
रायपुर : छत्तीसगढ़ में सुशासन के सरकारी दावों के बीच उन पुलिस अधिकारियों की सिस्टम में पुर्नवापसी की बयार बह रही है,जिन्होंने ”ख़ाकी वर्दी” पहनकर लूटपाट और गैर-कानूनी गतिविधियों को अंजाम देने में कोई कसर बाकि नहीं छोड़ी थी|बीजेपी के सत्ता में आते ही,पूर्व मुख्यमंत्री “भू-PAY” गिरोह में शामिल, ऐसे दागी पुलिस अफसरों के ख़िलाफ़ वैधानिक कार्यवाही, तो दूर की बात है, बीजेपी शासनकाल में उन्हें उपकृत करने का ”सियासी खेल” जोरों पर जारी बताया जा रहा है|
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हालत यह है,कि बीजेपी के आम कार्यकर्ता अपनी ही सरकार का सियासी रंग देख कर हैरानी जता रहे है| कांग्रेस के 5 वर्ष के कार्यकाल में वर्दी की आढ़ में महादेव एप्प सट्टा घोटालों से लेकर ”आतंक का राज” स्थापित में पूर्व मुख्यमंत्री और गिरोह के सरगना बघेल का ”हाथ मजबूत” करने वाले दागी पुलिस अफसरों को अब मनचाहे कार्य स्थलों पर ट्रांसफर पोस्टिंग प्रदान करने का सिलसिला जोरों पर है | उन्हें ”ट्रांसफर” का तोहफा” हाथों-हाथ प्रदान करने के प्रकरणों से जहाँ कांग्रेस की बांछे खिली हुई है,वही बीजेपी के गलियारों में पार्टी के आम कार्यकर्ता अपनी बेबसी पर आंसू बहा रहे है| उन्हें एहसास होने लगा है,कि राज्य में भले ही सरकार बीजेपी की हो,लेकिन कांग्रेस के “ख़ाकी वर्दीधारी” पुलिस अधिकारियों के हितों को ध्यान में रख कर मुख्यमंत्री के अधिकारों का ”उपयोग-दुरूपयोग” जोरों पर किया जा रहा है |

प्रधानमंत्री मोदी का भ्रष्टाचारियों को सबक सिखाने के दावे की हवा बीजेपी शासित छत्तीसगढ़ में ही निकल गई है| विधानसभा चुनाव के दौरान ही नहीं बल्कि,लोकसभा और राज्यसभा में कई मौकों पर पीएम मोदी ने भ्रष्टाचारियों को कड़ी नसीहत दी थी| लेकिन,सत्ता में आने के बाद राज्य की बीजेपी सरकार ने ही पीएम के इस दावे को रद्दी की टोकरी में डाल दिया है, ऐसे दर्जनों प्रकरणों को देख कर बीजेपी के आम कार्यकर्ता भी हैरानी जता रहे है|

उन्हें चिंता इस बात की है,कि विधानसभा चुनाव 2028 में वे क्या मुँह लेकर जनता के बीच जाएंगे ? जब उनकी भी सरकार में दागी पुलिस अफसरों की तूती बोल रही है,तो वे आखिर कैसे लूटेरे कांग्रेसी गिरोह का मुकाबला करेंगे| दरअसल,कांग्रेस शासन काल में वर्दीधारी दरिंदों की कारगुजारियों से आम जनता, कारोबारियों, उद्योगपतियों और प्रेस मीडिया से जुड़े सैंकड़ों लोगो का जीना मुहाल हो गया था| ऐसे वर्दीधारी आरोपियों को सुशासन का लाभ मुहैया कराने से कांग्रेस के हाथ में बीजेपी के ”कमल” का मुरझाना लाज़िमी ठहराया जा रहा है |

आख़िर किसके इशारे पर कांग्रेस के हाथों में बीजेपी के कमल को खिलाया जा रहा है ? ये वाक़ई कमल है या फिर “भू-PAY” का कमाल ? इसे लेकर सियासत भी गरमाने लगी है| बीजेपी के सियासी सुशासन को लेकर एक वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता ने PMO में शिकायत दर्ज कराई है| इसमें उन दागी पुलिस अफसरों का ब्यौरा भी पेश किया गया है,जिन्होंने कायदे-कानूनों को दरकिनार कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था |ऐसे अफसरों को चुन-चुन कर मैदानी इलाकों में ट्रांसफर पोस्टिंग प्रदान करने के मामले ने राज्य की बीजेपी सरकार की मंशा पर सवालियां निशान लगा दिया है |

