दिल्ली : - छत्तीसगढ़ में बिजली वितरण कंपनी ( CSPDCL ) के एकमुश्त 1193 करोड़ के टेंडर को लेकर बवाल मच गया है, मामले की शिकायत लेकर दिल्ली पहुंचे एक प्रतिनिधि मंडल ने पीएमओ में शिकायत कर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जाँच की मांग की है। RTI कार्यकर्त्ताओ और व्हिसलब्लोवर के एक प्रतिनिधिमंडल को उस समय निराशा हाथ लगी जब व्यस्त दौरों के मद्देनजर आम लोगो से PM की मेल -मुलाकात का कार्यक्रम टाल दिया गया। हालांकि, प्रधानमंत्री से मुलाकात की क़वायतो में जुटे इस प्रतिनिधि मंडल ने पीएमओ को ज्ञापन सौंप कर संतोष जाहिर किया। यहाँ पत्रकारों से रूबरू होते हुए शिकायतकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ बिजली वितरण कंपनी मैनेजमेंट और उसके अफसरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाये। उन्होने CSPDCL के 1193 करोड़ के ठेकों की टेंडर - निविदा प्रक्रिया पर सवालों की बौछार लगा दी। टेंडर पर मचे घमासान को लेकर एकीकृत एकल टेंडर - निविदा में भारी भ्रष्टाचार और विभागीय '' सेटिंग'' का आरोप लगाते हुए, इसे फ़ौरन निरस्त करने की मांग की गई है।

जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) द्वारा प्रदेश में विद्युत नेटवर्क की बहाली, रखरखाव, ट्रांसफार्मर की मरम्मत और फ्यूज ऑफ कॉल (FOC) सेंटरों के संचालन के लिए एकमुश्त करोडो के टेंडर जारी किए है, इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है। तस्दीक की जा रही है कि एक कंपनी विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए इस टेंडर की ख़ास शर्तो के चलते राज्य के सैकड़ो स्थानीय निम्न और मध्यम श्रेणी के ठेकेदारों को प्रतियोगिता से बाहर कर दिया गया है। यह भी बताया जाता है कि CSPDCL में निम्न और मध्यम श्रेणी के ठेकेदार पिछले कई वर्षो से विभिन्न पावर प्रोजेक्ट में कार्यरत है, उनके पास टेक्नीशियनों से लेकर मजदूरों की भारी - भरकम फौज भी कार्यरत है। लेकिन स्थानीय ठेकेदारों को प्रतियोगिता से बाहर का रास्ता दिखाने के लिए टेंडर - निविदा में ऐसी शर्ते लाद दी गई है, जो कम्पनी विशेष के हितों का संरक्षण कर रही है।
पीएमओ को सम्बोधित शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ में इसके पूर्व जिला और संभाग स्तर पर अलग-अलग टेंडर - निविदा जारी की जाती थी। इससे स्थानीय ठेकेदारों और मजदूरों को सीधा रोजगार प्राप्त होता था। लेकिन इस बार CSPDCL मैनेजमेंट ने छोटी-छोटी कम बजट वाली टेंडर - निविदाओं को एक साथ मिलाकर राज्य स्तर पर एकमुश्त हजार करोड़ से ज्यादा का विशाल एकीकृत टेंडर (Integrated Single Tender) जारी किया है। इससे छत्तीसगढ़ के बजाय बाहरी राज्यों की कंपनियों को बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। उनके मुताबिक टेंडर - निविदा में कई ऐसी मनमानी शर्ते जोड़ दी गई है, जो साफ़ कर रही है कि यह एकमुश्त टेंडर खास कम्पनी विशेष को बेजा फायदा पहुंचाने का षड्यंत्र मात्र है। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी बताया कि वे अपनी शिकायत लेकर राज्य के मुख्यमंत्री सचिवालय, ऊर्जा विभाग सचिव और मुख्य अभियंता से भी गुहार लगा चुके है, लेकिन उनकी शिकायतों को दरकिनार कर दिया गया।
