"हम दो हमारे दो" ''भू-PAY" दंपति का DNA टेस्ट ? रंग लाई शिकायत-

छत्तीसगढ़ के शादीशुदा पूर्व मुख्यमंत्री ''भू-PAY" ने भी सत्ता में काबिज रहने के लिए क्या ''डबल इंजन" का इस्तेमाल किया था ? ये सवाल अब रहस्यों तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि इस तथ्य का भी खुलासा होगा,कि पूर्व मुख्यमंत्री की तत्कालीन उपसचिव सौम्या चौरसिया की गोद में खेल रहे बच्चे आखिर किसके है ? उन बच्चों को किस महिला ने जन्म दिया था ? इस महिला का आखिर सौम्या चौरसिया के साथ क्या रिश्ता था? यही नहीं,पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल वल्द स्वर्गीय नंदलाल बघेल निवासी पाटन के अलावा सौम्या चौरसिया के पति का DNA टेस्ट कराए जाने की राह तय हो गई है |

DNA टेस्ट की रिपोर्ट सामने आने के बाद इस रहस्य पर भी पर्दा उठ जाएगा,कि आखिर उन दो बच्चों के नैसर्गिक (जेनेटिक) माता-पिता कौन है ? एक शिकायत में दावा किया गया है,कि पूर्व मुख्यमंत्री की तत्कालीन उपसचिव सौम्या चौरसिया ना तो,गर्भवती हुई और ना ही इस संबंध में उनकी कोई पुरानी सरकारी-गैर सरकारी मेडिकल हिस्ट्री है,बावजूद इसके तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल की सेवा में तैनात रहते-रहते एक खास दिवस कार्यालयीन समय पर सौम्या की गोदी में दो जुड़वाँ बच्चे एकाएक समा गए | दावा यह भी किया गया है,कि सौम्या के पति का भी इन दोनों जुड़वा बच्चों से दूर-दूर तक का कोई नाता नहीं है,बावजूद इसके सौम्या की "गोद भराई" का मामला गंभीर जाँच के दायरे में है ? इस शिकायत में पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के भी DNA टेस्ट कराए जाने की मांग की गई है ? चूँकि,तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल के सरकारी आवास पर ही,दो जुड़वाँ बच्चों के जन्म की ''नींव" रखी गई थी | इसलिए इन बच्चों के नैसर्गिक (जेनेटिक) माता-पिता की शिनाख्ती के लिए ''बघेल का भी DNA'' टेस्ट कराए जाने की गुहार लगाई गई है |

बताते है,कि पूर्व मुख़्यमंत्री इतने हुनरबाज़ है,कि 9 माह तक गर्भ धारण कराए बगैर ही जरूरतमंदों की सुनी गोद चंद मिनटों में भर देते है | पीड़ित परिवार की शिकायत है,कि कांग्रेस कार्यकाल में सत्ता के नशे में मदहोश पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी उपसचिव के साथ क्या-क्या गुल नहीं खिलाएं ? इसकी लंबी फेहरिस्त है, भू-PAY संग सौम्या के रिश्ते कितने करीबी ? भाई-बहन या चाचा-भतीजी ? सिर्फ सरकारी सेवक या तत्कालीन मुख्यमंत्री आवास की पटरानी ?पूर्व मुख्यमंत्री बघेल द्वारा सौम्या के साथ निभाए गए,रिश्तों का खुलासा अभी तक नहीं किया गया है,ऐसे में गुत्थी उलझी हुई है,कि सौम्या की गोद में उछल-कूद रहे बच्चे आसमान से आ टपके या फिर मेडिकल साइंस का कोई कमाल है ?

एक जानकारी के मुताबिक, सौम्या- भू-PAY के आंगन में नज़र आ रहे, दो जुड़वाँ बच्चों (1 नग लड़का और 1 नग लड़की) के मालिकाना हक़ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है | पीड़ित शख्स ने इन बच्चों पर दावा पेश करते हुए,खुद के साथ-साथ सौम्या उसके पति और भूपेश बघेल का DNA टेस्ट कराए जाने की मांग की है,ताकि इन बच्चों को उनके नैसर्गिक (जेनेटिक) माता-पिता को सौंपा जा सके | शिकायत में यह भी कहा गया है,कि जब तक डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती,तब तक पीड़ित बच्चों को सरकारी अस्पताल या किसी सामाजिक संस्थान के सुपुर्द किया जाए |

