47 करोड़ के सैनिटरी पैड ठेके को हथियाने के लिए कवायतें जोरों पर,सैनिटरी नैपकिन/पैड क्रय टेंडर-निविदा की हैरान करने वाली शर्ते,”गजेंद्र मुख”पर ”ZEN-G” की नज़रे…

रायपुर : छत्तीसगढ़ में सर्व शिक्षा अभियान के तहत शासकीय विद्यालयों हेतु सैनिटरी नैपकिन/पैड वितरण की योजना में गुणवत्तायुक्त सामग्री की आपूर्ति पर अभी से अंदेशा जाहिर किया जाने लगा है | केंद्र और राज्य सरकार की मंशा है,कि प्रदेश के स्कूलों में अध्यनरत छात्राओं को मुफ़्त में गुणवत्तायुक्त सैनिटरी नैपकिन/पैड मुहैया कराया जा सके | लेकिन,सर्व शिक्षा अभियान के तहत47 करोड़ के सैनिटरी  पैड वितरण योजना में एक “कंपनी विशेष” को लाभान्वित करने के लिए जारी की गई,टेंडर- निविदा से इस योजना की कामयाबी पर पानी-फिरने के आसार बढ़ गए है |

 दरअसल,ख़ास ”कंपनी विशेष” के लिए डिजाइन किए गए निविदा-टेंडर की शर्ते हैरान करने वाली बताई जाती है | इसमें प्रतियोगियों से 6 माह के लिए प्रभावशील 50 लाख रुपए के ”डिमांड ड्राफ़्ट” की मांग की गई है | ऐसी स्थिति में 6 माह वाले DD (डिमांड ड्राफ़) की अनोखी शर्त से दर्जनों सप्लाई कंपनियां प्रतियोगिता से बाहर हो गई है | बताया जाता है,कि 6 माह तक प्रभावशील डिमांड ड्राफ़ की शर्त से भारत के RBI (रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ) के अफ़सर भी हैरान है |

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जानकारी के मुताबिक,भारत की बैंकिंग व्यवस्था में चेक (CHEQUE) या DD (डिमांड ड्राफ़) की  वैलेडिटी मात्र 90 दिन अर्थात 3 माह निर्धारित है | इस तिथि के उपरांत उसकी वैधता स्वमेव समाप्त मानी जाती है | यह भी बताया जाता है,कि इसी सोमवार अर्थात 21 सितंबर 2026 को सर्व शिक्षा अभियान के तहत स्कूली छात्राओं के लिए “सेनेटरी पैड” आपूर्ति का 47 करोड़ का टेंडर-निविदा भरने की अंतिम तिथि है | इस टेंडर में प्रतियोगियों से सुरक्षा निधि के नाम पर 50 लाख के DD (डिमांड ड्राफ़) की  वैलेडिटी पूरे 180 दिन  अर्थात 6 माह की मांगी गई है,ऐसे अनोखा डिमांड ड्राफ़ बनाने से बैंक के अधिकारियों के हाथ भी कंप-कंपाने लगे है |

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उनकी माने तो,भारत का ”रिज़र्व बैंक” इतनी लंबी अवधि (180 दिन) के लिए प्रभावशील डिमांड ड्राफ़ जारी करने की इज़्ज़ात नहीं देता है | सर्व शिक्षा अभियान के इस निविदा-टेंडर में  डिमांड ड्राफ़ की इस अनोखी शर्त के चलते कई प्रतियोगी कंपनियों ने मैदान छोड़ दिया है | ऐसे में जनता की निगाहे उस एक मात्र आपूर्तिकर्ता कंपनी की क़वायतों पर टिकी हुई है,जिसे  लाभांवित करने के लिए ”गजेंद्र  स्वामी” ने हामी भरी है | सूत्रों के मुताबिक,खास डिजाइन वाली शर्तों के साथ तैयार किए टेंडर-निविदा में एक मात्र “वही चुनिंदा” कंपनी बाज़ी मारने वाली है,जिसका “मालिक” एक है,उसका नाम ”तुलसियान” बताया जाता है |

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 बताते है,कि इस कंपनी ने टेंडर-निविदा हथियाने के लिए,मंत्री के कृपापात्र एक स्थानीय फ़र्म को ”अधिकार पत्र” भी सौंप दिया गया है | यह भी बताया जाता है,कि इंदौर के पीथमपुर की सैनिटरी नैपकिन/पैड निर्माता  कंपनी का कर्ता-धर्ता एक मात्र व्यक्ति ( मालिक) है | जबकि,अलग-अलग शहरों में उसकी निर्माणाधीन यूनिट दर्शा कर इस कंपनी ने प्रतियोगिता में बाज़ी मारने के जोड़-तोड़ का गणित पूरा कर लिया है | इसमें “गजेंद्र मुख” की सेवा शर्तें महत्वपूर्ण बताई जाती है | सूत्रों का दावा है,कि अनोखी शर्तों के चलते एक मात्र उद्योगपति की 3 से अधिक कंपनियां प्रतियोगिता में शामिल बताई जाती है |  

