
रायपुर : छत्तीसगढ़ में किसानों को ‘‘हल्दी बीज” सप्लाई के नाम पर नकली माल (गोबर निर्मित पीला रंग की चाइनीस डंडी) खपा कर 25 करोड़ का चूना लगाए जाने का मामला,दस्तावेजी प्रमाणों के साथ जगज़ाहिर हुआ है| इस मामले में राज्य के हॉर्टिकल्चर विभाग और उसके डायरेक्टर का नाम सामने आया है| केंद्र और राज्य सरकार के अंश से किसानों को मुहैया कराए जाने वाली 40 फीसदी सब्सिडी के साथ-साथ अधिकारियों ने सप्लायर को हाथो-हाथो 10 करोड़ का भुगतान भी कर दिया| यह भी तस्दीक की जा रही है,कि महाघोटाले की रक़म को रातों-रातों सप्लायर के एक क़रीबी बिल्डर के हवाले भी कर दिया गया|

जानकारी के मुताबिक,शासन-प्रशासन के नियमों को धत्ता बताते हुए,हॉर्टिकल्चर विभाग के “चलनशील”अधिकारियों ने प्रदेशभर ने हल्दी सप्लाई का एक तफरा ( SINGLE ) ठेका ”मातृ भूमि बहुउद्देशीय सहकारी समिति मर्यादित” बीरगांव रायपुर को सौंपा था| सूत्रों द्वारा बताया जाता है,कि नक़ली हल्दी की सप्लाई के लिए ”डायरेक्टर हॉर्टिकल्चर” के निर्देश पर फ़र्जी दस्तावेज़ तैयार किए गए थे,इसके तहत चुनिंदा अधिकारियों ने “रोमा” क़िस्म (VAIRITY) की हल्दी की सप्लाई के लिए आपूर्तिकर्ता समिति से सांठ-गांठ कर ग़ैर पंजीकृत,अमानक ( NON CERTIFIED ) हल्दी बीज़ किसानों के हवाले कर दिया |

यह भी बताया जाता है,कि “आधार बीज” ( FOUNDATION SEEDS ) का दस्तावेजों में ना तो हवाला दिया गया और ना ही संलग्न दस्तावेजों में हल्दी बीज सप्लाई के लिए नियत प्रमाणीकरण अभिलेखों को दर्शाया गया|सूत्र यह भी तस्दीक करते है,कि आपूर्ति किए गए नक़ली माल का ना तो कोई वैधानिक रजिस्ट्रेशन है और ना ही टेंडर-निविदा की शर्तों के तहत किसानों को हल्दी बीज मुहैया कराए गए है|

यह भी बताया जाता है,कि किसानों को चूना लगाने के लिए तैयार किए गए फॉर्मूले में आपूर्तिकर्ता संस्था के पास ना तो,बीजों को तैयार करने की कोई विधिवत व्यवस्था है और ना ही ऐसे बीजों के प्रमाणीकरण को लेकर कोई वैधानिक लाइसेंस और अन्य आधारभूत दस्तावेज और अनुभव | सूत्र यह भी तस्दीक करते है,कि लगभग सालभर पहले कागजों में अस्तित्व में आई ”मातृ भूमि बहुउद्देशीय सहकारी समिति मर्यादित” संस्था का संचालन मूलरूप से ”डायरेक्टर हॉर्टिकल्चर” के करीबी नाते-रिश्तेदारों के द्वारा किया जा रहा है| जबकि,इस संस्था में शामिल सदस्य सिर्फ औपचारिकता निभा रहे है |
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जानकारी के मुताबिक,आपूर्तिकर्ता संस्था ने वर्ष 2025 के कालातीत (Timeless ) हल्दी बीजों की आपूर्ति वर्ष 2026 में कर राज्य सरकार को करोड़ों का चूना लगा दिया है| यह भी बताया जाता है,कि “रोमा” क़िस्म (VAIRITY) आपूर्ति के लिए “फ़र्जी लॉट नंबर” का इस्तेमाल किया गया| हल्दी मसाला अंकुरण बीज का नियमों के तहत 9 माह की अवधि उपयोग-योग्य बताई जाती है | लेकिन,”हॉर्टिकल्चर विभाग” ने एक्सपाइरी डेट गुज़र जाने के लगभग साल भर बाद हल्दी बीज की प्रदेश भर में आपूर्ति कर किसानों को मुश्किल में डाल दिया है | प्रदेश के आधा दर्जन से ज़्यादा जिलों के किसान यह भी तस्दीक कर रहे है,कि ना तो उन्हें,हल्दी बीज मुहैया कराया गया और ना ही इस योजना का कोई लाभ मिला,बावज़ूद इसके उनका नाम लाभार्थियों की सूची में डाल दिया गया |