यह शिकायत अब रंग दिखा रही है,खबरे आ रही है,कि टेस्ट-टूयूब बेबी प्रोसेस और सरोगेसी की वैधानिक प्रक्रिया को अपनाए बगैर आखिर किसके बच्चों को तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल ने अपने कब्जे में ले लिया था ? आज के बच्चे कल के नागरिक है,ऐसे में इन बच्चों की नागरिकता सुनिश्चित करने से पूर्व उनके नैसर्गिक माता-पिता के नाम का खुलासा नहीं होने से पूर्व मुख्यमंत्री बघेल की अपने आवास और कार्यालय में पदस्थ महिला कर्मियों के प्रति निष्ठा सवालों के घेरे में है ?फ़िलहाल पूर्व मुख्यमंत्री के डीएनए टेस्ट के बाद ही साफ़ हो पाएगा,कि जुड़वाँ बच्चों का वैधानिक हकदार कौन ?

''भू -PAY'' गिरोह में डेपुटेशन पर शामिल हुए आईपीएस "शेख़ चिल्ली" -

छत्तीसगढ़ में 2005 बैच के आईपीएस ''शेख़ चिल्ली'' ''स्टडी लीव" पर ''भू -PAY'' गिरोह में अपना भाग्य आज़मा रहे है | पुलिस मुख्यालय के कागज़ी घोड़ों में इस आईपीएस की लंबी छुट्टी ''स्टडी लीव" पर दर्ज़ है | लेकिन,चर्चा आम है,कि ''शेख़ चिल्ली'' साहब खासतौर पर ''भू -PAY'' और उनकी तत्कालीन उपसचिव सौम्या चौरसिया की विशेष ख़िदमत में तैनात कर दिए गए है | IPS शेख़ चिल्ली के बारे में बताया जाता है,कि पढाई-लिखाई की छुट्टी तो सिर्फ़ बहानेबाज़ी और खानापूर्ति में बीत रही है,असल में तो, ''भू-PAY'' को 2028 में पुनः मुख्यमंत्री बनाए जाने का बीड़ा स्वयं''शेख़ चिल्ली'' साहब ने उठा लिया है |

कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में जीत दिलाने और रणनीति के तहत ''भू-PAY'' को पुनः मुख्यमंत्री बनाने का दारो-मदार ''शेख़ चिल्ली'' के कन्धों पर टिका बताया जाता है | यह भी बताते है,कि चालाक ''शेख़ चिल्ली'' ने पढ़ाई-लिखाई और थीसिस स्टेटमेंट (Thesis Statement) का ठेका ''थर्ड पार्टी'' को सौंप दिया है,जबकि वो खुद डेपुटेशन पर बघेल गिरोह की तिमारदारी में जुटे बताए जाते है| चर्चा है,कि पुलिस मुख्यालय ने बग़ैर सुसंगत और ठोस तथ्यों के "शेख़ चिल्ली" को ''स्टडी लीव" के नाम पर उपकृत तो कर दिया,लेकिन शेख चिल्ली की हरकते अब बीजेपी सरकार के सुशासन पर सवालियां निशान खड़े कर रही है | बताते है,कि ''शेख़ चिल्ली'' आपराधिक जगत के धुरंधर कारोबारी की सीढियाँ धड़ा-धड़ चढ़ रहे है,उनकी दिलचस्पी पढाई-लिखाई से ज़्यादा "सट्टा'' और ''फिरौती'' जैसे अवैध कारोबार के संचालन पर बताई जाती है |

शोएब ढेबर को जमानत का लाभ दिलाने का मामला हो या फिर सौम्या और ''भू-PAY'' के अदालती प्रकरण,पुलिस की कार्यवाही को कमजोर करने की कवायतें हो या फिर अदालत में आधे-अधूरे दस्तावेजों को प्रस्तुत कर आरोपियों को ज़मानत का लाभ दिलाने की रणनीति तैयार करना हो ? बघेल गिरोह के लिए ''शेख़ चिल्ली" की सेवाएं सुर्ख़ियों में है | इस गिरोह के सरगना ''भू-PAY'' ने एलान कर दिया है,कि यदि 2028 में कांग्रेस सत्ता में आई तो, शेख चिल्ली को अपना ब्रांड एम्बेसडर घोषित कर पुलिस मुख्यालय की बागडोर उसके हाथों में सौंप दी जाएगी ?

