महिला मोर्चा की कमान ”पुरुष” के कंधों पर ! नाम सुनकर लोग बोले-ये कौन सा नया फार्मूला है बीजेपी का ? फैसले पर सोशल मीडिया में मजेदार रिएक्शन- हाय मैं शर्म से हुई लाल !

रायपुर/दिल्ली : महिला मोर्चा में ‘भैया जी’ की एंट्री से छत्तीसगढ़ में खलबली मची हुई है,लोग इस नएफार्मूले को लेकर माथापच्ची कर रहे है |हाय रे सियासत ! महिला मोर्चा के प्रभारी बने सुभाष तिवारी को लेकर सोशल मीडिया पर कही मंथन तो कही,हंसी फ़ुहार की लहर दिखाई दे रही है | दरअसल,रायपुर नगर निगम के पूर्व पार्षद और बीजेपी नेता सुभाष तिवारी इन दिनों ख़ूब सुर्खियां बटोर रहे है|

बताते है,कि ”नेता जी” ने पुरुषों के बजाए महिला मंडल की ओर रुख़ कर लिया है| उनकी “प्रतिभा” को ध्यान में रखते हुए सुभाष तिवारी को बीजेपी महिला मोर्चा प्रभारी की कमान सौंपी गई है| किसी पुरुष को महिला मोर्चा का प्रभारी  बनाए जाने से आम लोग जहाँ हैरत में है,वही राजनैतिक गलियारों में ”नेता जी” की“प्रतिभा” के साथ-साथ योग्यता और अहर्ता की खूब चर्चाएं हो रही है| जबकि,महिला मोर्चा में ‘भैया जी’ की एंट्री से खलबली मची हुई है, कुछ महिला कार्यकर्ता जहाँ पुरुषों को मौका देने से,शर्म से लाल हो रही है,वे इसे खुद के लिए प्राकृतिक अवसर के खोने का मामला मान कर चल रही है,तो सोशल मीडिया में भी अब ‘नेता जी” ट्रोल होने लगे है | तस्दीक की जाती है,कि काफी विचार-विमर्श के बाद पार्टी ने सुभाष तिवारी को महिला मोर्चा का प्रभारी नियुक्त किया है |

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उधर,रायपुर में बीजेपी कार्यसमिति की बैठक में शामिल कई पुरुष और महिला नेता सुभाष तिवारी को मिली बड़ी जिम्मेदारी से गदगद नजर आए | उनकी माने तो,जिम्मेदारी के मामले में पुरुष-महिला का कोई भेदभाव नहीं बरतना ही,सच्चे अर्थों में पार्टी के भीतरी लोकतंत्र की पहचान है ? हालांकि,कई महिला नेता हैरानी जताते हुए,बोली -प्रभारी जी तो पुरुष निकले| उधर,सुभाष तिवारी को जैसे ही महिला मोर्चा की जिम्मेदारी मिली,वैसे ही सोशल मीडिया में नेता जी को बधाइयों के साथ-साथ ”ट्रोलिंग” का तोहफा भी मिलना शुरू हो गया,जो मौजूदा दौर में भी जारी बताया जाता है| इस नियुक्ति पर सोशल मीडिया में हैरानी जताने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है |

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दावा यह भी किया जाता है,कि पार्टी में दायित्वों के निर्वहन की अनूठी परंपरा है,जो कार्य सौंपा जाता है,कार्यकर्ता उसे निष्ठा पूर्वक सहज स्वीकार करता है| जानकार तस्दीक करते है,कि दायित्वों के निर्वहन के दौरान कार्यकर्ता का मेडिकल रिपोर्ट समेत स्वास्थ्य का आकलन करने के उपरांत ही बतौर “प्रभारी” सूचीबद्ध  किया जाता है |इस दृष्टि से ”नेता जी”का नाम उपयुक्त प्रभारी के रूप में घोषित किया गया है| 

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रायपुर में बीजेपी की कार्यकारिणी की बैठक सम्पन्न तो हो गई,लेकिन इस नए मुद्दे को अपने पीछे ”अनुत्तरित” छोड़ गई है| इस नियुक्ति के युक्ति-युक्ति संगत कारणों को जानने-बुझने के लिए सत्ताधारी दल से लेकर विपक्ष के कई नेता माथापच्ची के दौर से गुजर रहे है | उधर,मुद्दे की तलाश में जुटी  कांग्रेस ने बीजेपी के इस फॉर्मूले पर एतराज जताया है| उसने सुभाष तिवारी के प्रति सहानभूति जताते हुए कहा,कि बीजेपी और आरएसएस पर महिला विरोधी मानसिकता का आरोप वह पहले भी लगा चुकी है | उसने कहा कि बीजेपी मंचों और विज्ञापनों में महिला सशक्तिकरण और महिलाओं को नेतृत्व देने की बात करती है, लेकिन संगठनात्मक नियुक्तियों में उसका अलग चरित्र सामने आया है.बीजेपी में मोर्चा, प्रकोष्ठ और विभागों के प्रभारियों की नियुक्ति की गई है, जिसमें महिला मोर्चा की जिम्मेदारी एक पुरुष को दे दी गई है. क्या बीजेपी में महिला नेतृत्व की कमी है या फिर पार्टी महिलाओं को नेतृत्व देना ही नहीं चाहती |कांग्रेस ने यह सवाल भी पूछा है ?

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कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा,कि हाल ही में सरकार ने महिला जनप्रतिनिधियों-महापौर,पार्षद, पंच और सरपंच-के कामकाज में उनके पतियों के हस्तक्षेप को लेकर नियमों में बदलाव किया है. ऐसे में महिला मोर्चा का प्रभारी पुरुष को बनाया जाना बीजेपी के कथित दोहरे चरित्र को दर्शाता है।

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 जानकारी के मुताबिक, बीजेपी ने हाल ही में प्रदेश के 7 मोर्चों के प्रभारियों की सूची जारी की है,इस सूची में महिला मोर्चा के प्रभारी के तौर पर सुभाष तिवारी का नाम सामने आने के बाद सियासत तेज हो गई है. कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि महिलाओं को प्राथमिकता देने और महिला सशक्तिकरण की बात करने वाली बीजेपी को क्या प्रभारी बनाने के लिए एक भी काबिल महिला नहीं मिली ? अब लोगों की निगाहे वरिष्ठ नेता सुभाष तिवारी के अगले कदम पर टिकी हुई है | उनसे लोगों की उत्सुकता इस तथ्य को जानने में ज़्यादा नजर आ रही है,कि वे आखिर किस ”एंगल” से प्रभारी पद के लिए उपयुक्त माने जा रहे है ? 

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