उनके मुताबिक,प्रदेश में सरकार बदली लेकिन,पुराने दागी चेहरों की वापसी सुनिश्चित नहीं हो पाई और ना ही ऐसे दागियों के ख़िलाफ़ वैधानिक कार्यवाही करने के मामले में बीजेपी सरकार ने कोई दिलचस्पी दिखाई ? पीएमओ को की गई इस शिकायत में पुलिस पोस्टिंग पर सवाल दाग़ते हुए,पर्दे के पीछे से जारी खेल से वरिष्ठ नेताओं को अवगत कराया गया है |

सूत्रों की मानें,तो केंद्र और राज्य के ख़ुफ़िया तंत्र के गलियारों में भी इस पत्र को लेकर गहमा-गहमी देखी जा रही है | पुलिस महकमे में “भू-PAY” गिरोह के पुराने चेहरों की मौजूदा सिस्टम में पुर्नवापसी से “ट्रांसफर लिस्ट” पर अब उंगलियां उठने लगी है | इसके सियासी कनेक्शन भी तलाशे जा रहे है | प्रदेश के पुलिस महकमे में “ट्रांसफर उद्योग” की शक्ल ले चुके गैर-कानूनी कारोबार की PMO से की गई CBI जाँच की मांग का यह पत्र राजनैतिक और प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है|

इस पत्र में कहा गया है,कि महादेव सट्टा एप्प घोटाले,प्रशासनिक अनियमितता,अवैध लेन-देन,वर्दी में “भू-PAY” गिरोह से राजनीतिक ”सांठ-गांठ” और पूरे 5 बरस तक आतंक का पर्याय रहे,पुलिस अधिकारियों की पुनः यथोचित स्थानों पर तैनाती की जा रही है| इसमें राजधानी रायपुर के अलावा दुर्ग, राजनांदगांव ,महासमुंद,धमतरी और बिलासपुर जैसे महत्त्वपूर्ण जिले शामिल है| इस ट्रांसफर पोस्टिंग को पूर्व मुख्यमंत्री के आदेशों के परिपालन सुनिश्चित करने से जोड़कर इस शिकायत को देखा जा रहा है |


जानकारी के मुताबिक,दुर्ग के कुशलाल ध्रुव नामक एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा PMO का ध्यान इस अत्यंत गंभीर प्रशासनिक एवं सुरक्षा संबंधी अनियमितताओं की ओर दिलाया गया है | हाल ही में गृह विभाग द्वारा जारी स्थानांतरण एवं पदस्थापना सूचियों में पुलिस महकमे में बरती गई गंभीर प्रशासनिक अनियमितताएं, हितों का टकराव (Conflict of Interest) तथा संदिग्ध दाग वाले अधिकारियों को पुनः महत्वपूर्ण पदों पर स्थापित करने के हित-जनक तथ्यों से PMO को अवगत कराने का मामला सामने आया है| शिकायत में बताया गया है,कि अनंत साहू (पूर्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, दुर्ग) की भूमिका इस पूरे स्थानांतरण-पदस्थापना ”कारोबार चक्र” में अत्यंत संदिग्ध है।

शिकायतकर्ता ने स्वतः संग्रहित साक्ष्यों के अनुसार दावा किया है,कि गृह मंत्री कार्यालय में सुरक्षा अधिकारी/स्टाफ में संलग्न अधिकारी ”अनंत साहू” ने अपने प्रशासनिक प्रभाव एवं पद का दुरुपयोग करते हुए पूर्ववर्ती सरकार के समय विवादित रहे अधिकारियों की पुनर्पदस्थापना दुर्ग समेत अन्य कई जिले में कराई है| शिकायत में यह भी कहा गया है,कि विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान “अनंत साहू” दुर्ग में एडिशनल एसपी ग्रामीण के पद पर तैनात थे।

