
नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है। त्रिशुली नदी समेत कई इलाकों में हालात लगातार चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। अब तक 616 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 1900 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। खराब मौसम और लगातार बढ़ते जलस्तर के चलते राहत और बचाव अभियान पर भी असर पड़ा है। त्रिशुली नदी में पानी बढ़ने और हेलीकॉप्टर उड़ान न भर पाने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन को फिलहाल रोकना पड़ा है। प्रशासन ने नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।

इस मुश्किल घड़ी में भारत भी नेपाल की मदद के लिए आगे आया है। नेपाल सरकार के अनुरोध पर 11 सदस्यीय भारतीय बचाव दल वहां पहुंच चुका है, जिसमें मेडिकल स्टाफ और सुरंग बचाव विशेषज्ञ शामिल हैं। भारतीय वायुसेना का सी-130 विमान भी दवाइयों और खाद्य सामग्री समेत करीब 10 टन राहत सामग्री लेकर रवाना हुआ है। वहीं नेपाल ने अब जटिल बचाव अभियानों और शवों की पहचान के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मदद लेने की तैयारी शुरू कर दी है। WHO ने भी राहत प्रयासों के लिए 1.5 लाख अमेरिकी डॉलर की तत्काल सहायता जारी की है।

बाढ़ की इस त्रासदी में कई भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। पश्चिम बंगाल से नेपाल गए 39 पर्यटकों में से दो लोगों से संपर्क हो गया है, जबकि 37 अब भी लापता बताए जा रहे हैं। महाराष्ट्र के नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के प्रयास भी जारी हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों से कई लोगों की सुरक्षित वापसी संभव हुई है। दूसरी ओर, तिब्बत में भूस्खलन के मलबे से बनी झील का जलस्तर बढ़ने की खबर ने नई चिंता पैदा कर दी है, जिससे आसपास के इलाकों में फिर भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है।






