
रायपुर : – कभी नक्सल गतिविधियों का गढ़ रहे बस्तर में अब बदलाव की तस्वीर नजर आ रही है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार मुख्यधारा से जोड़कर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही है। इसी बदलाव की मिसाल राजधानी रायपुर में देखने को मिली, जहां सरेंडर कर चुकी महिला नक्सलियों ने प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में पहली बार रैंप वॉक किया।

सरेंडर महिला नक्सलियों ने प्रोफेशनल मॉडल की तरह रैंप पर चलकर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कोसा सिल्क, हथकरघा परिधानों और छत्तीसगढ़ी गहनों का प्रदर्शन किया। उनकी प्रस्तुति को देखकर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियों से उनका उत्साह बढ़ाया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी आत्मसमर्पित महिलाओं से मुलाकात कर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं। यह आयोजन उनके आत्मविश्वास, सम्मानजनक पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम की तस्वीर बना।

सुकमा के एसपी मयंक गुर्जर के मुताबिक, हाल ही में सुकमा में आत्मसमर्पण करने वाली नौ महिलाओं ने ‘स्वदेशी’ फैशन शो में हिस्सा लिया। इनमें कुछ महिलाएं पामेड एरिया कमेटी में सक्रिय थीं, जबकि कुछ ने वरिष्ठ नक्सल कमांडरों के गनमैन के तौर पर काम किया था। एक महिला ‘जनता सरकार’ स्कूल में शिक्षक के रूप में भी काम कर चुकी थी। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के कार्यक्रम में सीएम साय ने रेशम, हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी एवं माटीकला बोर्ड के हितग्राहियों और मेधावी विद्यार्थियों को 10 करोड़ 90 लाख रुपये से अधिक की अनुदान और पुरस्कार राशि वितरित की।



