रायपुर: कभी भिलाई में जूस की दुकान पर काम करने वाला युवक देखते ही देखते दुबई की आलीशान जिंदगी तक कैसे पहुंच गया? क्रिकेट और दूसरे खेलों पर ऑनलाइन सट्टे का कारोबार किस तरह हजारों पैनलों के जरिए देश-विदेश तक फैला? और आखिर उस नेटवर्क में ऐसा क्या था, जिसकी जांच में करोड़ों नहीं, हजारों करोड़ रुपये के लेन-देन के अनुमान सामने आए? महादेव ऑनलाइन बुक सट्टा ऐप के मुख्य आरोपियों में शामिल सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद ये सवाल फिर सुर्खियों में हैं। सौरभ को ओमान सल्तनत से सफल प्रत्यर्पण के बाद भारत लाया गया है। अब जांच एजेंसियों के सामने उसके कथित सट्टा साम्राज्य, पैसों के लेन-देन और विदेश में बनाई गई संपत्तियों की परतें खोलने की चुनौती है।
सौरभ चंद्राकर का संबंध छत्तीसगढ़ के भिलाई से है। जांच से जुड़े दस्तावेजों के मुताबिक, उसके परिवार का पहले ‘जूस फैक्ट्री’ नाम से जूस की दुकान का कारोबार था। सौरभ भी इस दुकान पर काम करता था और उसे कथित तौर पर करीब 15 हजार रुपये महीने मिलते थे। लेकिन कुछ समय बाद उसकी जिंदगी में ऐसा बदलाव आया कि दुबई के महंगे विला, निजी विमान, विदेश यात्राएं और करोड़ों के आयोजनों की चर्चा होने लगी।प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि सौरभ चंद्राकर और उसका कारोबारी साथी रवि उप्पल दुबई में बैठकर महादेव ऑनलाइन बुक का नेटवर्क संचालित कर रहे थे। एजेंसी के मुताबिक, सट्टे से होने वाली कमाई को भारत और विदेशों में अलग-अलग माध्यमों से निवेश किया जाता था। यही कथित नेटवर्क अब देश के बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में शामिल है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, महादेव ऐप का नेटवर्क भारत और UAE में करीब 3,200 पैनलों के जरिए संचालित किया जा रहा था। क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस और ताश समेत कई खेलों पर ऑनलाइन सट्टा लगाया जाता था। दुबई में बैठे कथित मुख्य संचालक पैनल ऑपरेटरों को लॉगिन आईडी देते थे। एक पैनल शुरू करने के लिए करीब 15 से 20 लाख रुपये तक की शुरुआती रकम लगने की बात जांच में सामने आई।
इसके बाद पैनल संचालक बैंक खाते, मोबाइल, इंटरनेट और कर्मचारियों का इंतजाम करते थे। ग्राहकों को WhatsApp और Telegram के जरिए जोड़ा जाता था। ED का आरोप है कि पैनलों से होने वाले मुनाफे का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा मुख्य संचालकों तक पहुंचता था। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि बड़ी रकम जीतने वाले कुछ खिलाड़ियों की यूजर आईडी बंद कर दी जाती थी, जिससे उनकी रकम निकालना मुश्किल हो जाता था।
महादेव ऐप की जांच में केवल ऑनलाइन सट्टेबाजी ही नहीं, बल्कि पैसों को इधर-उधर पहुंचाने के कथित तंत्र की भी पड़ताल हुई। ED के मुताबिक, दूसरे लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए गए, कमीशन पर खाते लिए गए और कथित तौर पर धोखे से हासिल KYC दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। इन खातों में रकम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर जमा और निकासी की जाती थी।जांच एजेंसी का आरोप है कि कुछ पैसा नकद निकालकर हवाला के जरिए विदेश भेजा गया, जबकि कुछ रकम दुबई की कंपनियों, संपत्तियों और भारतीय शेयर बाजार में निवेश के रास्ते लगाई गई। ED ने महादेव और इससे जुड़े अन्य प्लेटफॉर्म के कारोबार से कथित अपराध की कमाई का अनुमान करीब 88 हजार से 94 हजार करोड़ रुपये तक लगाया है। यह जांच एजेंसी का अनुमान है, अदालत से साबित अंतिम आंकड़ा नहीं।
