
रायपुर : छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ बीजेपी नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरम लाल कौशिक के हाथों से मोबाइल छीनकर भागने वाला बाइक सवार को पुलिस ने घटना के लगभग 8 घंटे बाद धर-दबोचा है| मौका-ए-वारदात के दौरान आरोपी के बुलंद हौसलों को देख कर जनता हैरान है| रात के अँधेरे के बाद सुबह का उजियारा भी अपराधियों और गुंडे-बदमाशों के लिए “जौहर” दिखाने का उचित समय नज़र आने लगा है |

दरअसल,रातभर गश्त के बाद सुबह पुलिस के सुस्ताने के वक्त उठाईगिर सक्रिय हो रहे है | राजधानी से लेकर कई जिलों के गांव-कस्बों तक एक से बढ़ कर एक वारदातें, “फुल टाइम” पुलिसिंग और पूर्णकालिक DGP कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठा रहे है | राज्य में अपराधियों का बढ़ता कॉन्फिडेंस और “फुल टाइम” DGP मॉडल सुर्खियों में है| प्रदेश में अपराधों के बेलगाम रुख करने से राज्य की बीजेपी सरकार “फुल टाइम” विपक्ष के निशाने पर आ गई है|

राज्य में संगठित अपराधों के साथ-साथ मोबाइल लूट से चाकूबाजी तक पुलिसिंग पर बहस तेज हो गई है|अपराधियों के बुलंद हौसलों के बीच एक बार फिर प्रभारी से “फुल टाइम” बने DGP की कार्यप्रणाली में कमोवेश अब सुधार की गुंजाइश के विकल्पों पर भी माथापच्ची शुरू हो गई है| प्रभारी से “फुल टाइम” DGP के बदलाव का असर कानून व्यवस्था पर कितना असर डाल रहा है ? जनता इसका आंकलन करने लगी है|

ताज़ा जानकरी के मुताबिक,रायपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में भाजपा के वरिष्ठ नेता धरमलाल कौशिक के हाथों से मोबाइल लूटने वाले शख्स को शाम होते होते पुलिस ने धर-दबोचा है | बीते 8 घंटों में आरोपी की तलाश में जुटी पुलिस ने जमकर हाथ-पैर मारे और आरोपी को चूनाभट्टी इलाके से गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की|उसका नाम मणिचंद ध्रुव बताया जाता है|

CCTV खंगालने पर पुलिस को मणिचंद ध्रुव की तलाश थी| पुलिस ने आरोपी के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल दोपहिया वाहन भी जब्त किया है। जानकारी के मुताबिक,रायपुर में आज सोमवार को एक बड़ी वारदात उस वक्त सामने आई,जब भाजपा के सीनियर विधायक धरमलाल कौशिक के हाथो से एक अज्ञात बाइक सवार उनका मोबाइल छीनकर ले भागा था| धरमलाल कौशिक सुबह-सुबह मॉर्निंग वॉक के लिए निकले थे। घटना करीब सवा 8 बजे की बताई जाती है | झपटमार के बुलंद हौसलों से हड़बड़ाएं विधायक ने इस लूटपाट की जानकारी पुलिस को दी थी। विधायक की शिकायत पर एक्टिव पुलिस टीम ने इलाके के कई CCTV खंगालने और उसकी शिनाख्ती करने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी |

उधर,सुशासन तिहार में उस वक्त रंग में भंग पड़ गया जब कार्यक्रम के दौरान चाकूबाजी सामने आई | घटना राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ के ग्राम पंचायत पलान्दूर की बताई जाती है| जानकारी के मुताबिक,गांव में सुशासन तिहार समाधान शिविर आयोजित किया गया था | यहां एक शख्स ने स्थानीय सरपंच पर चाकू से हमला कर दिया। सिरफ़िरे ने सरपंच के पेट में चाकू मारा था| लिहाज़ा वे बुरी तरह से घायल हो गए। हालाँकि,मौके पर मौजूद जनता ने आरोपी को खुद पकड़कर पुलिस के हवाले किया। सुशासन तिहार के दौरान कार्यक्रम स्थल में पुलिस उपस्थित थी या नहीं ? इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है| आरोपी जितेन्द्र यादव ने सरपंच पर आख़िर क्यों हमला किया ? अभी यह नहीं पता चल पाया है |

सुशासन तिहार, राज्य की आम जनता और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के लिए अहम् कड़ी साबित हो रहा है | यहाँ स्थानीय लोग सरकार से संपर्क कर अपनी समस्याएं सुलझा रहे है| लेकिन,ऐसे कार्यक्रमों से पुलिस महकमें की दूरी जनता और उनके प्रतिनिधियों पर भारी पड़ रही है| इसके पूर्व राजनांदगांव के डोंगरगढ़ के आंबेडकर भवन में भी आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम में बड़ा विवाद सामने आया था। यहाँ पट्टे की मांग को लेकर आक्रोशित लोगों ने वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को बंधक बना लिया था। घटना सामने आने के बाद आरोपियों की धर-पकड़ को लेकर पुलिस ने अपने हाथ-पांव मारे थे|

अपराधियों की धर-पकड़ और कानून व्यवस्था पर जोर देने की गृहमंत्री की दलीलें गृह विभाग में ही दम तोड़ रही है | सूत्र दावा करते है,कि पुलिस महकमें में ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़ी ज्यादातर महत्त्वपूर्ण फाइलें सीधे सचिवालय का रुख कर रही है| जबकि, नियमानुसार गृहमंत्री के टेबल से गुजरने के बाद ही ट्रांसफर-पोस्टिंग के फ़रमान जारी होते है| गृह विभाग को सक्रिय बनाने में जुटे गृह मंत्री के प्रति महकमे के वरिष्ठ अधिकारियों की नजरअंदाज़ी कानून व्यवस्था पर भारी बताई जाती है |

छत्तीसगढ़ शासन के सबसे संवेदनशील कार्यक्रमों को लेकर पुलिस महकमा कितना गंभीर है ? ऐसी घटनाएं नमूने के तौर पर देखी जा रही है| प्रशासनिक मामलों के जानकार दावा कर रहे है,कि राज्य के कुछ चुनिंदा जिलों में ही कानून व्यवस्था की बहाली बनाएं रखने के लिए वरिष्ठ अधिकारी अपना पसीना बहा रहे है| जबकि,अन्य इलाकों में अपराधियों की नकेल कसने के मामले में पुलिस महकमा नाकाम साबित हो रहा है| राज्य में पुलिसिंग और अपराधों पर नियंत्रण अल्पकालिक, लेकिन डीजीपी पूर्णकालिक ? का मुद्दा लोगों की जुबान पर है |
क्या बीजेपी का “स्लीपर सेल” हैं बघेल ? कांग्रेस विधायकों को तोड़ने की साजिश तो नहीं …?





