रायपुर : छत्तीसगढ़ में इस दीपावली सरकारी तिजोरी का दीवाला निकालने की तिकड़में जोरों पर है,इसके लिए करीब 2 हज़ार करोड़ के डामर घोटाले को अंजाम देने की कार्य योजना को ''अमली-जामा" पहनाने की तैयारी शुरू होते ही मामले का खुलासा हो गया है | अब मामले की जाँच के लिए PWD मंत्री अरुण साव के रुख का इंतज़ार किया जा रहा है, इस मुद्दे पर समाचार लिखे जाने तक मंत्री महोदय की चुप्पी भी हैरान करने वाली बताई जाती है| भले ही प्रदेश की आम जनता को त्यौहारी सीजन में बेहतर सड़के और आवागमन के साधन मुहैया नहीं हो पाए,लेकिन इस दिवाली PWD विभाग के कई अफसरों,कर्ता-धर्ताओं के ठिकानों में ''छप्पर फाड़'' कमाई के योग बनने लगे है |
प्रदेश में डामर घोटाला कोई नई बात नहीं है,कई प्रभावशील ठेकेदार और अफसर सांठ-गाँठ कर अपने फायदे के लिए साल दर साल कभी बाज़ार भाव का हवाला देकर तो,कभी आपूर्ति में संकट बता कर इसकी कीमते बढ़ा ही देते है | इस बार भी प्रदेश में PWD विभाग ने वही घिसे-पीटे फॉर्मूले को आजमाते हुए ''सरकारी तिजोरी" पर हाथ साफ़ करने की पूरी तैयारी कर ली है | लेकिन,इस बार प्रदेश में डामर घोटाले की नींव रखते ही,बवाल खड़ा हो गया है | विभागीय स्तर से लेकर मैदानी इलाकों तक ठेकेदारों और PWD विभाग के अधिकारियों के खिलाफ लोगों का गुस्सा उबलने लगा है |
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दरअसल,''डामर'' का ''कृत्रिम संकट'' पैदा कर कई विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों ने निर्माण कार्यों को ठप्प करने की रणनीति के तहत अपनी कार्यशैली का परिचय देना शुरू कर दिया है | छत्तीसगढ़ में एक बार फिर खाड़ी देशों में युद्ध के हालात का कारण बताते हुए,बिटुमिन अर्थात ''डामर" की कीमते बढ़ाने को लेकर कवायतें शुरू कर दी गई है | बताते है,कि मुठ्ठी भर बड़े ठेकेदारों ने PWD विभाग के ENC समेत कई प्रभावशील अधिकारियों से सांठ-गांठ कर प्रदेश भर की निर्माणाधीन सड़कों और अन्य निर्माण परियोजनाओं में अचानक ब्रेक लगाने की साजिश को अंजाम दिया है | इसके तहत विभागीय मंत्री को भी साधने की कोशिशे जोरों पर बताई जाती है |
हालाँकि,डिप्टी सीएम और विभागीय मंत्री अरुण साव ने डामर की कीमते बढ़ाने के फैसले पर अभी अपनी मुहर नहीं लगाई है | इससे पहले की सरकारी तिजोरी पर चूना लगाने की कवायतें अपना रंग दिखाती,उससे पूर्व ही मामले का खुलासा हो जाने से महकमे में हलचल तेज़ हो गई है | इस कड़ी में PWD विभाग के एक ENC और उनके ठेकेदार पुत्र का नाम सुर्ख़ियों में बताया जा रहा है | एक जानकारी के मुताबिक,दावा किया जा रहा है,कि सरकारी निर्माण एजेंसियों के भीतर लाभार्थी "ठेकेदारों और अफसरों" का गिरोह बन जाने से लगभग 13 हज़ार करोड़ के निर्माण कार्यों पर ''कृत्रिम ब्रेक'' लगा दिया गया है,मंशा सरकारी तिजोरी पर "करोड़ों का चूना" लगाए जाने से जुड़ी बताई जाती है |
यह भी बताया जाता है,कि प्रदेश में राजधानी रायपुर से लेकर सुदूर आदिवासी अंचलों तक कुछ खास बड़े ठेकेदारों का ही''सिक्का'' चल रहा है | इस समूह के घटिया और गुणवत्ताविहीन निर्माण कार्यों पर ज़ोर देने के चलते,प्रदेश भर की सड़कों का बुरा हाल है,इस मानसूनी मौसम में तो,बारिश की पहली मार से ही कई इलाकों की सड़के बह गई,उनमे बड़े-बड़े गढ्ढों बन गए,नतीजतन ऐसे इलाकों में आवाजाही मुसीबत का सबब बन गई है |