आरोप है, कि इस दौरान स्वयं वे ईडी (ED) की कार्रवाई पर नजर रखने से लेकर महादेव सट्टा फंड प्रबंधन में सक्रिय थे। जबकि,पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के हितों को दृष्टिगत रखकर बीजेपी की परिवर्तन यात्रा के दौरान आम कार्यकर्ताओं की फोटो-तस्वीरें और वीडियो संग्रहित कर कांग्रेस पदाधिकारियो को सौंपना उनकी कार्यप्रणाली का अभिन्न अंग था | इस सिलसिले में किसी संजय वर्मा नामक शख्स के साथ कहासुनी होने की घटनाएं ब्यौरा भी इस शिकायत में पेश किया गया है | बीजेपी के सत्ता में आते ही प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा ने अनंत साहू को मंत्री स्टाफ में शामिल किया था | शिकायत के मुताबिक,स्थानांतरण एवं पदस्थापना में अनैतिक लेन-देन के खेल में अनंत साहू की भूमिका का बखान भी किया गया है|

शिकायत में विवादित अधिकारियों की सूची संलग्न करते हुए,ऐसे अफसरों की भूमिका सुर्ख़ियों में है|न्यूज़ टुडे छत्तीसगढ़ को हाथ लगे इस शिकायती पत्र में जिन अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठाई गई है,इसका ब्यौरा निम्नानुसार है-
1 मोहित शेखर पटेल (एडिशनल एसपी, दुर्ग ग्रामीण) पूर्ववर्ती सरकार में कोतवाली सीएसपी रहते हुए अर्जुन सिंह चौधरी के प्रकरण में भाजपा नेता को झूठे मामले में फंसाने तथा राजनीतिक आकाओं के प्रति वफादारी निभाने के गंभीर आरोप।
2 कौशिक पटेल (अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, ट्रैफिक)अपने साले के नाम पर महादेव सट्टा का संचालन करने,ईडी (ED) की छापेमारी के पश्चात दिल्ली स्टेशन से महिला के नाम से पकड़े जाने जैसे गंभीर आरोपों के बावजूद ट्रैफिक एडिशनल एसपी पद पर नियुक्ति।
3 विशाल सोनी (डीएसपी, ट्रैफिक)देवेंद्र नाग के अधिवक्ता प्रकरण के खिलाफ अपनी महिला मित्र (सोमिया साहू) को चुनाव मैदान में उतारने तथा चुनाव प्रचार का पूर्ण जिम्मा संभालने के आरोप, जिसका खुलासा स्वयं पोस्टों के माध्यम से किया गया।

यह भी बताया गया है,कि 2001 बैच के आईपीएस आनंद छाबड़ा,2005 बैच के शेख आरिफ़,2007 बैच के प्रशांत अग्रवाल समेत लगभग आधा दर्जन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारियों को भी उपकृत करने के लिए “विशेष पैकेज” की व्यवस्था राज्य की बीजेपी सरकार द्वारा की गई है|नतीजतन,सीबीआई की छापेमारी के बावजूद ऐसे दागी अफसरों के खिलाफ बीते 3 सालों में कोई वैधानिक कदम नहीं उठाए गए है| जबकि,गृहमंत्री खुद भी इन अफसरों के बचाव में मैदान में डटे बताए जाते है |

यह भी बताया गया है,कि कई अपराधों में लिप्त होने के बावजूद भारतीय पुलिस सेवा के ऐसे दागी अफसरों के खिलाफ राज्य की बीजेपी सरकार ने आरोप पत्र जारी करने में भारी लापरवाही बरती है| शिकायत के मुताबिक,दागी आईपीएस अधिकारियों के काले कारनामों की लंबी फेहरिस्त के बावजूद वैधानिक कार्यवाही ना होने का मामला,”विशेष पैकेज” के अन्तर्गत सुशासन की धज्जियां उड़ा रहा है | फ़िलहाल,शिकायती पत्र के तमाम बिंदु राजनैतिक गलियारों में ख़ूब सुर्खियां बटोर रहे है| देखना गौरतलब होगा,कि कांग्रेस के हाथो में खिलता कमल पुलिस महकमे में क्या गुल खिलाता है ?
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