लॉरेंस बिश्नोई गिरोह की ''फ्रेंचाइजी'' ? कमाई जोरों पर,यू-टर्न लाभार्थी शोएब ढेबर पुलिस को ढूंढे नहीं मिल रहे,आईपीएस "शेख़ चिल्ली" के सपोर्ट से रायपुर कमिश्नरेट पुलिस की बढ़ी मुसीबत-

छत्तीसगढ़ में सट्टा खिलाने और फिरौती मांगने के काम ने जोर पकड़ लिया है|अनुचित लाभ के इस धंधे में ऐसे पुलिस अफसर (आईपीएस) भी शामिल बताए जाते है,जिनकी पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तूती बोलती थी | बीजेपी के सत्ता में आने के बाद इस अवैध कारोबार पर लगाम लगाने की कोशिशे जोरों पर जारी है,बावजूद इसके रायपुर कमिश्नरेट को ''आशातीत'' कामयाबी नहीं मिल पाई है | आए दिन करोड़ो की रकम इधर से उधर करने वाले अफसर इन दिनों पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गए है | उनके संरक्षण में आपराधिक तत्वो की बाढ़ आई हुई है,पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली से वाकिफ़ ऐसे आईपीएस अधिकारी "तू डाल-डाल,तो मैं पात-पात" लोकोक्ति की तर्ज़ पर रायपुर कमिश्नरेट पुलिस की ''गले की फांस'' बन गए है |


ये और बात है,कि पुलिस भी संदेहियों की करतूतों पर अपनी नज़रे गढ़ाए हुए है | लेकिन,अवैध कमाई का स्वाद चख चुके,कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के पुलिस की वर्दी में ही नए गोरखधंधों को अपनाने से जहाँ अवैध वसूली का सेंसेक्स सातवें आसमान पर है,वही जनता का हाल-बेहाल बताया जाता है | लॉरेंस विश्नोई गिरोह के नाम पर रायपुर के पूर्व मेयर एज़ाज़ ढेबर से 50 करोड़ की फिरौती मांगने के मामले में सुर्ख़ियों में आए उनके सगे भतीजे शोएब ढेबर की एक बार फिर रायपुर कमिश्नरेट पुलिस को तलाश है | कभी लॉरेंस बिश्नोई तो,कभी अन्य कुख़्यात गिरोह के नाम पर,अवैध रूप से ''फ्रेंचाइजी'' के संचालन को लेकर हत्थे चढ़े शोएब ढेबर इन दिनों कमिश्नरेट पुलिस को ढूंढे नहीं मिल रहा है?उसकी गिरफ़्तारी के लिए रुपए 5 हज़ार का ईनाम रखा गया है,पखवाड़े भर से ज़्यादा का वक्त बीत चुका है,लेकिन पुलिस के हाथ उसके गिरेबान तक नहीं पहुंच पाए है ?

बताते है,कि फिरौती मांगे जाने के मामले में स्थानीय पुलिस कर्मियों की लापरवाही से शोएब ढेबर की ज़मानत पूर्व सुनिश्चित हो गई थी | यह भी बताया जाता है,कि जमानत का लाभ प्राप्त कर,निचली अदालत से शोएब ढेबर ऐसे "नौ दो ग्यारह" हुआ,कि पखवाड़े भर से ज्यादा का समय बीत चुका है,फिर भी पुलिस के हाथ खाली है हालांकि,राहत भरी बात यह है,कि महादेव एप्प सट्टा संचालन से जुड़े नितिन मोटवानी उर्फ़ चीकू को पुलिस ने ख़ोज निकाला है,आरोपी नितिन मोटवानी के तार सीधे तौर पर एप्प के प्रमोटर पूर्व मुख्यमंत्री "भू-PAY" बघेल,IPS आनंद छाबड़ा (2001 बैच),शेख़ आरिफ (2005 बैच ),प्रशांत अग्रवाल (2007 बैच),दुबई निवासी रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर से जुड़े बताए जाते है |


नितिन मोटवानी कमिश्नरेट पुलिस की पूछताछ जारी है,इस बीच महकमे में चर्चा उन आईपीएस अफसरों की हो रही है,जो कि पर्दे के पीछे से "कदम से कदम" मिलाकर ''ढेबर एंड सन्स''और महादेव एप्प सट्टा संचालकों के साथ पूरी बेफिक्री से गोरखधंधे का आज भी संचालन कर रहे है | "भू-PAY" कार्यकाल की तर्ज़ पर उनकी कवायतें कमिश्नरेट पुलिस के अरमानों पर पानी फेर रही है, चुनिंदा दागी आईपीएस अधिकारियों के रुख से प्रदेश में अपराधों का सिलसिला यथावत जारी बताया जाता है |


