत पद पर बनाए रखने से जाँच के प्रभावित होने के आसार बढ़ गए है|

सूत्रों के मुताबिक,सीबीआई जाँच दल को मैदानी स्तर पर पुलिस के असहयोगात्मक रवैये का सामना करना पड़ रहा है | जबकि,DGP को यथावत कुर्सी पर बनाए रखने के मामले को लेकर पीड़ित परिवार और याचिकाकर्ता भी हैरानी भरी निगाहों से देख रहे है | अब, DGP को फ़ौरन पद से हटाए जाने की मांग से जुड़ी एक याचिका के कोर्ट में दायर किए जाने की तैयारी जोरों पर बताई जाती है | इस याचिका में दावा किया गया है,कि अकार्यकुशल DGP समेत ”कस्टोडियल डेथ’‘ घटना को लेकर ”गैर जिम्मेदाराना” रुख़ अपनाने वाले अन्य अधिकारियों को पद हटाए बग़ैर निष्पक्ष जाँच की कल्पना करना बेमानी है ? ‘‘कस्टोडियल डेथ” घटना से सीधे जुड़े तमाम संबंधित अधिकारियों को फौरन हटाए जाने के लिए छत्तीसगढ़ शासन को पुनः सख़्त दिशा-निर्देश दिए जाने की मांग से जुडी इस याचिका की चर्चा,अदालती गलियारों में जोरों पर है|

यह भी बताया जाता है,कि DGP चयन के दौरान योग्य अधिकारियों को दरकिनार कर “अयोग्य DGP” समेत “तिकड़म” कर अन्य आईपीएस अधिकारियों की वरिष्ठता सूची में हेर-फेर और मनचाहे अधिकारियों का नाम ”DGP पैनल” में शामिल करने के तथ्यों से भी इस याचिका के जरिए मूल-तथ्यों को अदालत के संज्ञान में लाए जाने की जानकारी प्राप्त हुई है | याचिका के तथ्यों के मुताबिक,प्रदेश में “अयोग्य” आईपीएस को DGP बनाए जाने की सिफारिश करने वाले योग्य एवं वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवालियां निशान लगाया गया है| इसमें साफ़ किया गया है,कि कुपात्रों को (अपनों को) सुविधानुसार DGP जैसे उच्च पद पर तैनात करने के लिए योग्य अधिकारियों को पैनल की प्रतियोगिता सूची से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है |
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सूत्र यह भी तस्दीक करते है,कि सीबीआई ने बिलासपुर के सीपत क्षेत्र स्थित उस थाने के तत्कालीन पुलिस एवं जेल अधिकारियों समेत कथित विचाराधीन बंदी के पोस्टमार्टम के दौरान उपस्थित डॉक्टरों से संपर्क स्थापित किया है | बिलासपुर के मोहरा इलाके में रहने वाले श्रवण सूर्यवंशी (34) को आबकारी एक्ट के मामले में स्थानीय सीपत थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उसे 19 जनवरी 2024 को पुलिस ने केंद्रीय जेल बिलासपुर में दाखिल कराया था,लेकिन जेल में उसकी तबीयत लगातार बिगड़ते रही | उसे गंभीर अवस्था में 21 जनवरी 2024 को सिम्स अस्पताल में भेजा गया,लेकिन पीड़ित की जान नहीं बच सकी | बताते है,कि सिर्फ श्रवण सूर्यवंशी की ही नहीं,बल्कि ऐसे दर्जनों पीड़ितों को ”कस्टोडियल डेथ” का शिकार होना पड़ा है| मृतक श्रवण के परिजनों के सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने मात्र के बाद से प्रदेश में पुलिसिंग व्यवस्था सवालों के घेरे में है|

