रायपुर/दिल्ली : महादेव ऐप के किरदारों का देश-विदेश खासतौर पर दुबई में खेल खत्म हो गया है ? माना जा रहा है,कि सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के बाद शेष फरार आरोपी भी जल्द ही भारत का रुख कर सकते है | उनकी स्वदेश वापसी को लेकर एजेंसियां अलर्ट मोड़ पर बताई जाती है,लेकिन उन आईपीएस अफसरों का क्या होगा ? जिनके ठिकानों पर सीबीआई ने छापेमारी की थी | क्या ऐसे दागी अफसरों पर एजेंसियां मेहरबान है ? या फिर अब उनकी भी बारी आ गई है | 

इस मुद्दे पर छत्तीसगढ़ में माथापच्ची जोरों पर है | छत्तीसगढ़ में दर्जन भर से ज्यादा उन पुलिस अफसरों का क्या होगा ? जिन्होंने  सट्टा कारोबार पर अंकुश लगाने के बजाए  वर्दी की आड़ में महादेव एप्प ऑनलाइन सट्टा कारोबार के पैनल गांव-गांव और गली-गली स्थापित कर हर माह करोड़ों की आमदनी की थी | ऐसे पुलिस अफसरों के मंसूबों पर ED ने लगाम लगाने की कोशिशें की लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिल पाई | 

बताते है,कि 2005 बैच के आईपीएस शेख़ आरिफ के करीबी एजेंसियों में तैनात कुछ ''बैचमेट'' ने ED की वैधानिक कार्यवाही पर ही लगाम लगा दी थी | इसके बाद उन अधिकारियों के ठिकानों पर सीबीआई ने भी साल भर पहले छापेमारी की थी | लेकिन,प्रभावशील अफसरों का बाल भी बांका नहीं हुआ,अब जबकि,दुबई से धरे गए दोनों मुख्य आरोपियों से पूछताछ शुरू हो चुकी है,ऐसे में छत्तीसगढ़ कैडर के आईपीएस अधिकारियों समेत अन्य अधिकारियों को लेकर सीबीआई की कार्यवाही आखिर क्यों अछूती है ? इसे लेकर माथापच्ची जोरों पर बताई जाती है | 10 हज़ार करोड़ के महादेव एप्प ऑनलाइन सट्टा घोटाले में शामिल  एक आरोपी आया,अब दूसरा भी आएगा ? जैसा जुमला इन दिनों लोगों की जुबान पर है | 

यह भी पढ़े : महादेव बेटिंग ऐप के धुरंधरों का "घर वापसी अभियान" ! सेटिंग या संयोग ? CBI का फिर धमाका, एक के साथ एक ''फ्री'' की तर्ज पर रवि उप्पल को रायपुर लाने की कवायद शुरू...

इस रहस्य से भी अचानक पर्दा हट गया है,कि दुबई में सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल का काला बाजार अब ''मंदी'' के दौर में पहुँच चुका है | सौरभ चंद्राकर के सीबीआई के हत्थे चढ़ने के बाद अब महादेव बेटिंग ऐप के ''को-फाउंडर'' रवि उप्पल को भारत लाने की तैयारी तेज हो गई है | इसके लिए केंद्रीय गृह और विदेश मंत्रालय समेत इंटरपोल ने अपनी प्रक्रिया शुरू कर दी है,दावा किया जा रहा है,कि सौरभ चंद्राकर की 8 दिनों की सीबीआई रिमांड ख़त्म होने से पूर्व रवि उप्पल रायपुर स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में नज़र आ सकता है ? एजेंसियों ने इस सिलसिले में वैधानिक प्रक्रियाओं को अमल में लाना शुरू कर दिया है |

यह भी पढ़े : सौरभ चंद्राकर को दिल्ली ले गई CBI ,8 दिनों की रिमांड,पूर्व मुख्यमंत्री समेत आधा दर्ज़न IPS अधिकारियों पर कस सकता है शिकंजा ?

 सौरभ चंद्राकर के रायपुर से दिल्ली की उड़ान भरते ही,पूर्व मुख्यमंत्री बघेल गिरोह के ''बेड़े" में भी हलचल तेज़ देखी जा रही है | तस्दीक की जा रही है,कि पूर्व मुख्यमंत्री के गृह नगर भिलाई-दुर्ग में कानून के जानकारों का जुटना शुरू हो गया है,आरोपियों की रणनीति से जुड़ी इन बैठकों में छत्तीसगढ़ कैडर के उन आईपीएस अधिकारियों की उपस्थिति भी दर्ज़ बताई जाती है,जो देश-प्रदेश में सट्टा कारोबार के संचालन के लिए छत्तीसगढ़ शासन नहीं,बल्कि सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल की ''निजी सेवा" में तैनात थे | इन आईपीएस अधिकारियों के अलावा ASP-DSP और थानेदार स्तर के कई अफसरों की सटोरियों से सांठ-गांठ और कमाई का मामला सुर्ख़ियों में है | तस्दीक की जाती है,कि ऐसे अफसरों ने भी इधर-उधर फैली अपनी नामी-बेनामी संपत्तियों को अचानक ठिकाने लगाना शुरू कर दिया है |

यह भी पढ़े : आखिर किस राह पर चल पड़े अमित जोगी ? FIR दर्ज़, 'ज्ञानू-जानू की शादी और हनीमून' समेत कई वीडियो सुर्ख़ियों में...

