प्रयागराज : - उत्तर प्रदेश में चुनाव पूर्व काले धन की खेप से राजनीतिक गलियारा गरमाया हुआ है। नवाबगंज के बरईपुर रामनगर गांव स्थित एक घर से तीन ड्रम में मिले करोड़ों रुपये किसके हैं और यहां कैसे आए? इस पर रहस्य अब तक गहराया हुआ है। आखिर करोड़ों की यह रकम किसकी है ? तस्वीर दूसरे दिन भी साफ नहीं हो सकी है। पुलिस का दावा है कि मकान मालिक राजेश उर्फ बबलू और उसके भाई राकेश ने पूछताछ में कहा कि बरामद रकम उनकी नहीं है। इसके साथ ही बरामद रकम के श्रोतों को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।उधर, गुरुवार रात आयकर विभाग की टीम ने मौंके का जायजा लेकर अपनी जाँच शुरू कर दी है। सहायक आयुक्त की अगुवाई में छह सदस्यीय टीम ने गाँव में कई लोगो से पूछताछ की है। इस टीम ने रात में ही मकान समेत अन्य संभावित स्थानों पर सर्च आपरेशन चलाने और ड्रम में रखे पैसों की गिनती मशीन से किए जाने की बात कही है। वहीं, पुलिस की टीम सगे भाई और परिवार के सदस्यों से पूछताछ करती रही, लेकिन इतनी बड़ी रकम को लेकर पुलिस कोई सुराग नहीं जुटा सकी है। इसी बीच ग्रामीणों में मकान से 60 करोड़ रुपये मिलने की चर्चा होती रही। पुलिस ने मकान मालिक भाइयों समेत चार लोगों को उठाकर पहले पूछताछ शुरू की। इसके बाद परिवार के सदस्यों से भी रकम के बारे में पूछा गया, लेकिन कोई कुछ नहीं बताया। 

पूछताछ के दौरान राकेश व राजेश ने कहा कि ड्रम में बरामद रुपये उनके नहीं हैं। इससे बड़ा सवाल यह उठा कि आखिरकार इतनी बड़ी रकम किसकी है, कहां से लाई गई है और किस उद्देश्य के चलते छिपाकर रखी गई थी? फिलहाल अब इस मामले में लोगों की निगाह आयकर विभाग पर टिकी है। नोटों की पूरी गिनती होने के बाद साफ होगा कि बरामद रकम कितनी है? ग्रामीणों के मुताबिक, बरईपुर रामनगर निवासी राजेश यादव करीब 15 साल पहले मुंबई गया था। वहां एक कंपनी में काम करने की बात बताता था। इसके बाद पुणे गया और आभूषण दुकान में नौकरी करने की बात बताई। कोरोना काल के दौरान वह परिवार समेत गांव लौटा। इसके बाद इसके बाद दादनपुर, मुबारकपुर, मेंडारा और शांतिपुरम में लाखों रुपये की जमीन, ट्रैक्टर-ट्राली, पिकअप खरीदी। उसने दूसरे गांव में भी जमीन खरीदकर शानदार मकान बनवाया। करोड़ों रुपये की प्रापर्टी बनाने पर ग्रामीण उससे पूछते तो साफ तौर पर कुछ नहीं बताता था। नवाबगंज थाने में आठ दिन पहले राजेश उर्फ बबलू, उसके भाई लवकुश, रजनीश उर्फ छोटू, राज व अमर यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। रिपोर्ट बरईपुर रामनगर निवासी अभिषेक कुमार ने दर्ज कराई थी। अभिषेक का आरोप है कि उसका छोटा भाई 15 माह की बच्ची आरू को लेकर दवा के लिए जा रहा था। तभी राजेश समेत अन्य लोगों ने गाड़ी में टक्कर मार दी। विरोध पर विपक्षी गाली-गलौज करने लगे और मारपीट की, जिससे भाई व बच्ची चोटिल हो गई। तब हमलावरों ने जान से मारने की धमकी भी दी थी। ग्रामीणों चर्चा है कि इस घटना के बाद ही जांच कर रही पुलिस को बबलू और उसके भाई के घर रखी नकदी के बारे में जानकारी मिली थी। हालांकि झगड़ा और पैसे के कनेक्शन को लेकर पुलिस कुछ नहीं कह रही है।

दीपावली के मद्देनजर गंगानगर जोन में नकबजनी को लेकर पुलिस ने अभियान शुरू किया। सक्रिय अपराधियों और उनकी गतिविधियों का पता लगाया जा रहा था, तभी बुधवार को पुलिस को पता चला कि राजेश और राकेश ने अपने मकान में करोड़़ों रुपये छिपाकर रखे हैं। तब एडीसीपी पुष्कर वर्मा, एसीपी श्यामजीत प्रमिला सिंह ने कई थाने की पुलिस के साथ राजेश और उसके भाई राकेश के मकान में छापेमारी कर रकम बरामद की है। पुलिस ने मकान के भीतर जमीन खोदकर रखे गए तीन प्लास्टिक के ड्रम को बाहर निकाला। उसे खोलकर देखा तो तीनों ड्रम में पांच-पांच सौ रुपये नोट की गड्डी भरी हुई थी। पुलिस ने बरामद रकम को थाने के मालखाने में रखवाते हुए आयकर सहित अन्य विभागों को जानकारी दी।  उधर न्यूज़ टुडे इंडिया से चर्चा करते हुए डीसीपी गंगानगर सोनम कुमार, ने कहा कि प्राथमिक जांच में साइबर या दूसरे अपराध से संबंधित रक़म होने की बात सामने नहीं आई है। पूछताछ में मकान मालिक ने खुद का पैसा होने की बात से इन्कार किया है। उनके मुताबिक प्रथम दृष्टया आय से अधिक संपत्ति का मामला लग रहा है, पूरे मामले की जांच आयकर विभाग को दे दी गई है।