सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखना उनकी सुरक्षा का समाधान नहीं है। अदालत के मुताबिक, बच्चों को इंटरनेट इस्तेमाल करने का अधिकार है और उनकी ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट पर रोक लगाने के लिए कोर्ट ने केंद्र सरकार को नेशनल डेटाबेस तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसमें आपत्तिजनक तस्वीरों और वीडियो को सीधे रखने के बजाय उनकी डिजिटल पहचान दर्ज की जाएगी, जिससे ऐसी सामग्री को अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दोबारा अपलोड किए जाने पर भी पहचाना जा सकेगा।

अदालत ने सोशल मीडिया कंपनियों को भी सख्त निर्देश दिए हैं। तय परिस्थितियों में ऐसे कंटेंट को हटाने के बाद दो घंटे के भीतर पुलिस को सूचना देनी होगी, जबकि शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर शिकायतकर्ता को रेफरेंस नंबर देना होगा। कोर्ट ने नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर आर्थिक जुर्माने के विकल्प पर विचार करने और बच्चों को स्कूलों में ऑनलाइन सुरक्षा के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया है। केंद्र सरकार को इन निर्देशों पर हुई कार्रवाई की रिपोर्ट हलफनामे के जरिए अदालत में पेश करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी।