
रायपुर/दिल्ली : छत्तीसगढ़ में विवादित रिटायर अधिकारियों को पिछले दरवाजे से मनपसंद महकमों में ”संविदा नियुक्ति” हाथों-हाथ दिए जाने के प्रकरणों को लेकर प्रशासनिक और राजनैतिक गलियारा गरमाया हुआ है। इन गलियारों में ”चलनशील” नौकरशाही के उन अफसरों की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठ रही है,जिनके निर्देश पर ”CSEB” और “NRDA” जैसे महत्त्वपूर्ण संस्थानों की बागडोर रिटायर अधिकारियों के हाथों में सौंपी जा रही है। ऐसे विवादित संविदा नियुक्ति आदेश मुख्यमंत्री सचिवालय के दिशा-निर्देशों के तहत धड़ा-धड़ जारी किए जा रहे है। जबकि,संविदा नियुक्ति के तहत भरे जा रहे पदों की भर्ती को लेकर ना तो,जन-सूचनाएं प्रकाशित की जा रही है,और ना ही छत्तीसगढ़ शासन की तय कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है|

रिटायर अधिकारियों को पिछले दरवाजे से संविदा नियुक्ति प्रदान करने की जद्दोजहद में जुटे चलनशील अधिकारियों का दावा है,कि ऐसे महत्त्वपूर्ण पदों पर चयनित किए जा रहे,संविदा उम्मीदवारों नियुक्तियां किसी प्रभावशील अधिकारी या नौकरशाही के ”निर्देश” पर नहीं बल्कि ”मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय” की मंशा,सहमति और दिशा-निर्देशों के तहत प्रदान की जा रही है,इसमें मुख्यमंत्री की पसंद-ना पसंद का बख़ूबी ख्याल रखा जा रहा है| नौकरशाही ने यह भी साफ़ कर दिया है,कि मुख्यमंत्री की पसंद-ना पसंद के आधार पर ही ऐसी आदेश जारी करने की प्रक्रिया जारी है|

उधर,मुख्यमंत्री सचिवलाय से जुड़े कई अन्य अधिकारी नाम ना जाहिर करने की शर्त पर यह भी दावा कर रहे है,कि विवादित नियुक्तियों से मुख्यमंत्री का कोई ”सरोकार” नहीं है| उन्होंने,नौकरशाही को सुशासन का पालन सुनिश्चित किए जाने को लेकर काफी सख़्त हिदायत और दिशा-निर्देश जारी किए है| सूत्रों के मुताबिक,NRDA और CSEB में ऐसी विवादित संविदा नियुक्तियों को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी बेख़बर बताए जाते है| ऐसी संविदा नियुक्तियों को लेकर मुख्यमंत्री सचिवालय की सक्रियता,सर्तकता और निष्ठा पर सवालियां निशान लग रहा है|

जानकारी के मुताबिक,नवा रायपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी (NRDA) में रिटायर अभियंता हरि ओम शर्मा को सेवानिर्वत्ति के ठीक 8 दिन बाद मुख्य अभियंता पद पर संविदा नियुक्ति प्रदान कर दी गई। जबकि,छत्तीसगढ़ स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (CSEB) में पिछले माह रिटायर अभियंता एस के नेताम को पुनः संविदा के आधार पर नियुक्ति देने के लिए आदेश जारी करने की प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है|

यह भी बताया जाता है,कि दोनों महकमों में मनपसंद अधिकारियों को पिछले दरवाजे से संविदा नियुक्ति प्रदान करने के मामले में ”मुख्यमंत्री” ने ना तो,कोई सहमति प्रदान की है,और ना ही ऐसे जारी होने वाले आदेशों को मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया गया है|सूत्रों के मुताबिक,विभाग में योग्य और अर्हता प्राप्त अधिकारियों की गैर मौजूदगी का हवाला देकर संविदा नियुक्ति का फलता-फूलता धंधा बीजेपी के सुशासन के दावों को मुंह चिड़ा रहा है|

यह भी बताया जाता है,कि NRDA में संविदा नियुक्ति से पूर्व हरिओम शर्मा जल जीवन मिशन में बतौर अभियंता पदस्थ थे| जबकि,उनके खिलाफ राज्य के ACB-EOW तक में FIR दर्ज और प्रकरण जाँच-विवेचना के दायरे में बताया जाता है।इसी तर्ज पर हालिया रिटायर एस.के नेताम को विवादित कार्यप्रणाली के बावजूद मुख्य अभियंता पद पर CSEB में संविदा के तहत पुनर्नियुक्ति आदेश ”आज-कल” में जारी किए जाने की संभावना जताई जा रही है|

