रायपुर : - क्या अफसर दारू पीकर कर रहे सीएम हेल्पलाइन का संचालन ? ये हम नहीं कह रहे बल्कि ये वो प्रतिक्रियाएं है, जो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सीएम हेल्पलाइन को लेकर सोशल मीडिया में वायरल है। दरअसल प्रदेश की आम जनता की शिकवा - शिकायतों के निराकरण के लिए छत्तीसगढ़ में हेल्पलाइन पोर्टल सुर्खियों में है। पीड़ितों की मदद के लिए सीएम हेल्पलाइन को प्रदेश सरकार के संवेदनशील क्रांतिकारी कदम के रूप में जाना -पहचाना जाने लगा है। हेल्पलाइन पोर्टल पीड़ितों के लिए वरदान साबित हो रही है, कई घर -परिवारों से लेकर सामान्य संस्थाओं तक सीएम हेल्पलाइन ने लोगो को भारी राहत प्रदान की है। लेकिन अपवाद स्वरुप कुछ ऐसे मामले भी सामने आ रहे है, जिसे देखकर किसी का भी माथा सन्न हो जाये ? ऐसे ही एक प्रकरण में सीएम हेल्पलाइन का पत्र, सोशल मीडिया में वायरल है, इस पत्र ने पीड़ितों के गलियारे में जहाँ खलबली मचा दी है, वही सीएम हेल्पलाइन पोर्टल में पत्राचार और शिकवा - शिकयतों के निपटारे को लेकर भी सवालियां निशान खड़ा हो गया है। सीएम हेल्पलाइन पोर्टल में की गई शिकायत और उसके निराकरण का ''फार्मूला'' देख सुनकर आपके पैरो तले भी जमीन खिसक जाएगी ?
सीएम हेल्पलाइन के इस पत्र का क्या मतलब निकाला जाए ? इबारत पढ़ तक लोग हैरानी जता रहे है, यह सरकारी पत्र प्रदेश के नगरीय प्रशासन विभाग की निष्क्रियता के नमूने बतौर और सम्बंधित अधिकारी की अयोग्यता की ओर इशारा कर रहा है। कई लोग नगरीय प्रशासन मंत्री की कार्यप्रणाली पर आपत्ति करते हुए साफ़ -साफ़ मान रहे है कि विभागीय जिम्मेदारियों को दरकिनार करने से नगरीय निकायों की हालत खस्ता है। यहाँ क़ायदे -कानून नहीं बल्कि ''सत्ता'' को सिर्फ अपने ''फील गुड'' का साधन मात्र बना लिए जाने से ''जिसकी लाठी उसकी भैस'' जैसी स्थिति निर्मित हो गई है, जनता परेशान है, और अफसर नशे में धुत्त।
प्रकरण को नगरीय निकायों में व्याप्त भर्राशाही से जोड़कर देखा जा रहा है। सत्ता के कर्णधारों के गैर जिम्मेदार पूर्ण रवैये की कलई खोलते इस पत्र को देखकर आप सहज अंदाजा लगा सकते है कि नगरीय निकायों में कायदे -कानूनों को दरकिनार कर कायदे -कानूनों की धज्जियाँ आखिर किस तरह से उड़ाई जा रही है। ''शहर'' की सरकार का क़ानूनी संचालन या अधिकारियों की मनमर्जी ? रायपुर नगर निगम के जोन क्रमांक 10 के अंतर्गत आने वाले इस शिकायती प्रकरण को जानने - बुझने से पूर्व उन इबारतों पर गौर फरमाए, जिस पर सीएम हेल्पलाइन के फरमानों की रूपरेखा तय कर दी गई है। बताते है कि शिकायतों के निपटारे को लेकर जारी इस पत्र में आखिर अधिकारी क्या निर्देशित कर रहे है ? शिकायत क्या है और उसका निराकरण किस तर्ज पर किया गया है ? यह सब कुछ रहस्यमय बना हुआ है। सीएम हेल्पलाइन में शिकायते इस तरह से निपटाई जा रही है ? या फिर शिकायतकर्ताओं को ही निपटा दिया जा रहा है ? इसका फैसला करने से पूर्व इस पत्र और उसकी भाषा पर गौर फ़रमाए।
