GEN-Z के सेनेटरी नैपकिन पैड पर 47 करोड़ का दांव ! खास शर्तों से छत्तीसगढ़ के स्वसहायता समूह समेत कई योग्य कंपनियां प्रतियोगिता से बाहर,चहेतों को ठेका दिलाने की रेस तेज…  

रायपुर/दिल्ली : छत्तीसगढ़ में सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से GEN-Z को उच्च गुणवत्तायुक्त सेनेटरी नैपकिन पैड मुहैया कराने की मंशा से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक महती योजना को मंज़ूरी दी है | इसके तहत मुख्यमंत्री साय ने 47 करोड़ रुपए की राशि हाथों-हाथ स्वीकृत भी की है,ताकि स्कूली छात्राओं को समय पर उच्च गुणवत्तायुक्त सेनेटरी नैपकिन पैड उपलब्ध कराया जा सके | राज्य की बीजेपी सरकार ने GEN-Z के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए,इसकी सरकारी सप्लाई की राह भी आसान कर दी थी,ताकि टेंडर-निविदा में प्रतिस्पर्धा के जरिए स्कूली बच्चों को बेहतर सेनेटरी  नैपकिन  पैड मुफ़्त में वितरित किया जा सके | मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा साफ़ है,GEN-Z स्वस्थ रहे,बेहतर वातावरण के साथ उन्हें ऐसा ही सरकारी प्रोत्साहन मिलता रहे | लेकिन,शिक्षा विभाग की योजनाओं में हाथ साफ़ करने में जुटा,ठेकेदारों का एक खास समूह बीजेपी सरकार की इस महती योजना पर पलीता लगाने में जुट गया है |

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक,47 करोड़ के सेनेटरी  नैपकिन  पैड सप्लाई के ठेके से स्वसहायता समूहों को प्रतियोगिता से बाहर कर दिया गया है,प्रदेश में सैंकड़ों  स्वसहायता समूहों में लाखों महिलाएं सक्रिय बताई जाती है,निविदा-टेंडर की ख़ास शर्तों से वे सदमें में बताई जाती है | आर्थिक समृद्धि का यह अवसर  उनके हाथों से बाहर निकल गया है | जबकि,चहेते ठेकेदार को मौका देने के लिए सिर्फ स्वसहायता समूह ही नहीं बल्कि, कई योग्य कंपनियां भी प्रतियोगिता से बाहर हो गई है | यह भी जानकारी सामने आई है,कि चहेतों को ठेका सौंपने के लिए टेंडर-निविदा में कई ऐसे पेंच फंसा दिए गए है,कि किसी ”तुलसियान” नामक उद्योगपति की खास फर्मों को ही सेनेटरी  नैपकिन  पैड आपूर्ति का ठेका दिया जा सके |

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यह भी बताया जाता है,कि ठेकेदार के दिशा-निर्देशों के तहत निविदा-टेंडर की शर्तों में कई ऐसे पेंच फंसाएं गए है,जिससे सिर्फ,”तुलसियान” अधिकृत फर्म ही L-1,L-2 ,L-3, बाज़ी मार सके | यह भी बताया जाता है,कि ”तुलसियान” नामक ठेकेदार,सेनेटरी नैपकिन पैड निर्माता एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर काबिज़ है,लिहाज़ा ऐसी कठिन शर्ते निविदा-टेंडर में शामिल कर दी गई है,जिससे कुछ खास फर्म ही,सप्लाई का ठेका हथिया सके |