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एक शिकायत में आईटीबी खंड 21.5 के अंतर्गत ईएमडी (बिड सिक्योरिटी) डिमांड ड्राफ्ट की वैधता के संबंध में प्री-बिड क्वेरी पर गंभीर सवाल उठाए गए है | इसमें स्पष्ट किया गया है,कि निविदा-टेंडर के आईटीबी खंड 21.3 के अनुसार रु. 50,00,000/- की ईएमडी केवल अकाउंट पेयी डिमांड ड्राफ्ट के रूप में जमा की जानी है। इसके साथ ही,आईटीबी खंड 21.5 के अनुसार ईएमडी बिड वैधता अवधि के बाद भी 180 दिनों तक वैध होनी चाहिए। चूँकि बिड वैधता स्वयं 180 दिन है (आईटीबी खंड 22), अतः डिमांड ड्राफ्ट की वैधता लगभग 360 दिन की अपेक्षित हो जाती है। ऐसे में टेंडर-निविदा की शर्तों को लेकर प्रतियोगियों के बीच”’असमंजस” की स्थिति बनी हुई है | 

शिकायत के मुताबिक,भारतीय रिज़र्व बैंक के परिपत्र DBOD.AML.BC.No.47/14.01.001/2011-12 दिनांक 04.11.2011 के अनुसार दिनांक 01.04.2012 से चेक, डिमांड ड्राफ्ट, पे ऑर्डर एवं बैंकर्स चेक जारी होने की तिथि से केवल ”तीन माह” तक ही वैध होते हैं। अतः निविदा-टेंडर की शर्तों के अनुरूप कोई भी बैंक खंड 21.5 में अपेक्षित वैधता वाला डिमांड ड्राफ्ट जारी नहीं कर सकता। शिकायत में दावा किया गया है,कि देश की बैंकिंग व्यवस्था में 6 माह के लिए प्रभावशील डिमांड ड्राफ्ट उपलब्ध कराना किसी भी बोलीदाता द्वारा संभव नहीं जान पड़ता है | उनकी माने तो,यह “गज” कृपा पर ही निर्भर है |

विभागीय जानकारों के मुताबिक,इस अनोखी शर्त के चलते के नियंत्रण से बाहर  वास्तविक बिड्स को अनुत्तरदायी (non-responsive) माना जा सकता है। इस अनोखी टेंडर-निविदा शर्त से कई प्रतियोगियों ने नए सिरे से टेंडर-निविदा जारी करने की मांग की है,शिकायत में निवेदन है कि जेम पोर्टल पर स्पष्टीकरण/शुद्धिपत्र (corrigendum) जारी कर निम्न में से किसी एक विकल्प की अनुमति प्रदान करने की कृपा करें | इसमें  (a) तीन माह की सामान्य वैधता वाले ईएमडी डिमांड ड्राफ्ट को, बोलीदाता के इस वचनपत्र (undertaking) के साथ स्वीकार किया जाए कि आवश्यकता की पूरी अवधि तक डिमांड ड्राफ्ट की वैधता समाप्त होने से पूर्व उसे पुनर्वेध (revalidate) या प्रतिस्थापित (replace) किया जाएगा अथवा (b) ईएमडी बैंक गारंटी (अपेक्षित वैधता सहित), एफडीआर अथवा क्रेता के खाते में ऑनलाइन अंतरण (आरटीजीएस/एनईएफटी) के माध्यम से जमा करने की अनुमति दी जाए अथवा(c) प्राप्त होते ही डिमांड ड्राफ्ट को क्रेता द्वारा भुना/जमा कर लिया जाए तथा असफल बोलीदाताओं को आईटीबी खंड 21.8 के अनुसार राशि वापस की जाए। 

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 फ़िलहाल,सर्व शिक्षा अभियान के तहत ”ZEN-G” की सुध लेने में राज्य की बीजेपी सरकार पीछे नहीं है,उसने सैनेटरी पैड वितरण योजना को अपनी हरी झंडी दे दी है | लेकिन,इस महती योजना को पटरी से उतराने के लिए टेंडर-निविदा में जोड़-तोड़  सैनेटरी पैड की गुणवत्ता को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है |

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