जानकारी के मुताबिक नगर निगम रायपुर के सम्पत्तिकर की बक़ाया राशि 1 लाख 46 हजार 548 भुगतान के बावजूद सम्बंधित व्यावसायिक प्रतिष्ठान की सीलबंदी खोलने को लेकर पीड़ित पक्षकार ने नगर निगम के अधिकारियों के समक्ष गुहार लगाई थी। दरअसल, निगम द्वारा इस प्रतिष्ठान पर बक़ाया सम्पत्तिकर के भुगतान के सुनिक्षित नहीं होने के चलते दिनांक 5 /10 /2026 को सीलबंदी की कार्यवाही की गई थी। बताया जाता है कि सम्पत्तिकर के भुगतान के बावजूद प्रतिष्ठान में सीलबंदी निरस्त कर यथा स्तिथि निर्मित किये जाने को लेकर ''कर दाता'' ने अधिकारियों से निवेदन किया था। टैक्स के विधिवत भुगतान की लम्बी तिथि बीत जाने के बावजूद सीलबंदी खोलने को लेकर जब निगम कर्मियों की नींद नहीं टूटी तब पीड़ित पक्षकार ने अपनी शिकवा - शिकायतों से सीएम हेल्पलाइन पोर्टल को अवगत कराया। इस दौरान भी पक्षकार ने भुगतान का पूरा ब्यौरा सौंपा और अपनी आपबीती सुनाई। इसके उपरांत जो हुआ, वो कम हैरान करने वाला नहीं है। बताते है कि सीएम हेल्पलाइन पोर्टल से मामले का हल निकाले जाने से सम्बंधित जो पत्राचार किया गया है, वह हैरान करने वाला है।
जानकारी के मुताबिक रायपुर के VIP ROAD स्थित एक होटल के मालिकाना हक़ और लीज एग्रीमेंट से जुड़े मामले से नगर निगम रायपुर का कोई लेना -देना नहीं है, प्रकरण सम्पत्तिकर के भुगतान से जुड़ा बताया जाता है। यह भी बताया जाता है कि इस होटल पर संपत्ति कर की बक़ाया राशि के भुगतान के उपरांत सीलबंदी खोल कर स्तिथि सामान्य किये जाने की उम्मीद को लेकर सीएम हेल्पलाइन पोर्टल में शिकायत की गई थी। इस शिकायत का बड़े ही अजीबो -गरीब तरीके से निराकरण करते हुए जोन क्रमांक 10 के गैर - जिम्मेदार अफसरों ने अब शिकायत को ही सीएम हेल्पलाइन पोर्टल से विलोपित करने की अनुशंसा की है। इस पत्र में उल्लेखित दिलचस्प निपटारा ''दूरभाष '' के माध्यम से चर्चानुसार ? फिर कार्यालय में उपस्थित होकर ? सीलिंग की कार्यवाही से कोई आपत्ति नहीं ? यह शिकायत भूमि स्वामी द्वारा नहीं ? किरायेदार किया गया ? जैसे वाक्यों का क्या अर्थ निकाला जाए ? इस पत्र को देखकर पीड़ित पक्षकार अपना माथा पीठ रहे है।
लेख का मज़मून - ''तत्संबंध'' में लेख है कि से दूरभाष के माध्यम से चर्चानुसार भवन स्वामी श्रीमती सरिता बाजपेयी द्वारा जोन कार्यालय में उपस्थित हो कर आवेदन प्रस्तुत दिनांक 05.10.2026 को उल्लेख किया है कि बकाया राजस्व कर की भुगतान नही कर देती तब तक उक्त संपत्ति को सील रहने दे तथा मैं अपने संपत्ति का उपयोग नहीं करना चाहती हूं एवं भवन स्वामी द्वारा की गई सीलिंग की कार्यवाही से कोई अपत्ती नही है उनके द्वारा 31.03.2027 तक संपूर्ण बकाया कर जमा करने तक उक्त संपत्ति को सील रखने हेतु उल्लेख किया गया है। यह शिकायत भूमि स्वमी द्वारा नही किया गया है किरायेदार किया गया है उपरोक्त शिकायत भवन स्वमी अभ्यवेदननुसार निराधार है। संलग्न आवेदन की छायाप्रति अतः उक्त प्रकरण को जोन क्र. 10 सीएम हेल्पलाईन पोर्टल L1 से विलोपित करने के कष्ट करेगें। फ़िलहाल यह पत्र सोशल मीडिया में वायरल है, नगर निगम के अफसर अपनी मस्ती में है, लेकिन सीएम हेल्पलाइन पोर्टल की साख दांव पर लग रही है, इस पत्र की शब्दावली पढ़ - सुन कर और देखकर यूजर्स तरह - तरह की प्रतिक्रियाएं जाहिर कर रहे है।

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