“राज दरबारी” ! पढ़िए,छत्तीसगढ़ के राजनैतिक और प्रशासनिक गलियारों की खोज परख-खबर, व्यंग्यात्मक शैली में,लेखक और वरिष्ठ पत्रकार ‘‘राज’’ की कलम से, व्यंग-लेख का मकसद किसी की भी मानहानि नहीं बल्कि कार्यप्रणाली का इज़हार मात्र है…
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जानकारी के मुताबिक,90 दिन के बजाए ग़ैर कानूनी रूप से 180 दिनों की डिमांड ड्राफ्ट की शर्त लाद देने के चलते,टेंडर-निविदा विवादों में है | हालांकि,शिकवा-शिकायतें सामने आने के बाद,विभाग ने इस त्रुटि को सुधारने के लिए ”Corrigendum” ना जारी करते हुए ”EXTENSION” कर  टेंडर-निविदा  खोलने की तिथि 5 दिनों के लिए आगे बढ़ा दी है, लेकिन शेष ”खास शर्तों” को यथावत रखा गया है | इस कारण,प्रदेशभर के सैंकड़ों स्वसहायता समूहों के साथ-साथ कई योग्य कंपनियां  भी प्रतियोगिता से बाहर हो गई है | जानकारी के मुताबिक,अब 28 सितंबर को टेंडर-निविदा खास फ़र्म को उपकृत करने के लिए पिटारे से बाहर निकाली जाएगी ? मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से पीड़ितों ने  मामले को संज्ञान में लेकर वैधानिक दायरे में टेंडर-निविदा नए सिरे से बुलाने की गुहार लगाई है |  

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  यह भी बताया जाता है,कि सेनेटरी नैपकिन के नियम और शर्तें ऐसी रखी गई है,जिससे चुनिंदा फर्म को ही सप्लाई का काम मिल सके। इसके लिए,ब्रीडर का औसतन वार्षिक (3 वर्ष )टर्नओवर 14 करोड़ रुपए एवं निर्माता कंपनी का टर्नओवर 9 करोड़ रखा गया है। इसमें एक शर्त और  जोड़ दी गई है, कि निर्माता कंपनी के पास टेंडर में निर्धारित टर्नओवर के कम से कम 40 प्रतिशत के बराबर सरकारी कार्य का अनुभव होना अनिवार्य है। यह भी बताया जाता है,कि दर्जनों नामी-गिरामी  सेनेटरी  नैपकिन  पैड निर्माण कंपनियां सरकारी आपूर्ति के बजाए,खुले बाज़ार में प्रतिस्पर्धा में है,कुछ कंपनियों का टर्नओवर अधिक होने के बावजूद वे सरकारी टेंडर में हिस्सा नहीं लेती क्योंकि,विभाग में चलनशील कमीशन की “मोटी मांग” की भरपाई उनके बूते की बात नहीं बताई जाती है | 

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GEN-Z का एक बड़ा वर्ग इन कंपनियों के गुणवत्तायुक्त सेनेटरी नैपकिन पैड का इस्तेमाल भी करता है,ऐसे में GEN-Z की मनपसंद उत्पाद कंपनियां टेंडर की इतनी कड़ी शर्तों के कारण स्वमेव प्रतियोगिता से बाहर हो गई है | सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक,स्थानीय कारोबारियों और उद्योगपतियों को दरकिनार कर जिन चुनिंदा चार कंपनियों को छत्तीसगढ़ में सेनेटरी नैपकिन पैड आपूर्ति के लिए,ठेकों के पूर्व ही योग्य बता कर,आपूर्ति के लिए हरी झंडी दे दी गई है,उनमें ”9 हेल्थ, पेन हेल्थ केयर” और ऐसी ही अन्य लगभग आधा दर्जन कंपनी शामिल बताई जाती है, जिन्हें उद्योगपति ”तुलसियान” मैनेज करते है,ठेकेदार की पहुंच दिल्ली तक बताई जाती है।  

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शिकायत के मुताबिक,बिड क्रमांक GEM/2026/B/7881680 (सेनेटरी नैपकिन क्रय) की विवादित शर्तों में सुधार हेतु विभागीय तौर पर कोई कदम नहीं उठाए गए है। जबकि,निविदा-टेंडर खुलने में अब एक दिन ही शेष रह गया है,यही नहीं,बैंकों की हड़ताल के चलते कई प्रतियोगी कंपनी नियम प्रकिया के पालन से वंचित हो गई है | उनके मुताबिक,निविदा-टेंडर की शर्तों में OEM टर्नओवर ₹90 करोड़ (S.No. 6): यह बिड मूल्य से लगभग दोगुना है,डीलर के लिए ₹14 करोड़ (30%) रखा गया है,जबकि उसी अनुपात में OEM का टर्नओवर कम नहीं किया गया है |

