
रायपुर : छत्तीसगढ़ के चर्चित डॉ मिक्की मेहता हत्या-आत्महत्या मामले की उच्च स्तरीय जाँच के बीच इंसाफ की मुहिम में जुटे माणिक मेहता की संदिग्ध हालत में लाश मिलने से प्रदेश के राजनैतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक हलकों में गहमा-गहमी है| माणिक मेहता की लाश घर के वाशबेसिन पर झुकी हुई हालत में मिली है| इसके साथ ही 1988 बैच के आईपीएस मुकेश गुप्ता और उनकी कथित पत्नी डॉ मिक्की मेहता केस की जाँच के तौर-तरीकों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है| माणिक मेहता की मौत पर सवाल उठने लगे है|इसके साथ ही स्वर्गीय डॉ मिक्की मेहता के बाद उनके सगे भाई माणिक मेहता (भाई-बहन) दोनों की मौत की गुत्थी बुरी तरह से उलझ गई है| माणिक मेहता पिछले लगभग 25 सालों से अपनी स्वर्गीय बहन डॉ मिक्की मेहता को इंसाफ दिलाने के लिए पुलिस मुख्यालय की कार्यप्रणाली के साथ-साथ रिटायर्ड ADG मुकेश गुप्ता के साथ भी कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे|

रायपुर के डीडी नगर में अपने ही घर के वाशबेसिन में माणिक मेहता का शव मिलने सेसस्पेंस बढ़ गया है| डॉ मिक्की मेहता को इंसाफ दिलाने के लिए माणिक मेहता ने दिन-रात एक कर दिया था| रायपुर-बिलासपुर से लेकर दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट तक वे अपनी बहन की रहस्यमयी मौत की उच्च स्तरीय जाँच की मांग के सिलसिले में कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे| उन्होंने रायपुर के तत्कालीन एसपी मुकेश गुप्ता पर कई गंभीर आरोप लगाए थे| हालांकि,प्रकरण में कई स्तर की जाँच विवादों के घेरे में है,इसके चलते डॉ मिक्की मेहता को उनकी मौत के लम्बे अरसे बाद भी “ना तो इंसाफ” मिल पाया और “ना ही जाँच प्रकरण” अंजाम तक पहुंच पाया था | इस बीच माणिक मेहता की मौत ने राज्य में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है | उनकी अचानक मौत से एक बार फिर रिटायर्ड ADG मुकेश गुप्ता का नाम सुर्खियों में है | माणिक मेहता की अचानक मौत से कई सामाजिक कार्यकर्ता और राजनेता हैरत में बताए जाते है |

छत्तीसगढ़ के चर्चित डॉ मिक्की मेहता हत्या-आत्महत्या कांड की गुत्थी अभी सुलझी ही नहीं है,कि पीड़ित परिवार से एक मात्र सगे भाई की संदिग्ध हालातों में मौत की खबर सामने आई हैं| बताया जाता है,कि 55 वर्षीय माणिक मेहता का शव डीडी नगर स्थित उनके घर पर संदिग्ध हालत में पाया गया है| उनकी लाश किचन के वाशबेसिन पर गिरी हुई अवस्था में पाई गई| सूचना के बाद पुलिस ने लाश को मर्चुरी में रखवा दिया है | जबकि,उनके घर को सील कर दिया गया है | स्वर्गीय मेहता के परिजनों का इंतज़ार किया जा रहा है |

जानकारी के मुताबिक,मंगलवार को माणिक मेहता अपने घर पर सुरक्षित नजर आए थे| जबकि,बुधवार सुबह पड़ोसियों द्वारा उनका शव घर पर संदिग्ध हालत में देखा गया | यह भी बताया जाता है,कि मृतक के घर के खुले दरवाज़े देखकर पड़ोसियों ने उनकी खोज-खबर ली | उनके घर में दाखिल हुए प्रत्यक्षदर्शियों के पैरों तले उस वक्त जमीन खिसक गई जब उन्होंने वाशबेसिन पर माणिक मेहता को मृत अवस्था में देखा | उन्होंने फ़ौरन पुलिस को घटना की जानकारी दी| मौके पर पहुंची पुलिस ने घटना स्थल का जायजा लेने के बाद लाश मर्चुरी के लिए रवाना कर दी|

यह भी बताया जाता है,कि माणिक मेहता की माँ श्यामा मेहता का कुछ माह पूर्व ही निधन हुआ था | वे दिल्ली में निवासरत बताई जाती थी,उधर रायपुर में अब स्वर्गीय मेहता के परिजनों का इंतज़ार किया जा रहा है,ताकि वैधानिक कार्यवाही को अंजाम दिया जा सके| यह भी बताया जाता है,कि दिल्ली में निवासरत माणिक मेहता की बहन को घटना की जानकारी दी गई है,उनके आज देर शाम तक रायपुर पहुंचने के आसार है |जानकारी के मुताबिक,सरोना स्थित इंद्रप्रस्थ कॉलोनी के एक फ्लैट में किचन के वॉश बेसिन में सिर के बल गिरी हुई हालत में उनकी लाश देखी गई। यह भी बताया जाता है,कि पड़ोसियों ने दरवाजा खुला देखा तो आवाज देते हुए अंदर की ओर दाखिल हुए जहां माणिक मेहता मृत हालत में दिखे | उनके कोई रिश्तेदार सामने नहीं आने पर पुलिस ने कानूनी कार्यवाही कर लाश पोस्टमार्टम के लिए रवाना कर दी |

