
रायपुर : छत्तीसगढ़ में सत्ता में काबिज़ बीजेपी के ख़िलाफ़,कांग्रेस को बैठे बिठाएं आए दिन नए-नए मुद्दे हाथ लग रहे है,ताज़ा मामला छत्तीसगढ़ पब्लिक सर्विस कमीशन की उस परीक्षा परिणामों को लेकर उंगलियां उठ रही है,जिसमें “स्पेशरानी” और ”न्यूज़” जैसे उम्मीदवारों के नाम चयनित सूची में शामिल किए गए थे|

इन चौंकाने वालों नामों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री समेत कांग्रेस के कई नेताओं ने आपत्ति दर्ज़ करते हुए,चयन सूची पर सवालियां निशान लगाया है|जबकि, CGPSC ने साफ़ किया है,कि जिन नामों से उम्मीदवारों ने आवेदन पत्र में अपने नाम दर्ज़ किए थे,उन्हीं नामों को प्रारंभिक परिणाम सूची में शामिल किया गया है,अभ्यर्थियों के नामों को लेकर आयोग ने यह भी साफ़ किया है,कि चयनित उम्मीदवारों के ”नाम” में कोई काट-छांट या हेर-फेर नहीं किया गया है|CGPSC की दलीलों के बीच कांग्रेस ने मामले की उच्च स्तरीय जाँच की मांग की है|

यही नहीं,”स्पेशरानी” और ”न्यूज़” जैसे चौंकाने वाले नामों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने युवाओं के बीच आंदोलन की तैयारी भी शुरू कर दी है| CGPSC में लगातार जारी,फर्जीवाड़ों ने उसकी विश्वसनीयता पर करारी चोट की है,आयोग के कई पदाधिकारी इन दिनों जेल में है,उनके खिलाफ CBI जाँच अभी भी जारी बताई जाती है|राज्य की पूर्ववर्ती ”भू-PAY” सरकार के कार्यकाल में इन पदाधिकारियों ने उम्मीदवारों से मोटी रक़म लेकर,DSP और डिप्टी कलेक्टर जैसे महत्त्वपूर्ण पदों पर कई कुपात्र उम्मीदवारों की भर्ती की थी | CGPSC के तत्कालीन चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी समेत लगभग आधा दर्ज़न अन्य पदाधिकारी इन मामलों में सलाखों के पीछे है|

गौरतलब है,कि पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने ही टामन सिंह सोनवानी की नियुक्ति कर CGPSC में पिछले दरवाज़े से ”अपनों” को उपकृत करने की कवायत शुरू की थी | पूर्व मुख्यमंत्री बघेल की बेटी ”दीप्ति बघेल” को भी इसी तर्ज़ पर प्रोफ़ेसर के पद पर चयनित किए जाने का मामला सुर्ख़ियों में है|CGPSC की पिछले वर्षों में आयोजित विभिन्न परीक्षाओं की चयन सूची के दर्जनों प्रकरण हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में आज भी विचाराधीन है| यह भी तस्दीक की जा रही है,कि प्रदेश में कांग्रेस समर्थित नौकरशाही,बीजेपी सरकार को घेरने के लिए कई विवादित फैसलों को अंजाम दे रही है|

बीजेपी नेता उज्जवल दीपक ने सीएम विष्णुदेव साय से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की बेटी दीप्ति बघेल की सहायक प्राध्यापक पद पर हुए चयन की भी सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने इस सिलसिले में सीएम साय को ज्ञापन भी सौंपा था। उज्जलव दीपक ने अपने ज्ञापन में कहा- सन 2018 से लेकर 2023 तक आयोजित सभी परीक्षाएं और भर्तियों की सीबीआई से जांच जारी है। लेकिन,पूर्व मुख्यमंत्री की पुत्री के चयन का मामला हासिए में है | उन्होंने कांग्रेस कार्यकाल में 2021 और 2022 में हुई सभी नियुक्तियों को रद्द करने की मांग की है।बता दें,कि छत्तीसगढ़ लोकसेवा आयोग में हुई घोटाले की सीबीआई लगातार जांच कर रही है। इसमें नीतेश सोनवानी, साहिल सोनवानी, श्रवण कुमार गोयल, शशांक गोयल, भूमिका कटियार समेत तत्कालीन डेप्युची एग्जाम कंट्रोलर ललित गणवीर को गिरफ्तार किया था। जेल की हवा खाने के बाद इनमें से कुछ आरोपियों को अदालत से जमानत भी प्राप्त हुई है |