सूत्र तस्दीक करते है,कि कैश कमाई वाले दर्जनों कारोबार में ऐसे आईपीएस अधिकारियों का सिक्का आज भी चल रहा है | इसी कड़ी में विवेचना में जुटे पुलिस कर्मियों ने तस्तरी में परोस कर शोएब ढेबर को निचली अदालत से जमानत प्रदान करवाने की साज़िश रची थी | तस्दीक यह भी की जाती है,कि घटनाक्रम सामने आने के बाद जिन दो पुलिस कर्मियों को लाइन अटैच किया गया है,वे रायपुर के पूर्व एसएसपी और आईजी के "पंटर" है | इन आईपीएस महोदय के बेनामी कारोबार पर कोई आंच ना आए,इसके लिए जोड़-तोड़ के समीकरणों को अंजाम देने के लिए इन दोनों ही पुलिस कर्मियों की तैनाती कमिश्नरेट के कुछ ख़ास थानों में की गई थी |

बताया तो यह भी जा रहा है,कि कई वर्दीधारी अफसर,अवैध कारोबार में मोटा निवेश कर रहे है,आपराधिक जगत में एकाधिकार को लेकर उनकी भूमिका काफी महत्त्वपूर्ण बताई जाती है | रायपुर के VIP रोड,नई पुरानी विधानसभा,मंदिर हसौद,तेलीबांधा समेत कई इलाकों में ऐसे आईपीएस अफसरों के निवेश वाले ठिकाने कमिश्नरेट पुलिस के लिए सिर दर्द बन गए है,इन ठिकानों में रातभर हुक़्क़ा बार से लेकर पीने-पिलाने का चलन आम है | यही नहीं,महादेव एप्प ऑनलाइन सट्टा हो या फिर फिरौती मांगने का कारोबार या फिर आरोपियों को जमानत का लाभ दिलाने की कवायतें ? इन ठिकानों में उसकी आधारशीला रखी जाती है | कारोबार के नाम पर अपराधों के ये सेंटर प्रदेश को नई फ़िज़ा की ओर धकेल रहे है |

पुलिस की वर्दी में बेरोक-टोक जारी इस कारोबार से अपराधों का सिलसिला उछाल मार रहा है | कांग्रेसी नेता आनंद कुकरेजा से 25 करोड़ की फिरौती मांगे जाने के मामले में शोएब ढेबर की तलाश के बजाए,आईपीएस ''शेख चिल्ली" पर शिकंजा कसा जाए तो,प्रदेश में ''संगठित अपराधो'' पर काफी हद तक रोक लग सकेगी ? आपराधिक मामलों के जानकार देश-प्रदेश के गृह मंत्रालय से अब यही गुहार लगा रहे है |

चर्चा आम है,कि वर्दी में रोजाना करोड़ों रुपए कमाने वाले उक्त तीनों आईपीएस अधिकारियों को भी जब तक जेल में नहीं ठूंसा जाता है,तब तक ना तो,पुलिस के हाथ कई अपराधों में लिप्त पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के गिरेबान तक पहुंच पाएंगे और ना ही,रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर तक | महादेव एप्प ऑनलाइन सट्टा कारोबार और लॉरेंस विश्नोई गिरोह के कथित कारोबार की कड़ियां इन आईपीएस अफसरों के ठिकानों तक जुड़ी बताई जाती है |

 चंदा मामा रामगोपाल ने उगले कई राज ! कांग्रेस अलाकमान तक पहुंचे 52 करोड़ ? चार्जशीट में शामिल गुनाह से क्या बढ़ेगा जाँच का दायरा? सुर्ख़ियों में ED- 

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के ''चंदा मामा'' ने पार्टी आलाकमान समेत कई नेताओं की नींद उड़ा दी है,रायपुर से लेकर दिल्ली तक उन नेताओं की बेचैनी बढ़ी हुई है,जिन्होंने इस गरीब राज्य को अपना ''ATM'' बना लिया था | ''भू-PAY'' सरकार के पूरे 5 बरस अवैध उगाही और घोटालों को अंजाम देते-देते बीत गए,लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री ने प्रदेश और जनता के विकास के बजाए,अपने गिरोह को विकसित करने में पूरी ताकत झोंक दी थी |