सूत्र दावा करते है,कि 2005 बैच के आईपीएस शेख आरिफ,2007 बैच के प्रशांत अग्रवाल और 2001 बैच के आईपीएस आनंद छाबड़ा ने अपने-अपने '' चार्टर्ड अकाउंटेंट"(CA) के जरिये नामी-बेनामी संपत्ति को वैधानिक दायरे में लाए लाने की कवायतों को हाल ही के महीनों में ''अमली जामा'' पहनाया है,ऐसी संपत्तियों को वैधानिक करार देने के लिए दस्तावेजों में भारी हेर-फेर किया गया है | 

 यह भी बताया जाता है,कि पुलिस महकमे के भीतर महादेव बेटिंग एप्प कारोबार संचालन और इसके विस्तार के लिए ''पैनल'' मुहैया कराने वाले पुलिस अधिकारियों ने सीबीआई की पूर्व में पेश की गई,चार्जशीट का बारीकी से अध्ययन करना भी शुरू कर दिया है | अदालत में विभिन्न आरोपियों के खिलाफ जांच एजेंसियों द्वारा अब तक पेश  की गई चार्जशीट में ना तो,पुलिस के सटोरिए अफसरों का कोई ब्यौरा शामिल किया गया है,और ना ही इन दागी पुलिस कर्मियों के ठिकानों में सीबीआई छापेमारी का उल्लेख किया गया है | ऐसे में एजेंसी के रुख़ को लेकर भी पूर्व मुख्यमंत्री बघेल गिरोह के "बेड़े" में बेचैनी बनी हुई है | 

यह भी पढ़े : ‘युवा चाचा चौधरी’ ने कैसे दी CM विष्णुदेव साय को पटखनी ? सोशल मीडिया बाजीगरी में मुख्यमंत्री भी पीछे,पछाड़ा ऐसे...

यह भी बताया जाता है,कि बेटिंग एप्प से आकुत (बेहिसाब) संपत्ति अर्जित करने के उपरांत दागी अफसरों ने महकमे के भीतर ख़ुद को निर्दोष साबित करने के लिए अपनी-अपनी गोपनीय चरित्रावली (CR ) भी अपने अनुसार ''ग्रेड-A'' में दर्ज़ कराई है,इसके लिए कुछ प्रभावशील अधिकारियों को ''मोटी रक़म'' के भुगतान की चर्चा जोरों पर है | तस्दीक की जाती है,कि वर्दी में सट्टे की रोकथाम करने के बजाए दागी अफसर सटोरियों से ''सांठ-गांठ'' कर कांग्रेस कार्यकाल के पूरे 5 बरस तक अपनी तिजोरियाँ भरते रहे | सट्टे की कमाई पर आश्रित इन अफसरों की गोपनीय चरित्रावली (CR ) में काले कारनामों का उल्लेख ना किए जाने का मामला गंभीर अपराध के दायरे में बताया जा रहा है 

सत्ताधारी दल बीजेपी ने तो बाकायदा अपने पार्टी घोषणा पत्र में दागी पुलिस अफसरों की तस्वीरें तक सांझा की थी,इन्हे सबक सिखाने का वादा भी किया गया था | बीजेपी के सत्ता में आने के लगभग 3 साल पूरे हो रहे है,लेकिन राज्य सरकार ने दागी पुलिस अफसरों के साथ कोई वैधानिक कार्यवाही नहीं की ? यहाँ तक की,सीबीआई की छापेमारी के बावजूद पुलिस मुख्यालय ने संदेही अफसरों को "कारण बताओ" नोटिस तक जारी नहीं किया | ऐसे में महादेव एप्प सट्टा घोटाले के असली धुरंधरों की गिरफ्तारी की मांग भी शुरू हो गई है | बताते है,कि बीजेपी के कई नेताओं ने अपने वरिष्ठों को 3 साल पहले जारी हुए पार्टी घोषणा पत्र के बिंदुओं से अवगत कराना शुरू कर दिया है | 

यह भी पढ़े : जूस के धंधे से लेकर अरबों का महादेव एप्प ऑनलाइन सट्टे तक का सफ़र,अब किस-किस का जूस निकालेगा सौरभ चंद्राकर ?

महादेव एप्प ऑनलाइन सट्टा कारोबार के सिलसिले में सीबीआई के धर-पकड़ अभियान ने अचानक जोर पकड़ लिया है,दिवाली धमाके की तर्ज़ पर एजेंसी को महादेव बेटिंग एप्प के तमाम धुरंधर हाथों-हाथ मुहैया हो रहे है | बताते है,कि सौरभ चंद्राकर से जारी पूछताछ के दौरान बेटिंग एप्प के ''को-फाउंडर रवि उप्पल'' को दुबई से गिरफ्तार करने में एजेंसी को बड़ी कामयाबी मिली है,आसार जाहिर किए जा रहे है,कि "घर वापसी अभियान" के तहत जांच एजेंसियों ने बेटिंग एप्प के तमाम धुरंधरों को अपनी गिरफ़्त में लेना शुरू कर दिया है |