रायपुर से दिल्ली पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने साफ़ किया कि हजारों -करोड़ के एकमुश्त इस बड़े टेंडर - निविदा की कठोर और उच्च वित्तीय पात्रता शर्तों (High Turnover Criteria) के कारण राज्य के लगभग 1,000 से अधिक मूल निवासी ठेकेदार इस बार प्रतियोगीयता प्रक्रिया से ही बाहर हो गए हैं। जबकि ''मोटा कमीशन'' चुकाने का संकल्प लेकर मैदान में कूदी विशेष कम्पनिया कई गुना अधिक लाभ और गुणवत्ताविहीन कार्य के लिए अपनी तैयारियों में जुट गई है। शिकायतकर्ताओं की दलील है कि यह निविदा प्रक्रिया राज्य से बाहर की बड़ी कंपनियों (External Bidders) को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसके चलते छत्तीसगढ़ के स्थानीय तकनीकी युवाओं और ठेकेदारों को अपनी ही जमीन पर रोजगारविहीन स्थिति का सामना करना पड़ेगा ।
टेंडर - निविदा की शर्तो को आपत्तिजनक करार देते हुए शिकायतकर्ताओं ने 33/11 KV उपकेंद्रों को बाहर करने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रक्रियागत विसंगतियों (Procedural Anomaly) से CSPDCL को भारी - भरकम नुकसान की आशंका जाहिर की जा रही है। उनके मुताबिक राज्य में लगभग 1,600 बिजली उपकेंद्र (33/11 KV Substations) संचालित हैं, लेकिन इन्हें इस एकीकृत एकल टेंडर - निविदा के दायरे से बाहर रखा गया है। आरोप है कि मैनेजमेंट में शामिल अफसरों ने राज्य के बाहर के बड़े ठेकेदारों और उनकी कंपनियों के हितों को ध्यान में रखकर 33/11 केवी उपकेंद्रों को टेंडर - निविदा प्रक्रिया से ही पृथक कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक विवादित टेंडर - निविदा में विद्युत नेटवर्क के विस्तार और रखरखाव के लिए जारी किए गए टेंडर में अनुबंध (Contract) के तहत पूरे प्रदेश को तीन प्रमुख चरणों (Phases) में बांटा गया है, इसके अंतर्गत कुल 19 सर्किल, 71 संभाग (Divisions) और 537 वितरण केंद्र (Distribution Centers) शामिल किए गए हैं, इसमें कुल 25,830 किमी लंबी 33 केवी लाइन, 1,44,708 किमी लंबी 11 केवी लाइन और 2,42,932 किमी एलटी लाइन के रखरखाव का दावा किया गया है। इसके अलावा, लगभग 2,48,067 वितरण ट्रांसफार्मर (DT) और करीब 64.95 लाख उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत सेवाएं प्रदान करने का दावा भी किया गया है।
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जानकारों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में बिजली की आपूर्ति के लिए विद्युत वितरण प्रणाली में 11 केवी और 33 केवी लाइनों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग, परमिट जारी करने और लाइन बंद/चालू (Shutdown) करने का मुख्य नियंत्रण इन्हीं सब-स्टेशनों से होता है, ऐसे में एकमुश्त टेंडर जारी होने से विद्युत वितरण व्यवस्था में विपरीत असर पड़ने के आसार भी बढ़ गए है। जानकार सवाल कर रहे है कि 3-4 अलग-अलग ठेकेदार एक ही केंद्र से समन्वय बनाकर काम कैसे करेंगे? उन्हें अंदेशा है कि नई प्रक्रिया से भविष्य में तकनीकी खामियां, गड़बड़ी और बिजली हादसों का खतरा बढ़ जाएगा ? उनकी दलील है कि पुरानी व्यवस्था (Old Decentralized System) को बहाल करते हुए जिला और सर्किल स्तर पर पारदर्शी तरीके से छोटे - छोटे कम बजट वाले टेंडर जारी किए जाएं, ताकि स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था सुरक्षित रह सके।उनकी मांग कि 1193 करोड़ रुपये के इस एकीकृत टेंडर को तत्काल प्रभाव से निरस्त (Cancel) किया जाए। उधर, जारी टेंडर को लेकर CSPDCL की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है।

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