रायपुर/दिल्ली : देश-विदेश में महादेव सट्टा एप्प की लॉन्चिंग में छत्तीसगढ़ कैडर के लगभग आधा दर्जन आईपीएस अधिकारियों की काली करतूतों को लेकर सीबीआई का उन पर कसेगा शिकंजा ? या फिर CBI की छापेमारी के बावजूद झूठ-फ़रेब और ऊँची पहुँच से बच निकले,छत्तीसगढ़ कैडर के आईपीएस अधिकारियों को पूर्व की तर्ज़ पर बच निकलने का मिलेगा मौका ? सौरभ चंद्राकर की गिरफ़्तारी से राजनैतिक गलियारा गरमाया हुआ है | इसके साथ ही,आधा दर्जन IPS के कथित कनेक्शन पर सवाल पर सवाल खड़े हो रहे है ?
महादेव ऐप ऑनलाइन सट्टा की लॉन्चिंग में छत्तीसगढ़ कैडर के लगभग आधा दर्जन IPS शामिल बताए जाते है | उनके खिलाफ ED के पास पुख़्ता सबूत भी मौजूद बताए जाते है | हालाँकि,इन अधिकारियों के ठिकानों पर CBI ने छापेमारी भी की थी,लेकिन ऊँची पहुँच और केंद्रीय एजेंसियों में अपने "बैचमेट" की सहायता से ये अधिकारी पूरी बेफिक्री के साथ "मौज-मस्ती'' और सरकारी सेवा में जुटे थे,लेकिनसौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी से इन अफसरों की बेचैनी बढ़ा दी है |
बताया जाता है,कि सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी से उन IPS अधिकारियों समेत ASP,DSP,CSP और थानेदारों की हलचल तेज़ हो गई है,जिन्हें CBI की छापेमारी में क्लीन चिट मिलने का दावा किया जा रहा था |बताया जाता है,कि महादेव ऑनलाइन सट्टा एप्प की अब तक की विवेचना में ऐसे दागी अफसर राहत प्राप्त करने में कामयाब रहे है,एजेंसी द्वारा अदालत में प्रस्तुत अब तक की चार्जशीट में उन IPS अधिकारियों की काली करतूतों का कोई ''जिक्र एवं तथ्य" शामिल नहीं बताया जाता है,जिनके ठिकानों पर सीबीआई ने छापेमारी की थी |
तस्दीक की जाती है,कि पूर्व मुख्यमंत्री "भू-PAY" बघेल की अगुवाई में पुलिस महकमे के भीतर सट्टेबाज़ी पर प्रभावी रोक लगाने के बजाए लगभग आधा दर्जन आईपीएस अधिकारी अपने विश्वासपात्र पुलिस अफसरों के साथ मिलकर "महादेव एप्प ऑनलाइन सट्टा" कारोबार में अपनी हिस्सेदारी तय कर,हर माह करोड़ों की कमाई कर रहे थे | इस दौरान दोहरे प्रभार IG रायपुर रेंज और प्रभारी IG ख़ुफ़िया शाखा के प्रमुख होने के नाते 2001 बैच के आईपीएस आनंद छाबड़ा को प्रति माह 30-30 लाख रूपये,कारोबार को संरक्षण देने के एवज में प्रदान किए जाते थे | इसी तर्ज पर अन्य आईपीएस अधिकारियों (जिलों के SSP और SP) को प्रति माह 50 लाख की रकम महीना ख़त्म होते ही सौंप दी जाती थी |
आनंद छाबड़ा की लूटमार कार्यप्रणाली के अलावा ED और CBI की जासूसी का मामला भी काफी गंभीर बताया जाता है | ED ने इस IPS अधिकारी की काली करतूतों का ब्यौरा अपने रिकॉर्ड में दर्ज किया है | सूत्र तस्दीक करते है,कि रायपुर के एक मेटरनिटी नर्सिंग होम (डॉक्टर दल्ला ) में छापेमारी के दौरान जप्त की गई करोडो की रकम आनंद छाबड़ा की थी | यही नहीं,बतौर ख़ुफ़िया प्रमुख रहते,इस अधिकारी ने "पुलिस मुख्यालय" में स्थापित विभिन्न ख़ुफ़िया एप्प और नेटवर्क का इस्तेमाल,केंद्रीय जाँच एजेंसियों की वैधानिक कार्यवाही की हवा निकालने के लिए किया गया |
यह भी बताया जाता है,कि ED-CBI की पकड़ से बचने के लिए आनंद छाबड़ा,प्रशांत अग्रवाल और शेख़ आरिफ ने तत्कालीन मुख्यमंत्री के आवास और कार्यालय में इंस्टॉल किए गए,विभिन्न CCTV कैमरे,लैपटॉप-कंप्यूटर और आवाजाही के सरकारी रिकॉर्ड भी नष्ट कर दिए थे | सूत्रों का दावा है,कि महादेव एप्प सट्टा कारोबार से इन दागी अफसरों ने मात्र 3 साल में अपने नाते-रिश्तेदारों और करीबियों के नाम 800 करोड़ से ज्यादा की काली कमाई कर देश-विदेश में ठिकाने लगाया है | शेख़ आरिफ समेत इन तमाम आईपीएस अफसरों की कार्यप्रणाली उच्च स्तरीय जाँच के दायरे में बताई जाती है |
