महासमुंद के बाद बेमेतरा कलेक्टर का रवैया भी सुर्ख़ियों में, अपर कलेक्टर ने लगाई रहम की गुहार,कुछ भी हुआ तो-महिला ”कलेक्टर जिम्मेदार”…

बेमेतरा/रायपुर : छत्तीसगढ़ में कई IAS-कलेक्टर राज्य की बीजेपी सरकार की गले की फ़ांस बन गए है| उनकी कार्यप्रणाली से ना केवल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार की छवि पर चोट पड़ रही है,बल्कि छत्तीसगढ़ शासन के रवैये पर भी सवाल खड़े हो रहे है, ताज़ा मामला, बेमेतरा कलेक्टर वर्ष 2018 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं की कार्यप्रणाली को लेकर जिले के अपर कलेक्टर की गुहार से जुड़ा है|

पीड़ित अपर कलेक्टर ने कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं पर मानसिक प्रताड़ना देने का गंभीर आरोप लगाया है|उन्होंने,इसे लेकर एक शिकायत एसटी आयोग में करते हुए न्याय दिलाने की गुहार लगाई है।बेमेतरा जिले के अपर कलेक्टर गुड्डू लाल जगत ने अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष को शिकायती पत्र में आरोप लगाया है,कि बेमेतरा कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं  ने उनका ”जीना मुहाल” कर दिया है |उन्होंने अंदेशा जाहिर करते हुए कहा है,कि उनके साथ किसी भी तरह की अप्रिय स्थिती निर्मित होने के लिए सिर्फ ”महिला कलेक्टर” जिम्मेदार है|

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इस शिकायत में आगे कहा गया है,कि कलेक्टर,जानबूझकर मानसिक रूप से प्रताड़ित और परेशान कर रही है| उन्हें,आए दिन बार-बार कारण बताओ नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर जवाब देने के लिए मजबूर किया जा रहा है| पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है, कि पिछले 15 दिनों में अपर कलेक्टर को ”पांच बार” कारण बताओ नोटिस जारी कर उनकी हालत पतली कर दी गई है| जबकि,यह सभी नोटिस बिना किसी ठोस वजह के जारी किए गए है | 

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उन्होंने अपनी आपबीती सुनाते हुए ST आयोग को बताया है,कि वह इन नोटिस का जवाब देने पहुंचे तो कलेक्टर चैंबर के बाहर उन्हें पौने दो घंटे तक इंतजार कराया जाता है| उन्होंने बताया,कि उनकी ख़राब तबीयत की जानकारी कलेक्टर को संज्ञान में देने के बावज़ूद भी बार-बार घंटों इंतज़ार कराया जाता है| उन्होंने, इस सिलसिले में सामूहिक कन्या विवाह  अव्यवस्था मामले का जिक्र करते हुए,कलेक्टर के रवैये पर आपत्ति जाहिर की है| पीड़ित अपर कलेक्टर ने शिकायत मेंयह भी कहा है कि कलेक्टर मैडम द्वारा दी जा रही,मानसिक प्रताड़ना से वे बहुत तनाव में हैं,और पिछले एक हफ्ते से रात भर सो नहीं पा रहे है। उन्होंने,अंदेशा जाहिर करते हुए,शिकायत में कहा है,कि मानसिक तनाव की वजह से उनके साथ कोई दुर्घटना होती है या उनकी जान चली जाती है तो इसके लिए सिर्फ और सिर्फ कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई जिम्मेदार होंगी। 

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बेमेतरा जिले में बतौर कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं की कार्यप्रणाली शुरुआती दौर से विवादों में बताई जाती है |उनकी कार्यप्रणाली से जुड़ा एक विवादित मामला इसी साल मई माह में उस वक्त सामने आया था,जब सामूहिक कन्या विवाह के दौरान मुख्यमंत्री समेत तमाम मंत्रियों की एंट्री पिछले दरवाज़े से करवाई गई थी|इसे VIP सुरक्षा में चूक के साथ-साथ भारी  अव्यवस्था से जोड़कर देखा गया था|

दरअसल,प्रशासन ने मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष का स्वागत ”पीछे” से किया था| इस घटना को लेकर विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने नाराजगी जाहिर करते हुए  कलेक्टर और एसपी के रवैये पर एतराज़ जताया था|उन्होंने कहा था, कि अपने 15 साल के कार्यकाल में मैंने ऐसी अव्यवस्था कभी नहीं देखी|बताया जाता है,कि पीड़ित अपर कलेक्टर ने अपनी शिकायत में इस घटना का जिक्र भी किया है| 

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 कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं की कार्यप्रणाली का दूसरा नमूना इसी वर्ष 21 जून को योग दिवस  कार्यक्रम पर नज़र आया था| इस दौरान जिले में साझा के विधायक ईश्वर साहू की कार्यक्रम में जानबूझ कर फोटो नहीं लगाने से जुड़ा बताया जाता है| बताते है,कि कलेक्टर के रवैये से नाराज़ होकर विधायक साहू ने कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया था। हालांकि,कार्यकर्ताओं के मन मनौवल के बाद विधायक जी दोबारा मंच पर लौटे थे | इन दोनों घटनाओं के सामने आये अभी कुछ महीने भी नहीं बीते, कि अब अपर कलेक्टर को लेकर यह नया विवाद सामने आया है।  

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छत्तीसगढ़ में नौकरशाही के रवैये को लेकर प्रशासनिक और राजनैतिक गलियारा सरगर्म है| रायपुर और दुर्ग के सांसदों ने कई बड़े अफसरों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की सूचना लोकसभा अध्यक्ष को दी है| सांसद और सीनियर आईएएस के टकराव का मामला अभी थमा ही नहीं,कि बेमेतरा से कलेक्टर और अपर कलेक्टर के बीच सीधी जंग छिड़ गई है| पीड़ित अपर कलेक्टर की शिकायत से साफ़ हो रहा है,कि यह विवाद महज आरोपों तक सीमित नहीं रह गया है,बल्कि अपर कलेक्टर की जिंदगी और मौत का सवाल बन गया है।

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दरअसल,राज्य में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार के लिए मुसीबत पैदा करने वाले IAS अधिकारियों को ”लीक” से हटकर उपकृत और प्रोत्साहित करने के लिए ”विशेष संरक्षण योजना” अघोषित रूप से लागू बताई जाती है| ऐसे में यह मामला भी सुर्ख़ियों में है| फ़िलहाल,प्रशासनिक हलकों में पीड़ित अपर कलेक्टर की शिकायत कितनी गंभीरता से ली जाएगी ? यह देखना गौरतलब होगा|

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