नतीजा सामने है,कई आईएएस और आईपीएस घोटालों की फेहरिस्त को लेकर कभी अदालत,तो कभी CBI और IT-ED के दफ्तर में अपनी नाक रगड़ रहे है,कई जेल की यात्रा करने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री को ''कोसने'' में अपना वक्त गुजार रहे है | जेल जाने के डर और जाँच एजेंसियों के हत्थे ना चढ़ने को लेकर कई अफसरों ने पूजा-पाठ, यज्ञ-हवन का भी सहारा लिया है,लेकिन ''होनी" को कौन टाल सकता है ? बताते है,कि ED की गिरफ्त में तोते की तर्ज पर टर-टरा रहे,कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल ने अब अपना मुंह खोलना शुरू कर दिया है,उसके वचनों से पूर्व मुख्यमंत्री बघेल और उनकी टोली की बेचैनी लगातार बढ़ते जा रही है |


बताते है,कि घोटालों की रकम,कांग्रेस के विभिन्न हाथों से गुजरते हुए,पार्टी आलाकमान के सुझाए हुए ठिकानों की और रुख कर लिया करती थी| ED की हिरासत में रामगोपाल अब ऐसे ठिकानों की शिनाख्ती कराने में जुटे हुए है | उन्हें, पुराना हिसाब-किताब याद आने लगा है,दरअसल,3500 करोड़ के शराब घोटाले के अलावा लगभग 5,000 करोड़ के ''चावल घोटाले'' (कस्टम मिलिंग) के प्रकरण में रामगोपाल अग्रवाल ने जब अपना मुंह खोला तो,कई नेताओं और उनके गुर्गों की दास्तान सामने आने में देर नहीं लगी | ईडी ने रामगोपाल को पूछताछ के लिए 13 अक्टूबर तक रिमांड पर लिया है,ये अवधि कांग्रेस के उन नेताओं के लिए "संकट की घड़ी" साबित हो सकती है,जिनके रामगोपाल के साथ लेन-देन का करीब का नाता था | एजेंसियों के गलियारों से आ रही खबरों में,अंदेशा तो यही जाहिर किया जा रहा है,कि रामगोपाल ने पूर्व मुख्यमंत्री बघेल की असलियत जाहिर कर दी है |

जानकारी के मुताबिक,ED ने रायपुर की विशेष अदालत में चार्जशीट पेश कर जो तथ्य ''मय'' सबूत संज्ञान में लाए है,वे काफी गंभीर और कांग्रेस कार्यकाल में सत्ता की आड़ में अवैध वसूली के सुनियोजित नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे है | छत्तीसगढ़ को कांग्रेस का ''ATM'' ठहराए जाने के बीजेपी के आरोपों की पुष्टि अब ''चंदा मामा'' उर्फ़ रामगोपाल अग्रवाल भी कर रहे है | उनकी जुबान में पहला नाम "भू-PAY" और उसकी काली करतूतों से जुड़ी गतिविधियों को लेकर निकल रहा है |कांग्रेस के पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ विशेष कोर्ट में एक और आरोप पत्र इसी शुक्रवार को ED कोर्ट में दाखिल किया था।

चार्जशीट में दावा किया गया है कि शराब घोटाले के मुख्य आरोपित अनवर ढेबर के सहयोगी दीपेन चावड़ा के माध्यम से करीब 52 करोड़ रुपये रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाए गए थे। ईडी ने आरोप पत्र में दीपेन चावड़ा और निखिल चंद्राकर के बयानों का हवाला देते हुए कथित लेन-देन का ब्यौरा अदालत को सौंपा है,इसमें बताया गया है,कि कांग्रेस भवन के कर्मी देवेंद्र डड़सेना के हाथों से गुजरते हुए, नगद रकम रामगोपाल अग्रवाल की तिजोरी तक पहुँचती थी | मामले में अगली सुनवाई 20 नवंबर को होगी। अंदेशा जाहिर किया जा रहा है,कि इस अवधि में कांग्रेस के कई चलनशील नेता ED का चक्कर लगा सकते है | उनकी कुंडली पर भी ED का दंडवत योग-प्रकोप के रूप में देखा जा रहा है |

सीबीआई के शिकंजे में पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड ? 1,000 करोड़ के समाज कल्याण घोटाले में 5 आईएएस अफसर, आरोप पत्र  दाखिल करने से पूर्व गिरफ्तारी की लटकी तलवार-