पुलिस के अनुसार, माणिक मेहता (56) पिछले एक साल से इंद्रप्रस्थ कॉलोनी में लखन सिंह के फ्लैट में किराए से रह रहे थे। बताया जाता है,कि माणिक को सोमवार को दोपहर में आखिरी बार कई लोगों ने देखा था। इसके बाद से वे नजर नहीं आए थे। लोगों के मुताबिक,मंगलवार को उनके घर का दरवाजा खुला मिलने पर पड़ोसियों ने अंदर जाकर देखा तो वे मृत पड़े दिखाई दिए थे। हालांकि पुलिस तस्दीक कर रही है,कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस ने माणिक के मोबाइल को जब्त कर लिया है,इसमें कुछ चैट मिली है,जिसकी जांच की जा रही है।

माणिक मेहता अपनी बहन डॉ मिक्की मेहता को इंसाफ दिलाने के लिए लगभग 25 सालों से पुलिस के सिस्टम से लड़ते रहे थे | उन्होंने अपनी बहन की मौत के लिए तत्कालीन डीजी मुकेश गुप्ता को जिम्मेदार ठहराया था। जानकारी के मुताबिक,7 सितंबर 2001 को उनकी बहन डॉ मिक्की मेहता की संदिग्ध मौत की घटना सामने आई थी|

मेहता परिवार ने रायपुर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक 1988 बैच के मुकेश गुप्ता को मौत का जिम्मेदार ठहराया था | पीड़ित परिवार की दलील थी,कि शादी के बाद मुकेश गुप्ता उनकी बेटी डॉ मिक्की मेहता को प्रताड़ित किया करते थे| उनका आरोप था,कि रायपुर के तत्कालीन एसपी मुकेश गुप्ता ने अपने सरकारी आवास में मिक्की मेहता की हत्या कर आत्महत्या करार दिया था| उनके इशारे पर कई दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की गई थी| यह भी बताया गया,कि जिस दौरान डॉ मिक्की मेहता की संदिग्ध हालत में मौत हुई थी,उस दौरान पुलिस ने माणिक मेहता का बयान दर्ज किया था। इसके उपरांत रायपुर के तत्कालीन आईजी और पुलिस महानिदेशक राम निवास ने विभागीय जाँच में मुकेश गुप्ता को दोषी करार दिया था|

हालांकि,ऊंची राजनैतिक पहुंच के चलते इस जाँच रिपोर्ट पर वैधानिक कार्यवाही अधर में लटक गई| इस मामले में मुकेश गुप्ता और माणिक मेहता के बीच खुली कानूनी जंग भी जारी रही | इस बीच वर्ष 2018 में कांग्रेस के सत्ता में आते ही छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ और विवादित आईपीएस मुकेश गुप्ता को ADG पद से निलंबित कर दिया गया था|

यही नहीं,उनकी विशेष (Special DG) रैंक पदोन्नति पर तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने रोक लगा दी थी | इस दौरान डॉ मिक्की मेहता हत्या आत्महत्या मामले की नए सिरे से जाँच भी शुरू की गई थी | इस जाँच में माणिक मेहता ने मुकेश गुप्ता के खिलाफ अपना बयान दर्ज कराया था| डॉ.मिक्की मेहता की मौत की करीब 18 साल बाद दोबारा जांच शुरू की गई थी। रायपुर के सिविल लाइन थाने में इस दौरान करीब आठ घंटे तक पुलिस ने माणिक मेहता का बयान दर्ज किया था।

यह भी बताया जाता है,कि तत्कालीन डीजी गिरधारी नायक ने इस मामले से जुड़ी एक जाँच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को सौंपी थी | लेकिन मुकेश गुप्ता के खिलाफ पुलिसिया कार्यवाही बेअसर साबित हुई| सितंबर 2022 में मुकेश गुप्ता सेवानिवृत्त हो गए थे । हालांकि,इसी वर्ष 2026 के अप्रैल माह में राज्य की बीजेपी ने मुकेश गुप्ता की ना केवल पदोन्नति पर मुहर लगाई बल्कि उनके खिलाफ दर्ज कई गंभीर आरोपों से जुड़ी शिकायतों को भी दरकिनार कर दिया था| फ़िलहाल,अपनी बहन को इंसाफ दिलाने में जुटे माणिक मेहता “काल के गाल” में समा गए है| देखना गौरतलब होगा,कि पीड़ित परिवार की इंसाफ की गुहार अब सिर्फ “आस” बन कर रह जाएगी या फिर राज्य की बीजेपी सरकार में “दागियों” को संरक्षण का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा|
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