ED के हत्थे चढ़े ASI चंद्रभूषण वर्मा ने अपने बयानों और सौंपे गए ब्यौरे में एजेंसी को बताया था,कि वे हर माह तत्कालीन मुख्यमंत्री भू-PAY बघेल और उनके सलाहकार विनोद वर्मा समेत 2013 बैच के आईपीएस अभिषेक पल्लव,2007 बैच के प्रशांत अग्रवाल,2001 बैच आनंद छाबड़ा और 2005 बैच के आईपीएस आरिफ शेख के घरों पर (रायपुर और भिलाई-दुर्ग क्षेत्र में) हर माह नगदी सौंपी थी | पुलिस अधिकारी चंद्रभूषण वर्मा ने एजेंसी को यह भी साफ़ किया था,कि यह रकम महादेव एप्प ऑनलाइन सट्टा को प्रोटेक्शन देने के एवज में ''दुबई'' से प्राप्त निर्देशों के तहत प्रदान की जाती थी |
इन अधिकारियों के ठिकानों में भी हुई CBI की छापेमारी:-
आईपीएस अधिकारियों के अलावा राज्य पुलिस सेवा के एएसपी (ASP) व अन्य पुलिस अधिकारियों के ठिकानों को भी सीबीआई ने अपनी जद में लिया था | इनमें एएसपी संजय ध्रुव, एएसपी अभिषेक माहेश्वरी और सिपाही नकुल-सहदेव के ठिकानों पर छापेमारी की गई थी । इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री के अन्य राजनीतिक और कारोबारी लोगों के परिसरों और बंगलों में एजेंसी की टीम ने दस्तक दी थी | इनमे भिलाई के विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व सीएम के सलाहकार विनोद वर्मा, ओएसडी आशीष वर्मा, मनीष बंछोर और पूर्व उप-सचिव सौम्या चौरसिया के ठिकाने इस फेहरिस्त में शामिल बताए जाते है |
साल 2023 के दौरान विभिन्न चरणों में ईडी ने ऐप से जुड़े अन्य आरोपियों और सहयोगियों के यहां भी छत्तीसगढ़ व अन्य राज्यों में दबिश दी थी। जबकि,सीबीआई ने छत्तीसगढ़ के कई शहरों (मुख्यतः रायपुर और भिलाई/दुर्ग) में करीब 20 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर सटोरियों पर गाज गिराई थी | पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के रायपुर और भिलाई स्थित आवास पर भी छापेमारी के दौरान लाखों की रकम और दस्तावेज जप्त किए गए थे | लेकिन,मामला ठंडे बस्ते में चला गया था,हालाँकि अब सौरभ चंद्राकर की गिरफ़्तारी के साथ ही,कई रहस्यों पर से पर्दा हटने की संभावना जताई जा रही है |
छत्तीसगढ़ में महादेव ऐप और IPS कनेक्शन पर कई सवाल उठ रहे है,जानकारी के मुताबिक,ऊंची राजनैतिक पहुंच और आईपीएस बैचमेट की जोड़-तोड़ से छत्तीसगढ़ कैडर के तमाम दागी आईपीएस बच निकलने में कामयाब बताए जाते है |
सट्टेबाज़ी के इस खेल में राज्य की ''ACB-EOW'' ने FIR तो दर्ज की लेकिन,सटोरिए आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज नहीं की अलबत्ता तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल वल्द नंदलाल बघेल को नामज़द आरोपी बनाया गया,जबकि अन्य (अज्ञात) पर प्राथमिक अपराध रिपोर्ट को सीमित कर दिया गया था |
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सवाल उठ रहा है,कि इन आईपीएस के अलावा महादेव सट्टा पैनल के पीछे कौन-कौन राजनैतिक छवि के सटोरिए शामिल है ?सौरभ चंद्राकर को सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किए जाने की तैयारी अंतिम चरणों में बताई जाती है | फ़िलहाल,छत्तीसगढ़ में मंगलवार का दिन गहमा-गहमी के बीच गुजरने के आसार अभी से नज़र आ रहे है |