सूत्र तस्दीक करते है,कि कभी फ़र्जी तौर पर गुनाह कबूल करवाने तो कभी,अवैध वसूली के लिए पुलिस टॉर्चर से जुड़ी गंभीर दास्तानें ”कस्टोडियल डेथ” की ”क्राइम स्टोरी” का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है| ऐसे गुनाहों में शामिल पुलिस कर्मियों की लम्बी फ़ेहरिस्त बताई जाती है,जिसमे गिने-चुने कर्मियों को दोषी ठहराया गया,जबकि थाना प्रभारी से लेकर उच्च अधिकारियों को जाँच अधिकारियों ने अपने ही स्तर पर क्लीनचीट देने में कोई देरी नहीं की थी| ऐसे संदेही अधिकारियों के हितों का विवेचना के दौरान बखूबी ख्याल रखा गया था| यह भी तस्दीक की जाती है,कि ”कस्टोडियल डेथ” में संलग्न पाए गए,कई पुलिस अधिकारियों के प्रति पुलिस मुख्यालय के उदार रवैये से विवादित पुलिस अधिकारी मनचाही पोस्टिंग पाने में भी कामयाब रहे है| छत्तीसगढ़ में बीते 3 सालों में ”कस्टोडियल डेथ” के मामलों में अचानक आई तेज़ी के लिए पुलिस मुख्यालय की ग़ैर-जिम्मेदार कार्यप्रणाली सामने आई है|

जानकारों के मुताबिक,सुप्रीम कोर्ट का श्रवण सूर्यवंशी की मौत मामले में ताजा हस्तक्षेप केवल एक व्यक्ति की मौत का मामला नहीं है। यह सवाल खड़ा करता है,कि हिरासत में होने वाली मौतों की जांच पुलिस के अपने स्तर में कितनी स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध होती है ? अगर किसी मामले में न्यायिक जांच रिपोर्ट आने के बाद भी FIR के लिए पीड़ित परिवार को ढाई साल से ज्यादा समय का इंतजार करना पड़े और पुलिस मुख्यालय अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ ले तो,आखिरकार सिस्टम का क्या होगा ? सुप्रीम कोर्ट को मामले की जांच CBI को सौंपनी पड़े,तो राज्य सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठना लाज़िमी है।

प्रदेश में ”कस्टोडियल डेथ” के मामलों में जहाँ तेज़ी आई है,वही ऐसे गंभीर प्रकरणों की जाँच पड़ताल को लेकर पुलिस का विवादित रवैया भी सामने आया है|कई मौकों पर पूछताछ के नाम पर उगाही का मकसद,तो कभी संदेहियों के साथ मारपीट और झूठे केस में फंसाने के नाम पर ”कस्टोडियल डेथ” के मामले सामने आए है| इन मामलों में दोषियों को ”क्लीनचिट” देने और पीड़ितों की सुध तक नहीं लेने के मामले में प्रदेश का ”पुलिस मुख्यालय’‘ और ”DGP’‘ प्रशासनिक हलकों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सुर्खियां बटोर रहे है |

गौरतलब है,कि सुप्रीम कोर्ट ने ”कस्टोडियल डेथ” की विवेचना से जुड़े एक मामले में ”DGP” को फटकार लगाते हुए, अयोग्य (Totally Incompetent) करार दिया था| इसी माह अगस्त 2026 में कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) के एक मामले की सुनवाई के दौरान Supreme Court ने छत्तीसगढ़ पुलिस महानिदेशक (DGP) अरुण देव गौतम को लेकर “पूरी तरह अयोग्य” (Totally Incompetent) टिप्पणी की है। अदालत ने यह सख्त टिप्पणी मामले में एफआईआर दर्ज करने में ढाई साल की देरी और लीपापोती करने के रैवये पर नाराजगी जताते हुए की थी| सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने राज्य का रुख़ तो कर लिया है,बिलासपुर में उसकी एंट्री से पुलिस मुख्यालय में गहमा-गहमी तेज़ है |

बताते है,कि घटनाक्रम से जुड़े पुलिस के स्थानीय निचले स्तर के कई कर्मी अपनी जुबान खोलने से कतरा रहे है,दरअसल वरिष्ठ अधिकारियों के पद और प्रभाव के बैनर तले हकीकत बयां करने के मामले में उनकी जुबान अभी से लडखड़ाने लगी है | उधर,वैधानिक कार्यवाही के लिए DGP समेत अन्य अफसरों के ख़िलाफ़ राज्य सरकार ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाए है | इस मामले को लेकर “न्यूज़ टुडे छत्तीसगढ़” ने गृहमंत्री समेत राज्य सरकार के जिम्मेदार अफसरों से संपर्क किया,लेकिन कोई प्रतिउत्तर प्राप्त नहीं हो पाया |
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