राजधानी रायपुर में सराफा कारोबारी कार्तिक गिरि एक वायरल वीडियो को लेकर चर्चा में हैं। जेवर महल के संचालक कार्तिक गिरि के बताए जा रहे लग्जरी कारों के काफिले को पुलिस की पायलटिंग मिलने और काफिले में शामिल बाउंसरों की स्टंटबाजी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

कार्तिक गिरि के लग्जरी कारों के काफिले में सबसे आगे पुलिस की सफेद स्कॉर्पियो तैनात थी, जबकि पीछे चल रही महंगी गाड़ियों में सवार निजी बाउंसर चलती कारों की खिड़कियों से बाहर लटककर अपनी दबंगई का प्रदर्शन करते नजर आए। सड़क पर इस तरह का शक्ति प्रदर्शन न सिर्फ यातायात नियमों को चुनौती देता है, बल्कि दूसरे वाहन चालकों और राहगीरों की सुरक्षा को भी गंभीर खतरे में डालता है।

इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक निजी कारोबारी के काफिले को पुलिस एस्कॉर्ट किसके आदेश पर दिया गया? क्या इसके लिए सुरक्षा संबंधी खतरे का आकलन और सक्षम अधिकारी की अनुमति ली गई थी? वहीं, पुलिस की मौजूदगी में बाउंसरों की स्टंटबाजी पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? आम नागरिकों के छोटे-छोटे यातायात उल्लंघनों पर चालान काटने वाली पुलिस के सामने इस तरह की घटना ने दोहरे मापदंड की बहस छेड़ दी है।

अब सोशल मीडिया पर लोग पुलिस कमिश्नरेट से जवाब और पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।