
दिल्ली/रायपुर : छत्तीसगढ़ के पूर्व CM समेत ED के कई आरोपी और संदेही समेत डिप्टी कलेक्टर, सलाहकार और उद्योगपति CBI के रडार पर बताए जाते है| पूर्व CM और दागी चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी के बीच की उलझी कड़ी अब सुलझती जा रही है| आरोपियों से हुई पूछताछ में कई नए तथ्यों के सामने आने के बाद CGPSC घोटाले में शामिल कई नए संदेहियों पर CBI का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है|

एजेंसी हर उस कड़ी को जोड़ रही है,जिसके तहत CGPSC में वर्ष 2018 से लेकर 2023 तक कई कुपात्रों को पिछले दरवाजे से “अधिकारी” बना दिया जाता था| हालांकि,वर्ष 2021-22 में चयनित उम्मीदवारों को लेकर CBI ने अपनी तफ़्तीश शुरू की थी| लेकिन,अब ऐसे कई प्रमाण मिले है,जो एजेंसियों की जाँच का दायरा बढ़ाए जाने को लेकर कारगर बताए जाते है|

जानकारी के मुताबिक, कई योग्य और वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को दरकिनार कर तत्कालीन मुख्यमंत्री ”भू-PAY” बघेल ने अपने संवैधानिक अधिकारों का दुरूपयोग करते हुए,2 जून 2020 को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग CGPSC के चेयरमैन पद पर टामन सिंह सोनवानी की नियुक्ति की थी | सूत्रों का दावा है,कि अवैध आमदनी बढ़ाने के चक्कर में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने अपनी निजी सेवा शर्तों के तहत ‘‘प्रमोटी IAS” टामन सिंह सोनवानी को अयोग्य होते हुए भी चैयरमेन जैसे महत्त्वपूर्ण पद की कुर्सी सौंप दी थी | जबकि,एक दर्जन से ज़्यादा योग्य और अनुभवी वरिष्ठ आईएएस CGPSC के इस पद के उपयुक्त दावेदार माने जा रहे थे |

बताते है,कि बघेल गिरोह की प्रमुख उपसचिव सौम्या चौरसिया की सलाह पर मुख्यमंत्री सचिवालय के तत्कालीन सेक्रेट्री और डायरेक्टर एग्रीकल्चर टामन सिंह सोनवानी को राज्य लोक सेवा आयोग के नए चेयरमैन की कुर्सी रातों-रात सौंप दी गई थी। टामन सिंह 2004 बैच के अवार्डी (प्रमोटी) अफसर है,उन्हें 2008 में आईएएस अवॉर्ड स्वीकृत हुआ था| राजधानी रायपुर के करीब धमतरी जिले के सर्वदा गांव निवासी टामन सिंह 1991 में संयुक्त मध्यप्रदेश के दौर में राज्य प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए थे। 2001 में छत्तीसगढ़ गठन के बाद वे नारायणपुर और कांकेर जिले के कलेक्टर रह चुके हैं। यह भी बताया जाता है,कि टामन सिंह सोनवानी 2021 के सितंबर माह में रिटायर होने वाले थे,लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री की सौम्या चौरसिया के निर्देश पर सौदेबाज़ी का करार होते ही,उन्होंने अचानक वीआरएस ले लिया था।

तस्दीक की जाती है,कि बघेल गिरोह की सेवा शर्तों के तहत सोनवानी को पूरे करीब साढ़े तीन साल अर्थात 62 साल की उम्र तक पीएससी चेयरमैन की पद पर बनाए रखने का सौदा तय किया गया था | इस करार के मुताबिक,CGPSC को ”प्राइवेट लिमिटेड कंपनी” की तर्ज़ पर लाभ कमाने की एजेंसी बना कर टामन सिंह को चेयरमैनशिप सौंपी गई थी। यह भी तस्दीक की जाती थी,कि चेयरमैन बनते ही अपनी प्रतिक्रिया देते हुए टामन सिंह सोनवानी ने पत्रकारों से कहा था, कि वे पहले पीएससी को समझेंगे उसके बाद अपनी प्राथमिकताएं तय करेंगे ? अब उनकी प्राथमिकताएं जगजाहिर है |

