
रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित भारतमाला मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पहली बड़ी गिरफ्तारी करते हुए अभनपुर के कारोबारी जयप्रकाश गांधी को हिरासत में लिया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें रिमांड पर भेज दिया। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई के बाद घोटाले से जुड़े अन्य लोगों पर भी जांच एजेंसियों का शिकंजा कस सकता है।ईडी ने इससे पहले 27 अप्रैल को जयप्रकाश गांधी के आवास और कारोबारी प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान एजेंसी को कई अहम दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डेटा और अन्य साक्ष्य मिले थे। इन्हीं तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी की गई है।

जांच में सामने आया है कि रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान 500 करोड़ रुपये से अधिक के मुआवजे में अनियमितताएं की गईं। आरोप है कि कृषि भूमि को रिकॉर्ड में गैर-कृषि भूमि दर्शाकर मुआवजे की राशि कई गुना बढ़ा दी गई। इसके अलावा एक ही जमीन को कई हिस्सों में बांटकर अलग-अलग नामों से अधिक मुआवजा लेने का खेल भी किया गया।ईडी की जांच में राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों, भूमि कारोबारियों और बिचौलियों की कथित भूमिका भी सामने आई है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों के बीच मिलीभगत कर किस तरह करोड़ों रुपये का फर्जी मुआवजा हासिल किया गया।

इस मामले में मुख्य आरोपी माने जा रहे हरमीत सिंह खनूजा समेत चार लोगों के खिलाफ पहले ही परिवाद दायर किया जा चुका है। जयप्रकाश गांधी की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार पूछताछ में कई नए नाम और अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं।ईडी की यह कार्रवाई भारतमाला मुआवजा घोटाले की जांच में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियों तथा बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।




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