विवादित अफसरों के भ्रष्टाचारों का हवाला देते हुए, NRDA में पदस्थ किए गए,मुख्य अभियंता हरिओम शर्मा के साथ जल जीवन मिशन में पदस्थ मौजूदा मुख्य अभियंता केके कटारे का नाम भी ACB-EOW में दर्ज FIR में शामिल बताया जाता ह | जबकि,जातिगत मामलों की उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने मुख्य अभियंता केके कटारे के जाति प्रमाण पत्र को फर्जी पाया था| ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत आने वाले जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार की शिकायते आम और उसकी जाँच खास दायरे में बताई जाती है| सड़कों से लेकर विधानसभा तक इस महकमे में व्याप्त अनियमितता के मामले सुशासन की सरकार पर भारी पड़ रहे है,बतौर ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री विजय शर्मा की कार्यप्रणाली भी सुर्ख़ियों में है |

ऐसे अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और अनियमितता की दर्जनों गंभीर शिकायते छत्तीसगढ़ शासन के समक्ष लंबित बताई जाती है| तस्दीक की जाती है,कि ऐसे दर्जनों मामलों में प्रशासनिक सुचिता पर जोर देने के बजाए,नौकरशाही का खास धड़ा “आपदा में अवसर” की तलाश में जुटा बताया जाता है| लिहाज़ा,संविदा नियुक्ति से प्रभावित महकमों में वो अधिकारी इंसाफ की गुहार लगा रहे है,जिनके पदों को यथावत रखते हुए,रिटायर अधिकारीयों को पिछले दरवाजे से पुनः उसी ”कुर्सी” पर बैठाया जा रहा है |

प्रदेश में प्रशासनिक मामलों के कई जानकारों के मुताबिक, दागी रिटायर अधिकारियों की संविदा नियुक्ति ना तो कायदे-कानूनों के तहत की जा रही है,और ना ही मुख्यमंत्री सचिवालय स्तर पर विवादित नियुक्तियों की हकीकत और कानूनी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है| उनकी माने तो,कई खास मामलों में सुशासन की विफलता का ठीकरा मुख्यमंत्री के सिर फोड़ने की कवायतें जोरों पर है| जबकि,मुख्यमंत्री ना केवल विधिवत आदेशों को ही जारी करने पर जोर देते है,बल्कि ”कानून का राज” स्थापित करने को लेकर पुरज़ोर प्रयास करते है |

छत्तीसगढ़ में बीजेपी सरकार के सत्ता में आती ही,संविदा नियुक्ति पर भी रोक लगा दी गई थी| खासतौर पर तो,इसे सुशासन की कार्यशैली से बाहर रखा गया था| लेकिन,राज्य में साय सरकार के ढाई साल गुजर जाने के बाद अचानक संविदा नियुक्तियों का नया दौर शुरू हो गया है | बताते है,कि कुछ खास औद्योगिक समूहों के हितों को देखते हुए नौकरशाही का एक धड़ा ”अपनों को उपकृत” करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहा है|संविदा नियुक्ति की बेला में उन योग्य अफसरों को पदोन्नति से वंचित कर दिया गया है, जो ना केवल योग्य है,बल्कि अर्हता प्राप्त भी है| बताते है,कि संविदा में नियुक्त किए जा रहे,अफसरों को उपकृत करने के लिए ऐसे अफसरों को ना तो,पदोन्नति प्रदान की जा रही है और ना ही सालों से डीपीसी और उससे जुडी वैधानिक प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया गया है।

छत्तीसगढ़ में सुशासन के बैनर तले रिटायर अधिकारियों को तश्तरी में परोस कर भेंट स्वरूप प्रदान की जा रही,’संविदा नियुक्ति’ को लेकर ”मुख्यमंत्री सचिवालय” क्या सचेत है ? क्या वो,संविदा नियुक्ति प्रदान करने की प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित कर प्रकरण मुख्यमंत्री के संज्ञान में ला रहा है ?क्या ऐसी विवादित नियुक्तियां सुशासन के दौर में जायज़ है? या फिर सुशासन के नाम पर राज्य की बीजेपी सरकार के अरमानों पर नौकरशाही का एक धड़ा पानी फेर रहा है ? जैसे सवाल इन दिनों मुँह बाएं खड़े है |

बीजेपी के आम कार्यकर्ता भी बेमौसम संविदा नियुक्ति के प्रकरणों को लेकर दो-चार होते बताए जाते है| इस गहमा-गहमी के बीच नौकरशाही के प्रभावशील धड़े के दावे और कार्यप्रणाली हैरान करने वाली बताई जाती है|

बीजेपी सरकार में ”सुशासन” के दावों को अमली जामा पहनाए जाने के जहाँ दर्जनों मामलों से सरकार के प्रति आम जन में विश्वास कायम हो रहा है,वही पिछले दरवाजे से रिटायर अधिकारियो को मलाईदार पदों पर संविदा नियुक्ति का मामला,मुख्यमंत्री साय सरकार के अरमानों पर पानी फेरने से जोड़कर देखा जा रहा है| फ़िलहाल,”संविदा के नियमो की” उड़ती धज्जियाँ बीजेपी सरकार के लिए गले की फांस बनती नजर आ रही है |
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