तस्दीक की जाती है,कि सोनवानी ने पूर्व मुख्यमंत्री और उनके गिरोह के निर्देश पर लगभग आधा सैंकड़ा कुपात्रों को अधिकारी बनाया था | जबकि,खुद टामन सिंह के लगभग 18 नाते रिश्तेदार और करीबी कुपात्र उम्मीदारों को भी पिछले दरवाजे से अधिकारी बना दिया गया था | अवैध रूप से अर्जित इस आय को ब्लैक एंड वाइट करने के लिए एक पारिवारिक NGO का इस्तेमाल किया गया था | बताते है,कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत ECIR दर्ज कर इस NGO के द्वारा बरती गई धांधली की जाँच-पड़ताल कर रही है | इस बीच बड़ा खुलासा हुआ है,कि CGPSC कारोबार में शामिल अफसरों और कई पदाधिकारियों ने मोटी रकम कमा कर,बड़े पैमाने पर जमीनों और अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों में निवेश किया है |

यह भी बताया जाता है,कि वर्ष 2018 से लेकर 23 तक तत्कालीन मुख्यमंत्री के कतिपय सुरक्षा अधिकारियों (पुलिस) और उनके आवास और कार्यालय में कार्यरत कई अफसरों के पुत्र-पुत्रियां और अन्य सगे-संबंधी भी पिछले दरवाज़े से नौकरी पाने में कामयाब रहे है,अब एजेंसी ऐसे संदिग्धों की खोजबीन में जुट गई है |

सूत्रों का दावा है,कि आरोपी अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया से जारी पूछताछ से कई रहस्यों पर से पर्दा हटने लगा है | CGPSC घोटाले में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कई ”रसूखदार” नाम सामने आ रहे है,इनमें सूरज कश्यप, विनोद वर्मा और गोयल बंधु भी जांच के घेरे में बताए जाते है | यह भी बताया जाता है,कि चर्चित उद्योगपति गोयल बंधुओं ने “CSR” फंड की रकम का इस्तेमाल जनहित के कार्यों पर करने के बजाए अपने करीबी नाते-रिश्तेदारों को “डिप्टी कलेक्टर” बनाने पर खर्च किए थे|

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बजरंग पावर के डायरेक्टर श्रवण गोयल के बेटे और बहू दोनों को डिप्टी कलेक्टर बनाने के लिए “CSR” फंड की रकम ‘‘रिश्वत” देने के लिए उपयोग की गई थी| इस मामले में कथित कंपनी मैनेजमेंट के सभी पदाधिकारियों की कवायतें गंभीर अपराध के दायरे में बताई जाती है| यह भी बताया जाता है,कि रिश्वतखोरी के लिए CSR फंड की रकम के इस्तेमाल की अनुमति देने के मामले में कंपनी मैनेजमेंट में शामिल सभी डायरेक्टरों के खिलाफ भी FIR दर्ज होने के आसार है | इस मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस को भी पृथक से FIR दर्ज करने के लिए निर्देशित किए जाने पर विचार मंथन जारी बताया जाता है| बताते है,कि साल 2021 के CGPSC परिणामों में शशांक गोयल और उनकी पत्नी भूमिका (डिप्टी कलेक्टर) क्रमश: तीसरे और चौथे टॉपर थे। CBI ने पहले ही झटके में शशांक गोयल और भूमिका अपनी गिरफ़्त में लिया था |

