
महासमुंद : रायपुर से सटे महासमुंद जिले के कलेक्टर की कार्यप्रणाली कृषि विभाग से लेकर राजनैतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है| मामला इलाके में यूरिया खाद वितरण से जुड़ा बताया जाता है| इस मामले ने दो कृषि विस्तार अधिकारियों के निलंबन के बाद गांव की कई चौपालों में तो कलेक्टर को हटाने की मांग भी शुरू हो गई है| आरोप लग रहा है,कि कृषि माफियाओं के इशारे पर कलेक्टर द्वारा दोनो कृषि अधिकारियों को निलंबित किया गया है|

दलील यह भी दी जा रही है,कि किसानों की मदद करना निलंबित अफसरों को भारी पड़ गया है ? महासमुंद में यूरिया वितरण में गड़बड़ी की शिकायत सही है या कोई साजिश ? इसे लेकर माथापच्ची जारी है| जबकि, महासमुंद कलेक्टर के अधीनस्थ खाद्य विभाग में गैस की कालाबाज़ारी का बड़ा मामला कुछ दिनों पूर्व सामने आया था,इस मामले में भी कलेक्टर की भूमिका जाँच के दायरे में बताई जाती है | गैस की कालाबाज़ारी रोकने में विफल रहे कलेक्टर का अब यूरिया वितरण में गड़बड़ी का दांव सुर्ख़ियों में है |

महासमुंद में इन दिनों कलेक्टर की एक अजीबो-गरीब कार्रवाई से कृषि महकमे में हलचल तेज़ है| कई कारोबारी दलील दे रहे है,कि किसानों को राहत देने पर महासमुंद कलेक्टर महोदय ही आखिर क्यों “हाय-तौबा” मचा रहे है| इलाके में यूरिया खाद पर मचे घमासान के बीच कलेक्टर की कार्यवाही “झूठी” शिकायत पर अनावश्यक तूल और जल्दबाजी की कार्रवाई के दायरे में बताई जाती है | यह कार्यवाही कृषि विभाग से सम्बद्ध बड़े सप्लायरों और कारोबारी, कांग्रेसी नेताओं के इशारों पर बताई जाती है|गौरतलब है,कि एक शिकायत का हवाला देते हुए तीन दिन पहले कलेक्टर ने दो कृषि अधिकारियों को निलंबित कर दिया था| इनमें वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी सुंदरलाल मिर्धा और प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी गंगा प्रसाद शरणागत का नाम शामिल बताया जाता हैं। यूरिया खाद वितरण में लापरवाही, विभागीय निर्देशों की अनदेखी और निगरानी में गंभीर कमी के आरोप इन अधिकारियों पर कलेक्टर द्वारा लगाए गए थे |

उधर,सूत्र तस्दीक कर रहे है,कि प्रारंभिक जाँच में यूरिया की अनियमितता का मामला सिर्फ शिगूफा साबित हो रहा है,जिन अधिकारियों को निलंबित किया गया था, उनके खिलाफ अब तक कोई ऐसे तथ्य नहीं मिले है,जैसे की आरोप कलेक्टर के द्वारा इन अफसरो और यूरिया सप्लायर फर्मो पर लगाए गए थे |अलबत्ता, मामला कृषि विभाग में खाद सप्लाई से जुड़े बड़े कारोबारियों को कलेक्टर के अनुचित संरक्षण और झूठी शिकायतों के जल्दबाज़ी में निपटारे से जुड़ा बताया जाता है| कहा जा रहा है,कि छोटे कारोबारियों को कृषि बाज़ार से हटाने के लिए कलेक्टर ना केवल अनुचित कार्यवाही पर जोर दे रहे है, बल्कि अपने अधिकारों का दुरूपयोग कर गांव-गांव में किसानों को नाराज़ करने की मुहिम में जुटे है| इसके साथ ही चौपालों में कलेक्टर को फ़ौरन हटाने की मांग भी शुरू हो गई है |

महासमुंद के कलेक्टर के निर्देश पर निलंबित कृषि अधिकारियों और शिकायती फर्मों की जांच में जुटी टीम ने अपनी कार्यवाही शुरू कर दी है| कृषि अधिकारियों के निलंबन के बाद उनके खिलाफ सबूत जुटाने का मामला काफी रोचक बताया जा रहा है| गुरुवार को कलेक्टर के निर्देश पर कृषि विभाग की एक टीम ने उन सप्लायरों और फर्मों पर दबिश दी,जिन पर यूरिया वितरण में अनियमितता बरते जाने का आरोप लगे थे| सूत्रों के मुताबिक,जाँच-पड़ताल में जुटी प्रशासन की टीम को ना तो उन कृषि अधिकारियों के खिलाफ कोई सबूत हासिल हुए जिन्हे हालिया निलंबित किया गया था,और ना ही उन सप्लायरों के खिलाफ कोई प्रमाण प्राप्त हुए,जिन पर यूरिया की अफ़रा-तफ़री के आरोप लगाए गए थे | यह भी बताया जा रहा है,कि इन फर्मों ने यूरिया वितरण एवं अन्य सरकारी आदेशों-दस्तावेजों का पूरा ब्यौरा जाँच टीम को सौंप दिया है| प्राथमिक पड़ताल में अब तक ऐसे कोई तथ्य सामने नही आए है,जिससे साफ़ हो रहा है,कि संबंधित इलाके में यूरिया की अफ़रा-तफरी की गई थी |

