नवरात्रि में महाअष्टमी और महानवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु कन्याओं को घर बुलाकर उनका तिलक करते हैं, पैर धोते हैं और हलवा-पूरी व काले चने का प्रसाद खिलाते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से कन्या पूजन करने से माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। लेकिन पूजा के दौरान कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक है। परंपरा के अनुसार, नौ कन्याओं के साथ एक छोटे बालक यानी बटुक भैरव को भोजन कराने का भी विधान है। यदि नौ कन्याएं उपलब्ध न हों, तो अपनी श्रद्धा और सुविधानुसार कम कन्याओं का पूजन भी किया जा सकता है।

कन्या पूजन के लिए सबसे पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ-सफाई करें और मां दुर्गा को तैयार प्रसाद का भोग लगाएं। इसके बाद कन्याओं का सम्मानपूर्वक स्वागत कर उन्हें स्वच्छ आसन पर बैठाएं और रोली-अक्षत से तिलक करें। कन्याओं को खिलाए जाने वाले भोजन में सात्विकता का विशेष ध्यान रखें। हलवा, पूरी, काले चने और खीर जैसे पकवान पारंपरिक रूप से बनाए जाते हैं, जिनमें प्याज-लहसुन का इस्तेमाल नहीं किया जाता। भोजन के बाद कन्याओं को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा या उपहार देकर सम्मानपूर्वक विदा करें। धार्मिक मान्यताओं में कन्या पूजन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि नारी शक्ति के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट करने का भी माध्यम है।