रायपुर : - छत्तीसगढ़ में हल्दी बीज वितरण में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार और केंद्रीय अनुदान हड़पने का मामला सामने आने के बाद कृषि विभाग ने पड़ताल शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक प्राथमिक जाँच में ही बड़े पैमाने पर गड़बड़झाला सामने आया है, बताया जाता है कि छत्तीसगढ़ शासन को कृषि के लिए उपयुक्त हल्दी बीज मुहैया कराने के नाम पर किसानों को चूना लगाने की एक सुनियोजित साजिश का खुलासा हुआ है, दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने को लेकर कवायतें जोरो पर बताई जाती है। दरअसल, मामले के सुर्खियों में आने के बाद कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने उद्यानिकी विभाग को जाँच के निर्देश दिए थे। इसके लिए संचालनालय स्तर पर टीम गठित कर हल्दी बीज सप्लाई की प्रक्रिया और बीज की गुणवत्ता जांची -परखी जा रही है। राज्य सरकार ने हल्दी की खेती करने वाले किसानों के खेतों में फसल और रोपित रकबे का सत्यापन करने के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जांच और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने तक योजना के तहत अनुदान भुगतान की कार्रवाई फिलहाल रोक लगा दी गई है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने साफ़ किया है कि हल्दी बीज वितरण में जाँच रिपोर्ट आते ही दोषी पाए जाने पर अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

जानकारी के मुताबिक हल्दी बीज वितरण में गड़बड़ी की शिकायत सामने आने के बाद मंत्री रामविचार नेताम ने बीज निर्माण प्रक्रिया से लेकर किसानों के खेत -खलियानों तक विभागीय दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन और नियमानुसार कार्यवाही के निर्देश दिए है। राज्य पोषित मसाला क्षेत्र विस्तार प्रोत्साहन योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में हल्दी की खेती का क्षेत्र बढ़ाने का कार्यक्रम प्रदेश भर में चलाया जा रहा है।  इसी योजना के अंतर्गत हल्दी बीज वितरण में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आई थी। 


अगले साल छत्तीसगढ़ भ्रष्टाचार मुक्त, कृषि मंत्री रामविचार नेताम का बड़ा दावा '' गौरतलब''..

जानकारी के मुताबिक, हल्दी बीज की सरकारी सप्लाई करने वाली सोसायटी सिर्फ कागजो में संचालित बताई जाती है, इस संस्था का पता -ठिकाना भी फर्जी पाया गया था। यही नहीं, कथित सोसायटी का हल्दी बीज का लाइसेंस दिनांक 6/8/2026 को संचालनालय उद्यानिकी विभाग द्वारा जारी किया गया, जबकि, आपूर्ति के बिलों में बिलिंग डेट एक माह पूर्व दिनांक 3/7/2026 दर्ज बताई जाती है। सवाल उठ रहा है कि टेंडर -निविदा जारी होने के एक माह पहले विभाग में हल्दी बीज की सप्लाई किस आधार पर कर दी गई थी। शिकायतकर्ता  किसानों के मुताबिक, असली और गुणवत्ता वाले बीजों के बजाय नकली घटिया और चाइनीज बीज सौंप कर सिर्फ खाना पूर्ति की गई, जबकि इसके एवज में लगभग 7 करोड़ से ज्यादा का वारा -न्यारा किया गया था। यह भी बताया जाता है कि उद्यानिकी विभाग ने छत्तीसगढ़ की जलवायु के लिए बेहतर हल्दी बीज की वैराइटी ''रोमा'' की आपूर्ति के लिए टेंडर - निविदा जारी की थी। लेकिन सप्लायर के साथ -साथ विभागीय अधिकारियों ने सरकार के दिशा - निर्देशों की अवहेलना करते हुए अजीबों -गरीब किस्म के नकली हल्दी बीजो को सीधे किसानो को सौंप दिया था। पीड़ित किसान तस्दीक करते है कि उद्यानिकी विभाग के अफसरों के निर्देश पर पूरे प्रदेश में नकली हल्दी बीज खपाए गए।

