
चीनी की बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए केंद्र सरकार ने सप्लाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। सितंबर से चीनी मिलों को बिक्री का कोटा हर महीने की बजाय 15-15 दिन के आधार पर दिया जाएगा। सरकार का दावा है कि देश में चीनी की कोई वास्तविक कमी नहीं है और हाल के दिनों में एक्स-मिल कीमतों में करीब 20 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई है। अब इसका असर खुदरा बाजार में भी धीरे-धीरे नजर आने लगा है।

सरकार की जांच में कुछ मिलों के स्टॉक और बिक्री को लेकर अनियमितताएं भी सामने आई हैं। कहीं घोषित मात्रा से ज्यादा चीनी का भंडार मिला तो कहीं आवंटित कोटे के मुकाबले कम बिक्री की गई। सरकार के मुताबिक कई मामलों में मिल से चीनी बिक जाने के बावजूद खरीदार उसे महीने के आखिर में उठाते थे, जिससे बाजार में उपलब्धता कम दिखाई देती थी। नई व्यवस्था में मिलों को आवंटित चीनी का कम से कम 40 फीसदी हिस्सा पहले सप्ताह में बेचने का निर्देश दिया गया है। साथ ही बिक्री के सात दिनों के भीतर चीनी डिस्पैच करना भी जरूरी होगा।

चीनी की कीमतों पर दबाव कम करने के लिए सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति भी दी है। बड़े थोक खरीदारों को जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा नहीं करने की हिदायत दी गई है, ताकि जमाखोरी पर रोक लग सके। अब नजर अक्टूबर से शुरू होने वाले 2026-27 चीनी सीजन पर है, जिसमें 15 अक्टूबर से गन्ने की पेराई शुरू होने की उम्मीद है। सरकार को उम्मीद है कि नए सीजन में उत्पादन बढ़ने और सप्लाई व्यवस्था मजबूत होने से बाजार में चीनी की उपलब्धता बेहतर होगी और आने वाले समय में आम लोगों को कीमतों में और राहत मिल सकती है।