यह भी बताया जाता है,कि इन फर्मों में दस्तावेजों और यूरिया स्टॉक को लेकर लंबी जाँच-पड़ताल जारी रही | कृषि विभाग की टीम ने उन हितग्राहियों और किसानों के दस्तावेजों को भी खंगाला,जिन्होंने यूरिया की खरीदी की थी| बताया जाता है,कि प्रारंभिक जाँच में ऐसे कोई तथ्य सामने नहीं आए है,जो कालाबाज़ारी और खेतों तक यूरिया के नहीं पहुंचने से जुड़े हो|जानकारी के मुताबिक,निलंबन कार्रवाई के बाद अब प्रशासन की टीम आरोपियों के खिलाफ सबूत तलाशने में जुटी है|जबकि,कृषि विभाग के अफसरों को बगैर ठोस कारण के सस्पेंड करने की कलेक्टर की कार्रवाई पर भी अब सवाल उठने लगे है|उधर कृषि विभाग भी कलेक्टर की कार्यवाही पर हैरानी जता रहा है |महकमे के उच्चाधिकारी इस बात से इंकार कर रहे है,कि बागबाहरा और सरायपाली से कभी भी यूरिया की किल्लत और गड़बड़ी की शिकायत उनके सामने नहीं आई हैं|यही नहीं,शिकायती फर्मों का लेखा-जोखा भी नियमानुसार पाया गया था |

जानकारी के मुताबिक,निलंबित कृषि विकास अधिकारी विकासखंड बागबाहरा गंगा प्रसाद शरणागत और कृषि विकास अधिकारी विकासखंड सरायपाली बुंदरलाल मिर्धा को अधिक मात्रा में यूरिया उर्वरक का वितरण करने के संबंध में कलेक्टर ने कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे|यह भी बताया जाता है,कि दोनों अधिकारियों ने स्वविवेक और शासन के नियमों को दृष्टिगत रखते हुए कलेक्टर के निर्देश पर जाँच तो शुरू की,लेकिन फर्जी शिकायत सामने आने के बाद कलेक्टर के FIR दर्ज कराने के फरमानो को दरकिनार कर दिया था |

सूत्रों के मुताबिक,जाँच में शिकायती फ़र्मों के खिलाफ शासन के यूरिया वितरण के निर्देशों की अवहेलना के ना तो कोई तथ्य प्राप्त और ना ही रिकॉर्ड में हेरफेर पाया गया| यह भी बताया जा रहा है,कि यूरिया अनियमितता के आरोपों का मामला इन अधिकारियों ने अपनी जाँच में मनगढ़ंत और शिगूफा मात्र पाया था| उन्होंने प्रकरण को FIR दर्ज कराने योग्य नहीं पाया था लिहाज़ा,कृषि अधिकारियों ने संबंधित फर्मों के खिलाफ अनाश्यक कार्यवाही को लेकर अपने हाथ खड़े कर दिए थे |

बताते है,कि यह बात कलेक्टर को इतनी नागवार गुजरी की,उन्होंने फौरी तौर पर कृषि अधिकारियों को निलंबित कर दिया| अब कलेक्टर के निर्देश पर गठित अधिकारियों की दूसरी टीम यूरिया अनियमितता की नए सिरे से जाँच में जुटी है| लेकिन उसे भी अभी तक अनियमितता और गड़बड़ी को लेकर कोई सबूत हाथ नहीं लगे है| दस्तावेजों और सबूतों को खंगाले जाने के बाद अब यह टीम भी कलेक्टर की दिलचस्पी को लेकर “दो-चार’‘ होती बताई जाती है|उधर महासमुंद का यूरिया विवाद राजनैतिक गलियारों में गरमाया हुआ है|तस्दीक की जा रही है,कि प्रकरण को कलेक्टर ने अपनी नाक का सवाल बना लिया है,वो “येन-केन प्रकारेण” अनुचित कार्यवाही पर ज़ोर दे रहे है,कृषि अधिकारियों के खिलाफ कलेक्टर की कार्यवाही ने कई सवाल खड़े कर दिए है,इसे लेकर महकमे में माथापच्ची जारी है|

यह भी कहा जा रहा है,कि कृषि विभाग में पंजीकृत छोटे सप्लायरों और मंझोले कारोबारियों को प्रतियोगिता से बाहर करने के लिए उनके खिलाफ FIR दर्ज़ कराने को लेकर कलेक्टर द्वारा कृषि विभाग के अधिकारियों पर अनुचित दबाव डाला जा रहा है| ऐसे कारोबारियों ने विगत वर्षों में कृषि विभाग में यूरिया की आपूर्ति की थी| जबकि,कई बड़े सप्लायर और घोटालेबाज़ कारोबारी महकमे में अपने पैर जमाएँ हुए है | ऐसे कारोबारियों के नाम और उनके कारनामें कलेक्टर दफ्तर की शिकायत सूची में “धूल” खा रही है फ़िलहाल,जांच पर लोगों की निगाहें लगी हुई है, जबकि जिले में विवादित कार्यप्रणाली को लेकर कलेक्टर को हटाने की मांग भी जोर पकड़ने लगी है |







