
रायपुर : छत्तीसगढ़ के चर्चित डॉ मिक्की मेहता हत्या-आत्महत्या कांड में अपनी बहन को इंसाफ दिलाने में जुटे 56 वर्षीय माणिक मेहता की मौत ने छत्तीसगढ़ के राजनैतिक और प्रशासनिक सिस्टम को कटघरे में ला खड़ा किया है| माणिक मेहता के पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने उनका पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया| आज शाम रायपुर के मारवाड़ी शमशान घाट में माणिक मेहता का अंतिम संस्कार कर दिया गया| इसमें माणिक की बहन,जीजा कर अन्य परिजन शामिल हुए| उन्होंने नम आँखों से परिवार के इस अंतिम सदस्य को आखिरी बार नमन किया|

मेहता परिवार में इंसाफ की मुहिम में तीन मौतें,अधूरा इंसाफ और सिस्टम पर उठते सवालों के बीच मेहता परिवार की आखिरी उम्मीद भी आज राख-राख हो गई| माणिक मेहता के अंतिम संस्कार में निकटतम परिजनों के अलावा उनके कुछ खास दोस्त और करीबी शामिल हुए|
जानकारी के मुताबिक,रिटायर्ड डीजी मुकेश गुप्ता vs डॉ मिक्की से माणिक मेहता तक परिवार के 3 सदस्यों की एक के बाद एक मौत हो गई|लेकिन,परिवार को न्याय नहीं मिल पाया| छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह पहला मौका है,जब न्याय की तलाश में पूरा परिवार ही खत्म हो गया|

जानकारी के मुताबिक,रिटायर्ड डीजी मुकेश गुप्ता vs डॉ मिक्की प्रकरण में इंसाफ की जंग में जुटी तीन जिंदगियां खत्म हो गई,लेकिन प्रदेश के राजनैतिक और प्रशासनिक सिस्टम पर जूं तक नहीं रेंगी| इस हत्या-आत्महत्या की गुत्थी आज भी “जस की तस” है|जबकि,इंसाफ की इस लड़ाई में अदालत ने कई मौको पर असलियत पर से पर्दा हटाने के लिए कभी पुलिस तो कभी छत्तीसगढ़ शासन को निर्देशित निर्देशित किया गया था|

हालाँकि,उसका नतीजा सिफर रहा| एक ओर जहाँ ऐसी ही तमाम जाँच पड़ताल को लेकर कई सरकारी अधिकारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा| वही ऊंची राजनैतिक पहुंच और पद-प्रभाव और अधिकारों के दुरूपयोग के चलते आरोपित अधिकारी को पदोन्नति का तमगा हासिल होते रहा|लेकिन इस जंग में प्रदेश का प्रशासनिक सिस्टम कानूनी दांव पेचों में उलझ कर रह गया |

अदालती फरमान के बावजूद राजनैतिक रंग में रंगा प्रशासनिक सिस्टम ना तो डॉ मिक्की मेहता को इंसाफ दिला पाया और ना ही मिक्की की माँ श्यामा और भाई माणिक मेहता को| ये तीनों जिंदगियां बेपरवाह सिस्टम की भेंट चढ़ गई|अब पूरे परिवार की न्याय की उम्मीद भी चिता की आग में खामोश हो गई है| इस समाचार के साथ उन दस्तावेजों को भी प्रकाशित किया गया है,जो रिटायर्ड डीजी मुकेश गुप्ता vs डॉ मिक्की प्रकरण की जांच के दौरान समय-समय पर सामने आए थे|

पुलिस मुख्यालय अपने ही वरिष्ठतम अफसरों की जांच रिपोर्ट का पालन आखिर क्यों सुनिश्चित नहीं कर पाया ? जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बावजूद आरोपित अधिकारी रिटायर्ड डीजी मुकेश गुप्ता कैसे “पाक़-साफ़” बने रहे ? उन पर किस अधिकारी और नेता जी की कृपा बरसती रही ? सब कुछ सवालों के घेरे में है |

नतीजतन,इन प्रकरणों को लेकर उठे बड़े सवाल सरकार की “कथनी और करनी” का नमूना ही पेश कर रही है इंसाफ की मुहिम में 3 मौत,रिटायर्ड डीजी का रहस्यमय लोक और अंधे कानून ने मेहता परिवार केस और मुकेश गुप्ता को एक बार फिर सुर्ख़ियों में ला दिया है | न्याय मांगते-मांगते मेहता परिवार खत्म हो गया| माणिक मेहता के पंचतत्व में विलीन होते ही जहाँ सिस्टम कटघरे में खड़ा है,वही मुकेश गुप्ता की “बल्ले-बल्ले” बताई जाती है|

यह भी कहा जा रहा है,कि नौकरशाही में मुकेश गुप्ता जैसी कार्यप्रणाली किसी भी अधिकारी के लिए अभिशाप से कम नहीं है,बावजूद इसके प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र में इसी तर्ज पर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने वाले अफसरों की “पौ-बारह” है|

फ़िलहाल,इस मामले में रिटायर्ड डीजी मुकेश गुप्ता की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है| जबकि,माणिक मेहता के परिजनों ने साफ़ कर दिया है,कि वे अब इन्साफ से तौबा करते है| भविष्य में छत्तीसगढ़ जैसे शांत प्रदेश कभी भी ऐसी दुःखद वारदात किसी घर परिवार में ना हो ? इसी उम्मीद में वे माणिक मेहता को अंतिम बार नमन कर रायपुर से दिल्ली प्रस्थान करेंगे |
न्याय की मुहिम पंचतत्व में विलीन, छत्तीसगढ़ में सिस्टम के साथ संघर्ष में 3 मौत…