दावा किया जा रहा है,कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार के जनहितैषी कार्यों पर ब्रेक लगाने के लिए नौकरशाही का यह धड़ा नए-नए मुद्दों और भ्रामक जानकारी को विपक्ष के हाथो सौंप कर अपनी राजनैतिक रोटी सेंकने में जुटा है| जानकारों के मुताबिक,राज्य की बीजेपी सरकार के लगभग 3 साल के कार्यकाल में नौकरशाही के कांग्रेसीकरण पर लगाम लगाने के मामले में बीजेपी सरकार को कोई कामयाबी नहीं मिल पाई है|नतीज़तन,राजनैतिक रंग में रंगे कई अफ़सर कांग्रेस को लगातार ऐसे मुद्दे थमा रहे है,जो आम जनता के बीच बीजेपी सरकार की छवि को तार-तार करने में सहायक साबित हो रहे है|

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) द्वारा आयोजित सूबेदार, उप निरीक्षक (SI) और प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा 2024 के प्रारंभिक नतीजों को लेकर प्रदेश में नया विवाद खड़ा हो गया है. मुख्य परीक्षा के लिए सफल अभ्यर्थियों की सूची में कुछ बेहद अटपटे या अस्वाभाविक नाम सामने आने के बाद आयोग द्वारा प्रक्रिया में लाई गई,चयन सूची सवालों के घेरे में है.मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने हालिया घोषित अभ्यर्थियों की सूची में शामिल इन संदिग्ध नामों को लेकर आयोग की व्यवस्था और पारदर्शिता पर निशाना साधा है|

जानकारी के मुताबिक,सूची के क्रमांक 93 पर ‘MANBAS’, क्रमांक 467 पर ‘SPACERANI’ और क्रमांक 6074 पर केवल ‘NEWS’ नाम दर्ज है. इन नामों के सामने आते ही प्रतियोगी छात्रों के अलावा राजनीतिक गलियारों में फर्जीवाड़े की चर्चाएं तेज हो गई हैं | कांग्रेस नेताओं ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की इस सूची पर कड़ी आपत्ति जताई है| उनके मुताबिक,इस तरह के काल्पनिक और अटपटे नाम किसी गंभीर लापरवाही या गड़बड़ी की तरफ इशारा करते हैं. कांग्रेस के कई नेताओं ने साय सरकार से सवाल किया है, कि क्या यह महज तकनीकी त्रुटि और डाटा एंट्री की लापरवाही है या फिर इसके पीछे फर्जी अभ्यर्थियों के जरिए कोई बड़ा खेल रचाया गया है | विपक्ष ने स्पष्ट मांग की है कि मुख्य परीक्षा से पहले ऐसे सभी अभ्यर्थियों के आवेदन पत्रों और दस्तावेजों की गहनता से जांच की जाए ताकि पारदर्शी माहौल में वास्तविक योग्य युवाओं को उनका हक मिल सके|

उधर,विवाद सामने आने पर छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने आधिकारिक सफाई जारी की है। आयोग ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही रील्स और वीडियो में किए जा रहे दावों को पूरी तरह भ्रामक बताया है। उसका कहना है, कि परीक्षा परिणाम में जिन नामों का उल्लेख किया गया है, वे वही नाम हैं जिन्हें अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन आवेदन भरते समय स्वयं दर्ज कर अंतिम रूप से सबमिट किया था। आयोग ने स्पष्ट किया कि नामों में किसी तरह का बदलाव या छेड़छाड़ नहीं की गई है।

उसके मुताबिक, इन्हीं नामों के आधार पर अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड जारी किए गए थे। दस्तावेजों का सत्यापन, शारीरिक दक्षता परीक्षा यानी PST और प्रारंभिक लिखित परीक्षा भी इन्हीं विवरणों के आधार पर पूरी कराई गई है| CGPSC ने सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे आरोपों को तथ्यों से परे बताया हैं,उसने यह भी कहा है,कि अनर्गल प्रचारों का परीक्षा प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है। ऐसे में युवाओं की निगाहें निष्पक्ष जांच और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। इस बीच राजनीतिक और कानूनी स्तर पर CGPSC विवाद फिर नए सिरे से तूल पकड़ रहा है|