छत्तीसगढ़ के समाज कल्याण विभाग में 1,000 करोड़ के घोटाले में तत्कालीन मुख्य सचिव विवेक ढांड की गिरफ्तारी के आसार जाहिर किए जा रहे है,दरअसल सीबीआई ने लंबी-जाँच पड़ताल के बाद कई ऐसे सबूत इक्कठा किए है,जिससे साफ़ हो रहा है,कि समाज कल्याण विभाग के कर्ता-धर्ताओं ने बेसहारा बुजुर्गों दिव्यांगों और जरूरतमंदों की सहायता करने के बजाए,खुद की तिजोरी भरने में कोई कसर बाकि नहीं छोड़ी थी | देश की सुप्रीम अदालत को गुमराह कर कानूनी दांव-पेंच वाली राहत पाने में कामयाब रहे,प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है |

दरअसल,दिव्यांग कल्याण घोटाले (एसआरसी-पीआरआरसी) में सीबीआई का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है,करीब आधा दर्जन आईएएस अधिकारियों की कार्यप्रणाली से वाकिफ होने के बाद केंद्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई अब आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी में व्यस्त बताई जाती है। आरोप पत्र इसी महीने दाखिल किए जाने की चर्चा जोरों पर है,दस्तावेजों की पड़ताल, पूछताछ और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया जारी है। प्रथम दृष्टिया जिन सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों पर सीबीआई की नज़रे टिकी हुई है,उनमे पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांढ का नाम अव्वल नंबर पर बताया जाता है,पूर्व मुख्य सचिव सुनील कुजूर के अलावा सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ.आलोक शुक्ला और एमके राउत समेत लगभग आधा दर्जन अफसरों के नाम संदेहियों की  कतार में शामिल बताए जाते है |


प्रदेश के चर्चित समाज कल्याण घोटाले में विभागीय कर्ता-धर्ता राजेश तिवारी की मुख्य भूमिका बताई जाती है | उसकी एयरपोर्ट VIP रोड,धर्मपुरा,नकटी समेत कई इलाकों में बेनामी संपत्ति के जखीरे का भी खुलासा हुआ है |इसके अलावा सतीश पांडेय, पीपी सोती, अशोक तिवारी और तत्कालीन महिला एवं बाल विकास मंत्री का नाम भी सुर्ख़ियों में है। देश की सुप्रीम अदालत ने समाज कल्याण घोटाले की जांच की जिम्मेदारी सीबीआई के हाथों में सौंपी थी। करीब 1 हजार करोड़ रुपये की अनियमितता के कई दस्तावेजी प्रमाण एजेंसियों के हाथ लगे है | 

 दिव्यांगों के पुनर्वास के लिए संचालित संस्थाओं (एसआरसी और पीआरआरसी) में कागजों पर सैंकड़ों कर्मचारियों की नियुक्ति दिखाकर कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी उनके नाम पर वेतन निकाल कर अपनी तिजोरी में भर रहे थे | सरकारी कर्मचारियों के नाम पर नकद भुगतान और वित्तीय गड़बड़ियों के हैरान करने वाले तथ्य एजेंसी के हाथ लगे है। हालाँकि,सीबीआई ने अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी प्रेस-मीडिया में साझा नहीं की है,बावजूद इसके राजनैतिक गलियारों में चर्चा है,कि "अब तो ढांढ गयो" ?

दरअसल,सीबीआई की सक्रियता दर्ज होते ही,कई कुख्यात बिल्डर और भू-माफिया पूर्व मुख्य सचिव ढांढ के इर्द-गिर्द मंडराते देखे गए है | सूत्र तस्दीक करते है,कि सीबीआई के रुख को देखते हुए,ढांढ ने भी एजेंसी के शिकंजे से बच निकलने की कवायतें तेज़ कर दी है,रिटायर मुख्य सचिव के कुख्यात बिल्डरों और  भू-माफियाओं के साथ कारोबारी रिश्ते काफी करीब के बताए जा रहे है | 3500 करोड़ के शराब घोटाले में विवेक ढांढ का नाम भी आरोपियों की श्रेणी में दर्ज बताया जाता है | जबकि,तत्कालीन खाद्य सचिव डॉ.आलोक शुक्ल का नाम नागरिक आपूर्ति निगम (नान) घोटाले में सामने आया था | इन मामलों में ED ने डॉ.आलोक शुक्ल के खिलाफ़ वैधानिक कार्यवाही भी की थी | फ़िलहाल,सीबीआई का अगला कदम क्या होगा ?इस ओर लोगों की निगाहे टिकी हुई है |