
रायपुर : छत्तीसगढ़ में “हल्दी बीज” सप्लाई के नाम पर नकली बीज खपा कर सरकार को लगभग 25 करोड़ का चूना लगाए जाने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है|जानकारी सामने आई है,सप्लायर सहकारी संस्था ”मातृ भूमि बहुउद्देशीय सहकारी समिति मर्यादित” सिर्फ कागजों में संचालित की जा रही है| इस सुनियोजित फर्जीवाड़े में ”मंत्री महोदय” के एक चर्चित निज सचिव,डायरेक्टर हॉर्टिकल्चर समेत ठेकेदार जिग्नेश पटेल की भूमिका सामने आई है|

यह भी बताया जाता है,कि सिर्फ हॉर्टिकल्चर विभाग ही नहीं,बल्कि कृषि विभाग की कई योजनाओं को गैर रूप से ”थर्ड पार्टी” ठेके पर दे दिया गया है| कृषि विभाग के कई जिम्मेदार अफसर मूक-बधिर बने हुए है,वे सिर्फ औपचारिकतावश कागज़ी घोड़े दौड़ा रहे है,जबकि जिग्नेश पटेल नामक ठेकेदार के गुर्गे ही कृषि उपकरणों,खाद-बीज की सप्लाई समेत समस्त प्रकार के कार्यों को निविदा टेंडर के माध्यम से संचालित कर रहे है |ताज़ा जानकारी के मुताबिक,25 करोड़ की नकली हल्दी वो भी कागजों में सप्लाई के मामले के उजागर होने के बाद कृषि माफ़िया गिरोह ने ”मंत्री महोदय” की शरण ले ली है|यह भी बताया जाता है,कि खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल के द्वारा हालिया,सेवा से हटाए गए निज सचिव की तर्ज़ पर कृषि मंत्री राम विचार नेताम के एक निज सचिव ने भी कमीशनखोरी का जाल फ़ैला लिया है|

सूत्रों का दावा है,कि कृषि और हॉर्टिकल्चर विभाग की तमाम योजनाओं को शुद्ध 40 फ़ीसदी कमीशन तय कर,पूरे विभाग की योजनाओं को किसी जिग्नेश पटेल नामक ठेकेदार के हवाले कर दिया गया है| इस ठेकेदार ने सिर्फ़ कागजो में कारोबार के साथ योजनाओं को संचालित करने की बड़े पैमाने पर तैयारी कर रखी है|इसके लिए कई फ़र्जी कंपनियों और फर्मों का सहारा लिया गया है| पूर्व मुख्यमंत्री की निलंबित उपसचिव सौम्य चौरसिया और जिग्नेश पटेल के बीच कारोबारी रिश्ते भी बताए जाते है| पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में अंजाम दिए गए उसके काले कारनामों की जाँच ED और ACB-EOW में लंबित बताई जाती है|कारोबारी जिग्नेश पटेल जमानत पर रिहा बताए जाते है|

यह भी बताया जाता है,कि राज्य की पूर्ववर्ती ”भू-PAY” सरकार के 5 वर्ष के कार्यकाल में कथित ठेकेदार ने कृषि विभाग और DMF में अकेले 5 हज़ार करोड़ से अधिक का कारोबार कर छत्तीसगढ़ शासन को जमकर चूना लगाया था| कांग्रेस के सफाए के बाद अब बीजेपी शासन काल में भी यही ठेकेदार कई फ़र्जी नामों,सहकारी समितियों और फर्मों के माध्यम से कृषि महकमे की नए सिरे से बागडोर संभाल रहा है|

एक पुख़्ता जानकारी के मुताबिक,नकली हल्दी बीज सप्लाई के 10 करोड़ के बिलो के भुगतान के साथ-साथ किसानों की सब्सिडी की 25 करोड़ की रकम डकारने को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है| बताया जाता है,कि हल्दी बीज सप्लाई करने वाली संस्था ”मातृ भूमि बहुउद्देशीय सहकारी समिति मर्यादित” के बिलो में पता-ठिकाना और दर्ज़ मोबाइल नंबर सब कुछ फ़र्जी है,यही हाल,हल्दी बीज के लॉट और टैग नंबर सहित RO-9 सर्टिफिकेट का बताया जा रहा है|जानकारी के मुताबिक, भुगतान बिलो में सप्लायर संस्था ने रायपुर से सटे बीरगांव में अपना जो पता-ठिकाना बताया है,वहाँ आम लोग निवास करते है| उस स्थान से लेकर आस-पास के मोहल्ले में ”मातृ भूमि बहुउद्देशीय सहकारी समिति मर्यादित” ऐसी कोई संस्था संचालित नहीं की जा रही है | इलाके के इस स्थान पर बसे लोग,इसकी तस्दीक करते है|जबकि,बिलो में दर्ज़ मोबाइल नंबर ( 9926800968) इस सहकारी संस्था के ना तो किसी पदाधिकारी और ना ही किसी कर्मचारी का बताया जाता है |बल्कि,बिल में दर्ज यह नंबर,ठेकेदार जिग्नेश पटेल के किसी “शर्मा” नामक सहयोगी का बताया जाता है |

