बिलासपुर : छत्तीसगढ़ पुलिस ने फौरी कार्यवाही करते हुए,बिलासपुर के सरकंडा इलाके के थाना प्रभारी (टीआई) प्रदीप आर्य को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया है। टीआई नरेश चौहान को सरकंडा थाने की नई कमान सौंपी गई है।  हालाँकि,अभी थाना प्रभारी प्रदीप आर्य को निलंबित नहीं किया गया है | जानकारी के मुताबिक, बिलासपुर  एसएसपी रजनेश सिंह की ओर से जारी एक आधिकारिक आदेश में थाना प्रभारी प्रदीप आर्य की लाइन हाज़िरी को सामान्य प्रशासनिक फेरबदल के अंतर्गत बताया गया है। हालिया, बिलासपुर पहुंचे फैमिली कोर्ट के जज के खिलाफ मामला दर्ज होने के तुरंत बाद हुई इस कार्रवाई को लेकर शहर में चर्चा शुरू हो गई है। 

दावा किया जा रहा है,कि दर्ज काउंटर केस में चिन्हित आरोपियों में से एक प्रॉपर्टी डीलिंग का कार्य करता है, उसके थाना प्रभारी आर्य के मधुर संबंध है | लिहाज़ा,विवाद के दौरान देर रात ही बिल्डरों के फरमान पर जज के ख़िलाफ़ भी मुकदमा दर्ज कर दिया गया था | यह भी बताया जाता है,कि अनुशासनहीन पुलिस अधिकारियों पर ठोस वैधानिक कार्यवाही नहीं होने के चलते पुलिस महकमे के भीतर कानून के दुरूपयोग और दंडनीय धाराओं के बेजा इस्तेमाल के मामले आम हो चले है | इससे ना केवल पुलिस मुख्यालय बल्कि,छत्तीसगढ़ शासन की छवि पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है| 

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यह भी बताया जाता है,कि पिछले लगभग 10 सालों से बिलासपुर डटे रहने के मामले ने पुलिस महकमे के भीतर उन लोगों की चिंताएं बढ़ा दी है,जो कायदे-कानूनों के तहत अपने उचित स्थानांतरण की गुहार पिछले कई  वर्षों से  पुलिस मुख्यालय से लगा रहे है | जानकारी के मुताबिक,कभी परिजनों के इलाज तो कभी स्वयं की समस्याओं को कानूनी मुद्दा बना कर ''अदालत'' के जरिए राहत पाने में प्रदीप आर्य को अव्वल नंबर पर बताया जाता है | लेकिन,अब न्यायिक अधिकारी के खिलाफ ही गैर कानूनी रूप से आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के मामले में प्रदीप आर्य की भूमिका गंभीर जाँच के दायरे में आंकी जा रही है | 

हाल ही के दिनों में सरकंडा थाने में महासमुंद के फैमिली कोर्ट में पदस्थ एक जज के खिलाफ गैर कानूनी रूप से FIR दर्ज किए जाने के मामले के तूल पकडे जाने के दौरान पूर्व थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई थी। बताया जाता है,कि बगैर अदालत की अनुमति के न्यायिक अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज करने का मामला गंभीर कदाचरण और छत्तीसगढ़ पुलिस आचरण सेवा के उल्लंघन के दायरे में बताया जाता है,ऐसी कार्यप्रणाली को लेकर पुलिस महकमे के भीतर वरिष्ठ अफसरों के बीच गहरी नाराजगी भी जताए जाने की जानकारी मिली है | 

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यह भी बताया जाता है,कि थाना प्रभारी प्रदीप आर्य ने अपनी तैनाती के वर्षों में  ज़्यादातर वक़्त बिलासपुर जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में ही गुज़ारा है | बताते है,कि पूर्व के वर्षों में प्रदीप आर्य का स्थानांतरण बिलासपुर से बस्तर रेंज किया गया था | लेकिन,कानूनी दांव पेंचों और राजनैतिक जोड़-तोड़ के चलते वे चंद दिनों में ही बिलासपुर में यथावत पोस्टिंग पाने में कामयाब रहे | बिलासपुर जिला उनका गृह नगर भी बताया जाता है |

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 एक पुष्ट जानकारी के मुताबिक,कांग्रेस कार्यकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री भू-PAY बघेल और उनकी करीबी तत्कालीन उप सचिव सौम्या चौरसिया के निर्देश पर बिलासपुर सिटी कोतवाली के तत्कालीन थाना प्रभारी प्रदीप आर्य ने कई निर्दोष नागरिकों के खिलाफ झूठे प्रकरण दर्ज कर कांग्रेस पार्टी को राजनैतिक फायदा पहुँचाया था | हालाँकि,अदालत में प्रदीप आर्य द्वारा दर्ज सभी प्रकरण बेबुनियाद साबित हुए लेकिन,पुलिस अधिकारी द्वारा वर्दी में कांग्रेस पार्टी का ''झंडा-डंडा'' थामने से  पुलिस महकमे की छवि सवालों के घेरे में है ?

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जनता की सेवा के बजाए राजनैतिक लाभ के लिए दागी नेताओं की अनुचित सेवा में तत्पर प्रदीप आर्य की गैर जिम्मेदारपूर्ण कार्यप्रणाली का खामियाजा उन निर्दोष नागरिकों को भुगतना पड़ा था,जिनके खिलाफ झूठे प्रकरण दर्ज किए गए थे | वर्दी की आड़ और पद का दुरूपयोग करने के कई मामलों में प्रदीप आर्य की आपराधिक कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जाँच की मांग जरुरी बताई जाती | सूत्रों के मुताबिक,महासमुंद फैमिली कोर्ट के जज और उनके साथ हुए विवाद के दौरान भी ऐसी ही कार्यप्रणाली सामने आई,जब आधी रात एक कथित प्रॉपर्टी डीलर के फ़ोन कॉल के उपरांत सब कुछ जानते-बुझते हुए बगैर कोई वैधानिक प्रक्रिया के पालन किए ही   तत्कालीन सरकंडा थाना प्रभारी प्रदीप आर्य ने  न्यायिक अधिकारी के खिलाफ सीधे नामज़द FIR दर्ज कर दी थी | 

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यह भी बताया जाता है,कि जांजगीर चांपा जिले में पदस्थ रहे  प्रदीप आर्य के खिलाफ एक महिला पुलिस अधिकारी ने  पिछले 6 वर्ष से लगातार दुष्कर्म करने और शादी से मुकर जाने के चलते बलात्कार का मामला दर्ज कराया था |लेकिन,ऊंची राजनैतिक पहुँच और कानूनी दांव-पेंचों में माहिर प्रदीप आर्य की क़वायतों के चलते मामला पहले पुलिस महकमे के विभागीय स्तर तक और अब अदालतीय कार्यवाही में वर्षों से लंबित बताया जाता है |फ़िलहाल,थाना प्रभारी प्रदीप आर्य को विभागीय स्तर पर मिल रहा अनुचित संरक्षण का मामला सुर्ख़ियों में है | पुलिस कर्मियों के द्वारा बेजा कानूनी इस्तेमाल करने से जुड़े इस प्रकरण को न्यायपालिका पर  हमले के तौर पर देखा जा रहा है |

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