हालांकि,दोनों ही आरोपी जमानत पर रिहा बताए जाते है,जबकि ”रिश्वत” के लिए “CSR” फंड स्वीकृत करने वाले कंपनी के डायरेक्टर समेत लेन-देन करने वाले अन्य संदेही अब एजेंसी की रडार पर बताए जाते है | सूत्रों के मुताबिक,उद्योगपति गोयल बंधुओं ने अपने बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका को नौकरी दिलाने के लिए पूर्व चैयरमैन टामन सिंह सोनवानी के करीबी शख्स के एनजीओ को सीएसआर फंड से 45 लाख रुपये दिए थे। बताते है,कि इस रकम की डिलीवरी पीएसपी भर्ती के सलेक्शन के दौरान क्रमशः 20 लाख और 25 लाख दो किश्तों में दिए गए थे।

देश में पहली बार यह बानगी देखने मिली,कि किसी औद्योगिक इकाई के भागीदारों द्वारा अपने बहू-बेटों को अफसर बनाने के लिए सीएसआर फंड का उपयोग किया गया है,सिर्फ गोयल बंधु ही नहीं,बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के दो और OSD CGPSC के बिचौलियों के रूप में कार्यरत बताए जाते है| सूत्रों के मुताबिक,इनमें से एक अजित मढ़रिया उर्फ़ बजरंगी जबकि,दूसरा तत्कालीन OSD सूरज कश्यप (डिप्टी कलेक्टर ) का नाम सामने आया है |अजित मढ़रिया उर्फ़ बजरंगी से प्रवर्तन निर्देशालय (ED) “दो बार” लंबी पूछताछ कर चुकी है |

CGPSC घोटाले के पूर्व प्रदेश के फर्जी सेक्स CD कांड में गोयल बंधुओं का नाम भी शुमार बताया जाता है | यह भी बताया जाता है,कि रिंकू खनूजा हत्या-आत्महत्या मामले में उद्योगपति सुरेश गोयल की मुख्य भूमिका थी | लेकिन,तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल ने CD कांड से जुड़ी रिंकू खनूजा विवेचना की फाइल निजी लाभ के चलते अलमारियों में कैद करवा दी थी | नतीजतन, रिंकू खनूजा हत्या-आत्महत्या प्रकरण अभी भी अबूझ पहेली बना हुआ है | अब इस फाइल के दोबारा खोले जाने को लेकर भी हलचल तेज़ देखी जा रही है|

सूत्रों द्वारा बताया जा रहा है,कि इस मामले की हकीकत जानने के लिए बंद फाइल पुनः खुलवाए जाने पर राज्य सरकार के भीतर भी विचार मंथन जारी है | बताते है,कि फर्जी सेक्स CD कांड में वसूली गए रकम के बंटवारे को लेकर गोयल और रिंकू खनूजा के बीच जमकर वाद-विवाद हुआ था | इससे जुड़ा एक ऑडियो भी सोशल मीडिया में सामने आया था | इस विवाद के दौरान रिंकू खनूजा की संदेहस्पद मौत की घटना सामने आई थी |

बताया जाता है,कि कांग्रेस के सत्ता में आने के,चंद महीनों के भीतर ही,पिछले दरवाजे से भर्ती के खेल में बजरंगी एक तरफ़ा करीब 100 करोड़ की रकम पर हाथ साफ़ कर चुका था | यह भी बताया जाता है,कि तत्कालीन उपसचिव सौम्या चौरसिया के भी CGPSC रैकेट में एंट्री करने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री बघेल और अजित मढ़रिया के बीच गंभीर मतभेद उत्पन्न हो गए थे | नतीजतन,पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने करीबी रिश्तेदार और PWD विभाग में ”चपरासी” (चतुर्थ श्रेणी कर्मी) के पद पर कार्यरत अजित मढ़रिया उर्फ़ बजरंगी की मुख्यमंत्री आवास में तैनाती की सेवाएं अचानक समाप्त कर दी थी |