छत्तीसगढ़ में राज्य पोषित योजना 2026-27 के ‘मसाला क्षेत्र विस्तार’ योजना के तहत किसानों को वितरित किए गए हल्दी बीज को लेकर अब कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल सिर्फ बीज की सप्लाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसे उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं की पात्रता, जिले में उनके कार्यालय या डीलर नेटवर्क, लाइसेंस और प्रिंसिपल सर्टिफिकेट (PC) से लेकर बीज के टैग और लॉट नंबर तक पर उठ रहे हैं। ऐसे में यह जांच का विषय बन गया है कि किसानों को बीज उपलब्ध कराने से पहले विभागीय स्तर पर सभी जरूरी दस्तावेज और मानकों का सत्यापन किया गया था या नहीं ?

हॉर्टिकल्चर और कृषि विभाग के अधिकारी अब “मंत्री महोदय” के निज सचिव और डायरेक्टर हॉर्टिकल्चर से जानकारी लेने का हवाला लेकर अपना पल्ला झाड़ रहे है|हल्दी बीज सप्लाई करने वाली सहकारी संस्था को-ऑपरेटिव सोसाइटी के तौर पर पंजीकृत होने एवं बिलिंग एड्रेस संबंधी दस्तावेजो के भी संदिग्ध होने की जानकारी सामने आई है | हल्दी बीज की गुणवत्ता और प्रमाणिकता की जांच को लेकर सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सूत्रों के मुताबिक,जिस सहकारी संस्था से किसानों के लिए हल्दी बीज खरीदा गया,उस बीज का टैग नंबर और लॉट नंबर की पड़ताल ना तो कृषि विभाग द्वार की गई और ना ही निविदा टेंडर के दौरान हॉर्टिकल्चर विभाग ने भी इसकी गुणवत्ता की जाँच परख के लिए कोई कदम नहीं उठाएं ?

यह भी बताया जाता है,कि करोड़ों के बिल के भुगतान के समय संबंधित संस्था के टैग सर्टिफिकेट अथवा RO-9 दस्तावेज भी संदेह के दायरे में है ? शिकायकर्ता यह भी तस्दीक कर रहे है,कि सब्सिडी के लिए किसानों से लिए गए 60 प्रतिशत फार्मर शेयर की रसीद तैयार करने में सप्लायर सहकारी संस्था द्वारा बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया| ‘साथी पोर्टल’ पर पंजीयन को लेकर भी दस्तावेजी सत्यापन की जांच भी जरूरी बताई जा रही है |

यही नहीं,हल्दी बीज के उत्पादन स्थल और वैरायटी को लेकर भी कोई दस्तावेज विभाग के पास उपलब्ध नहीं बताए जा रहे हैं। हल्दी बीज का उत्पादन किस जिले में हुआ ? उससे संबंधित जानकारी ना तो उद्यानिकी विभाग के रिकॉर्ड में उपलब्ध है और ना नहीं कृषि विभाग के अधिकारी,इसे लेकर कोई स्पष्ट जवाब दे पा रहे है| सप्लायर संस्था के पास ‘रोमा’ वैरायटी के बीजों को पूरे प्रदेश में उपलब्ध कराए जाने को लेकर वैध लाइसेंस के ना होने की जानकारी से कई अफसर अनभिज्ञ बताए जाते है | उनकी माने तो,“मंत्री महोदय” के निज सचिव के समय-समय पर प्राप्त निर्देश का वे पालन कर रहे थे| वे कहते है,कि हल्दी बीज टैग की वैधता की जाँच परख के बाद ही उसकी आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है|

नाम ना जाहिर करने की शर्त पर कुछ अफसर तस्दीक करते है,कि किसानों को वितरित हल्दी बीज की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत ना होकर,डायरेक्टर हॉर्टिकल्चर के मौखिक निर्देश पर अमल में लाई गई थी| उनके मुताबिक,जिस वर्ष टैग जारी हुआ, उसी वर्ष हल्दी बीज की एक्सपायरी दर्ज है,ऐसे में किसानों को सप्लाई बीज और उसके भुगतान की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या नहीं ? इसका जवाब तो “मंत्री महोदय” ही दे सकते है| फ़िलहाल,राज्य की बीजेपी सरकार को हल्दी के नाम पर चूना लगाने की स्कीम की असल तस्वीर तो जाँच के बाद ही साफ़ होगी ? न्यूज़ टुडे छत्तीसगढ़ ने मामले को लेकर कृषि मंत्री और डायरेक्टर हॉर्टिकल्चर से संपर्क किया,लेकिन कोई प्रतिउत्तर नहीं मिला |
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