सूत्रों के मुताबिक,जगदलपुर, कोंडागांव,धमतरी,राजनंदगांव,दुर्ग,बिलासपुर,अंबिकापुर,बलरामपुर,जशपुर,महासमुंद जिलों में सबसे ज्यादा फ़र्जीवाड़ा सामने आया है|इन जिलों में असिस्टेंट और डिप्टी डायरेक्टर हॉर्टिकल्चर (ADH-DDH ) स्तर के अधिकारियों ने एक ही संस्था से फर्जी बिल लेकर बग़ैर परीक्षण भुगतान सुनिश्चित करने में देरी नहीं की|जानकारी के मुताबिक,संस्था द्वारा सर्टिफाइड सीड नहीं दिए जाने के बावज़ूद इन अफसरों ने अपनी ज़िम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया |शिकायतकर्ता किसानों के मुताबिक,आपूर्तिकर्ता समिति का रजिस्ट्रेशन (साथी पोर्टल) में भी उपलब्ध नहीं है| जबकि,यह रजिस्ट्रेशन बीज प्रमाणीकरण सुनिश्चित करता है|किसानों का आरोप है,कि सुनियोजित तौर पर फ़र्जी दस्तावेज़ तैयार कर संस्था ने “वर्क ऑर्डर” हासिल किया था|

न्यूज़ टुडे छत्तीसगढ़ को प्राप्त शिकायत के मुताबिक,ग़ैर पंजीकृत और अमानक हल्दी बीज मुहैया कराए जाने को लेकर अब किसान हाथ मल रहे है,उनके बीज़ अंकुरण के पूर्व ही कचरे में तब्दील बताए जाते है| नकली हल्दी बीज की आपूर्ति से जूझ रहे प्रदेशभर के किसान इस खेल में शामिल सरकारी अधिकारियों और सप्लायर के ख़िलाफ़ फ़ौरी कार्यवाही की मांग कर रहे है| उन्होंने,मुख्यमंत्री को भेजी गई,शिकायत में उन दस्तावेजों को भी संलग्न किया है,जिसमें डायरेक्टर हॉर्टिकल्चर की कार्यप्रणाली पर सवालियां निशान लगाया गया है| इस शिकायत में यह भी साफ़ किया गया है,कि हॉर्टिकल्चर विभाग के अधिकारियों के अलावा समिति ने किसानों को हल्दी बीज प्रदान करने के बजाए ”चूना” लगा दिया है |

शिकायत में बताया गया है,कि अमानक हल्दी बीज की सप्लाई कर मोटा मुनाफ़ा कमाने के खेल में एक फिर किसान बुरी तरह से छले गए है| इधर,न्यूज़ टुडे छत्तीसगढ़ ने मामले की तह तक जाने के लिए ”डायरेक्टर हॉर्टिकल्चर” और आपूर्तिकर्ता समिति ”मातृ भूमि बहुउद्देशीय सहकारी समिति मर्यादित” संस्था के पदाधिकारियों से संपर्क किया,लेकिन कोई प्रतिउत्तर नहीं मिल पाया| प्रशानिक और राजनैतिक गलियारों में चर्चा यह भी है,कि आपूर्तिकर्ता समिति घोटालों के लिए सिर्फ कागजों में संचालित हो रही है| फ़िलहाल,छत्तीसगढ़ में अब “हल्दी” पर घमासान के आसार ज़ाहिर किए जा रहे है,पीड़ित किसान CM से एक्शन की मांग कर रहे है|
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