सूत्रों के मुताबिक,सुकमा के मौजूदा डिप्टी कलेक्टर और पूर्व मुख्यमंत्री के तत्कालीन निज सचिव सूरज कश्यप,पूर्व सलाहकार विनोद वर्मा समेत अन्य पर भी कानूनी कार्यवाही के आसार जाहिर किए जा रहे है, कई महत्त्वपूर्ण साक्ष्यों की मौजूदगी सामने आने के बाद एजेंसियों के गलियारे में हलचल तेज़ देखी जा रही है|जानकारी के मुताबिक,राज्य प्रशासनिक सेवा 2017 बैच के डिप्टी कलेक्टर सूरज कुमार कश्यप को 18 अक्टूबर 2019 को तत्कालीन मुख्यमंत्री का ओएसडी बनाया गया था। जबकि,बीजेपी के सत्ता में आते ही 4 दिसंबर 2023 को उनकी सेवाएं वापस मूल विभाग को सौंप दी गई थी|

तस्दीक की जाती है,कि OSD के सौंपे गए प्रभार के बजाए सूरज कुमार कश्यप द्वारा सौम्या चौरसिया के निर्देशन पर छत्तीसगढ़ शासन के विभिन्न महकमों में ठेके और सप्लाई,अवैध उगाही समेत “नगद नारायण” वाली योजनाओं को सुनियजित रूप से संचालित किया जाता था | जेल की हवा खा रहे CGPSC के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के साथ ”ग्राहक-बिचौलियाँ ” से जुड़े कई प्रकरणों में सूरज कश्यप का नाम शुमार और उनकी कार्यप्रणाली जाँच के घेरे में बताई जाती है |

यह भी बताया जाता है,कि तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल का ‘‘सरकारी आवास” आमतौर पर सटोरियों और गैर कानूनी गतिविधियों से जुड़े असामाजिक तत्वों व आपराधिक छवि के राजनेताओं का अड्डा बन गया था | इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री के सचिवालय में ”निष्ठावान सेवको” के बजाए ”बिचौलियों” ने अपना कब्ज़ा जमा लिया था | इनमे प्रमुख पूर्व मुख्यमंत्री के तत्कालीन सरकारी सलाहकार विनोद वर्मा और उपसचिव सौम्या चौरसिया का नाम भी शुमार बताया जाता है|15 हज़ार करोड़ के महादेव एप्प सट्टा घोटाले में 2001 बैच के आईपीएस आनंद छाबड़ा, 2004 बैच के आईपीएस शेख़ आरिफ के अलावा 2007 बैच के प्रशांत अग्रवाल के साथ-साथ विनोद वर्मा को भी सटोरियों से मोटी रकम प्राप्त होती थी | बताते है,कि सत्ता का दुरूपयोग कर रोजाना लाखों-करोड़ों कमाने वालों में कोयला माफिया सूर्यकांत तिवारी,कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामअवतार अग्रवाल,रिटायर आईएएस अनिल टुटेजा और ढेबर बंधुओं द्वारा भी CGPSC के बैनर तले कई कुपात्रों को उपकृत किया गया था |

सूत्रों का दावा है,कि सीबीआई प्याज़ के छिलकों की तर्ज पर CGPSC की परतें खोल रही है, परत दर परत उसके तार “पूर्व मुख्यमंत्री” बघेल के सरकारी और निजी आवास में डेरा जमाए करीबियों से जुड़ते प्रतीत हो रहे है | CGPSC समेत कई अन्य घोटालों में तत्कालीन मुख्यमंत्री और उगाही के स्त्रोतों के बीच महत्त्वपूर्ण कड़ी का कार्य इसी चौकड़ी के हवाले बताया जाता है,जबकि बेजा उगाही के इस गिरोह का ”सरगना” खुद ”पूर्व मुख्यमंत्री” भू-PAY बताया जाता है |

फ़िलहाल,बलरामपुर के अपर कलेक्टर चेतन बोरघारिया से हुई पूछताछ एवं संदेहियों पर संभावित कार्यवाही समेत एजेंसी के अगले कदम को लेकर सीबीआई की ओर से अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई हैं,अलबत्ता पूर्व मुख्यमंत्री बघेल और उनके करीबियों पर एजेंसी के कसते शिकंजे से दिल्ली का कांग्रेस गलियारा सरगर्म बताया जाता है |
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