शिकायत में यह भी कहा गया  है,कि 40% मात्रा का अनुभव (S.No. 4): यानी लगभग 3.48 करोड़ पैड। जब मात्रा पक्की नहीं है,ऐसे में सरकारी कामकाज़ का 3 साल का अनुभव मांगना,किसी कंपनी विशेष को उपकृत करने के पैतरे से जुड़ा प्रतीत होता है | निविदा-टेंडर की विसंगतियों को दर्ज करते हुए,शिकायत में साफ़ किया गया है,कि L1 से मोलभाव और काम का बँटवारा गाइड लाइन (ITB 32): CVC नियमों के अनुसार L1 से मोलभाव केवल विशेष स्थिति में होता है,लेकिन निविदा-टेंडर की शर्तों में बँटवारे का अनुपात ना दर्ज करते हुए,सप्लाई-आपूर्ति को सिर्फ 3 हिस्सों में विभाजित करने की सूचना मात्र जाहिर की गई है |  शिकायत के मुताबिक, गाइड लाइन के नियमानुसार GCC 9 (iii): अनुबंध के बाद “EMD” नहीं, “Performance Security” जब्त होनी चाहिए। 2% पेनल्टी पूरे अनुबंध पर नहीं, केवल आपूर्ति में देरी के चलते दंडनीय होनी चाहिए | यही नहीं,टेंडर-निविदा की गैर-कानूनी रूप से शर्त  GCC 17: देरी पेनल्टी (LD) की दर घोषित नहीं की गई है। जबकि,निविदा-टेंडर जारी करते समय इस Clause को विशेष  रूप से दर्ज़ किया जाता है | इसके साथ ही प्रतियोगी कंपनियों को भ्रमित करने के लिए ” Clause  19″ गलत तरीके से दर्ज कर शर्तों में संलग्न किया गया है ,जबकि, Clause 18 को नजरअंदाज कर दिया गया है। 

एक दर या दो दर लिखा गया है ? (ITB 14 (vii)): नियम में “सभी आइटम की एक ही दर” लिखा है, जबकि मूल्य फॉर्म में L और XL की अलग-अलग दरें मांगी गई हैं। इस शर्त के स्पष्ट नहीं होने से टेंडर-निविदा प्रक्रिया विवादों से घिरी बताई जाती है | टेंडर-निविदा की विसंगतियों में यह तथ्य भी सामने आया है,कि कार्य अनुभव के लिए 2023-24 से 2025-26 मान्य है,जबकि टर्नओवर केवल 2022-23 से 2024-25 की शर्तें जोड़ दी गई है,ऐसे में टर्नओवर के लिए भी 2023-24 से 2025-26 मान्य किए जाने को लेकर कोई दिशा-निर्देश नहीं जारी किए गए है | जानकारों को अंदेशा है,कि किसी खास कंपनी को उपकृत करने के लिए आनन-फ़ानन में तैयार की गई,टेंडर-निविदा शर्तों से छत्तीसगढ़ सरकार की मंशा पर पानी फेरने की कवायतें जोरों पर है | 

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उन्हें अंदेशा इस बात का भी है,कि किसी दूसरे टेंडर-निविदा से  कॉपी- पेस्ट की गई शर्तें अब नए विवाद पैदा कर रही है, उनकी दलील है,कि installation/commissioning, “15000 स्थान”, hardware warranty, O&M अवधि, “ARL Items” जैसी शर्तें सेनेटरी नैपकिन पैड की निविदा-टेंडर में लागू नहीं होतीं। GEN-Z को   स्कूलों में बेहतर  वातावरण मुहैया कराए जाने से जुड़ी,महती योजना गांव-गांव में बीजेपी सरकार के सुशासन की बेहतर पहल के रूप में आंकी जा रही है | लेकिन,निविदा-टेंडर के दौर में सामने आ रहे विवाद ने,इसकी गुणवत्ता पर भी सवालियां निशान लगा दिया है | फ़िलहाल,इस टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की ओर  से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है|

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