यह भी तस्दीक की जा रही है कि सोसयटी के बिलिंग में ''रोमा'' वैरायटी दर्ज कर मोटा भुगतान निकाल लिया गया, जबकि सप्लाईकर्ता सोसायटी के पास ''हल्दी बीज निर्माण - अंकुरण'' संबंधी न तो लाइसेंस है, और न ही विधिवत टैग नंबर। सूत्र यह भी तस्दीक करते है कि आपूर्तिकर्ता सोसयटी द्वारा भुगतान बिलों में हल्दी बीज के टैग नंबर एवं लॉट नंबर दर्शाए गए है, वो पूरी तरह से फर्जी है, बीज प्रमाणीकरण सर्टिफिकेट पर दर्ज टैग नंबर एवं लॉट नंबर, बिलिंग में दर्ज टैग नंबर एवं लॉट नंबर दोनों भिन्न - भिन्न है | उधर फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद यह जानकारी भी सामने आ रही है कि आपूर्तिकर्ता सोसयटी को जिस संस्थान द्वारा  टैग एवं लॉट नंबर सहित अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराये थे, राज्य से बाहर के ऐसे कारोबारी संस्थानों ने जाँच शुरू होते ही अपने हाथ पीछे खींच लिए है। बताया जाता है कि बिल भुगतान होने तक की तिथि की अवधि पार होते ही उन कृषि संस्थानों ने अपने टैग नंबर भी रायपुर की बिरगांव स्थित आपूर्तिकर्ता सोसायटी से वापस ले लिए है। हालांकि अभी इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है | 

यह भी पढ़े : - छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री के गले पड़ा “हल्दी बीज”! 25 करोड़ के बिल में सब कुछ फ़र्जी, सिर्फ कागज़ों में सप्लायर सहकारी संस्था का कारोबार, ठगे गए किसान, लॉट- टैग, RO-9 सर्टिफिकेट, मोबाइल नंबर समेत कई जानकारियां फ़र्जी…

उधर जाँच शुरू होते ही उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी संचालनालय ने संबंधित जिलों के अधिकारियों से हितग्राही वार जानकारी और आवश्यक दस्तावेज मांगे हैं. इसमें किसानों को दिए गए हल्दी बीज की मात्रा, बीज प्रदायक संस्थाओं की ओर से आपूर्ति किए गए बीज की मात्रा और गुणवत्ता तथा किसानों को भुगतान की गई अनुदान राशि का विवरण शामिल बताया जाता है। कृषि विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि हल्दी बीज रोपण से जुड़े दस्तावेज, भुगतान संबंधी जानकारी और फसल के भौतिक सत्यापन के अभिलेख निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध कराए जाएं. इन दस्तावेजों के आधार पर शिकायतों की तथ्यात्मक जांच कर शासन को रिपोर्ट सौंपी जाएगी। जांच में यह पता लगाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है कि किसानों ने वास्तव में कितने क्षेत्र में हल्दी की खेती की है और रिकॉर्ड में दर्ज रकबा वास्तविक स्थिति से मेल खाता है या नहीं.इसके लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे कराने के निर्देश दिए गए हैं.

यह भी पढ़े : - हल्दी बीज़ की सप्लाई में ''बीजेपी सरकार'' को 25 करोड़ का चूना, हफ्तेभर में 10 करोड़ का भुगतान,छत्तीसगढ़ में 40% सब्सिडी भी डकार गए सप्लायर ? किसानों ने CM से की एक्शन की मांग...

सत्यापन के दौरान बीज वितरण के रिकॉर्ड, बीज प्रदायक संस्थाओं के विवरण, देयकों, पंजीयन टैग और फसल की वास्तविक स्थिति की जांच की जाएगी.इसके अलावा किसानों के खेतों में रोपी गई हल्दी की फसल के जीपीएस आधारित फोटोग्राफ भी मांगे गए हैं.इन डिजिटल साक्ष्यों और विभागीय दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा, ताकि योजना के तहत दर्ज जानकारी की पुष्टि की जा सके और किसी भी तरह की अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदारी तय की जा सके. छत्तीसगढ़ में उद्यानिकी विभाग के माध्यम से राज्य पोषित योजना के अंतर्गत 1,300 हेक्टेयर क्षेत्र में हल्दी की खेती का विस्तार करने का कार्यक्रम है। योजना के प्रावधानों के अनुसार, अपने स्तर पर प्रमाणित हल्दी बीज की व्यवस्था कर उसका रोपण करने वाले पात्र किसानों को प्रति हेक्टेयर 46,000 रुपये तक अनुदान दिया जा सकता है। हालांकि, हल्दी बीज वितरण से जुड़ी शिकायतों और मौजूदा सत्यापन प्रक्रिया को देखते हुए विभाग ने अनुदान भुगतान की कार्रवाई रोक दी है, फिलहाल  जाँच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।