सौरभ चंद्राकर की फरवरी 2023 में UAE के रास अल खैमाह स्थित वाल्डोर्फ एस्टोरिया होटल में हुई शादी भी जांच का बड़ा हिस्सा बनी। शादी के कार्यक्रम 10 से 14 फरवरी तक चले थे। ED का आरोप है कि इस आयोजन पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च किए गए। मेहमानों को लाने के लिए नागपुर से तीन चार्टर्ड विमान भेजे गए थे। फिल्मी कलाकारों के लिए भी निजी विमानों की व्यवस्था किए जाने की बात सामने आई।
जांच एजेंसी के मुताबिक, इवेंट कंपनी के रिकॉर्ड में करीब 112 करोड़ रुपये, होटल पर 42 करोड़ रुपये, मेहमानों के टिकट, होटल और वीजा पर 37 करोड़ रुपये तथा विमान किराये पर करीब 7 करोड़ रुपये खर्च का ब्योरा मिला। इन रिकॉर्ड और बयानों के आधार पर ED ने शादी का कुल खर्च लगभग 200 करोड़ रुपये आंका। एजेंसी का आरोप है कि भुगतान का बड़ा हिस्सा नकद और हवाला के जरिए किया गया।
इस शादी और महादेव ऐप से जुड़े आयोजनों में फिल्मी कलाकारों की मौजूदगी भी जांच के दायरे में आई। मीडिया रिपोर्टों में विशाल ददलानी, टाइगर श्रॉफ, सनी लियोनी, नेहा कक्कड़ और नुसरत भरूचा जैसे नामों का जिक्र हुआ। वहीं, अक्टूबर 2023 में ED ने रणबीर कपूर, कपिल शर्मा, हुमा कुरैशी, हिना खान और श्रद्धा कपूर को बयान दर्ज कराने के लिए समन भेजे थे। किसी कलाकार का नाम जांच में आने मात्र से उसके खिलाफ अपराध साबित नहीं होता।
महादेव ऐप मामले का एक संवेदनशील पहलू राजनीतिक और प्रशासनिक संपर्कों से जुड़ा है। ED का आरोप है कि नेटवर्क को बिना रुकावट चलाने के लिए कुछ पुलिस अधिकारियों, सरकारी लोगों और राजनीतिक संपर्कों तक रकम पहुंचाई जाती थी। एजेंसी ने इसे ‘लायजनिंग मनी’ बताया है।2 नवंबर 2023 को रायपुर में असिम दास से जुड़े ठिकानों और वाहन से 5.39 करोड़ रुपये नकद मिलने का दावा किया गया था। ED के मुताबिक, यह रकम कथित तौर पर राजनीतिक लोगों तक पहुंचाई जानी थी। असिम दास के बयान और शुभम सोनी के कथित ईमेल में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तक पैसे पहुंचाने के आरोपों का भी उल्लेख हुआ। इन आरोपों के आधार पर EOW ने मार्च 2024 में मामला दर्ज किया और बाद में CBI ने दिसंबर 2024 में केस दर्ज किया। भूपेश बघेल का नाम भी जांच में आया है। इन आरोपों की कानूनी जांच जारी है और आरोपों को दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
ED के मुताबिक, अगस्त 2023 से जुलाई 2026 के बीच इस मामले में करीब 190 ठिकानों पर तलाशी ली गई। जांच एजेंसी ने नकदी, सोना, गहने, बैंक खाते और शेयर बाजार में निवेश समेत करीब 2,014 करोड़ रुपये की रकम और संपत्तियां जब्त या फ्रीज करने की जानकारी दी है। अलग-अलग अटैचमेंट आदेशों को मौजूदा बाजार कीमत के आधार पर जोड़ने पर करीब 3,500 करोड़ रुपये की संपत्तियों का आंकड़ा बताया गया है।जांच में दुबई की 22 अचल संपत्तियों का पता चलने की बात भी सामने आई। इनमें सौरभ और उसके करीबियों से जुड़ी 12 संपत्तियों की मौजूदा बाजार कीमत करीब 1,500 करोड़ रुपये आंकी गई है।
ED के अनुसार,अगस्त 2023 से जुलाई 2026 के बीच इस मामले में 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें कथित पैनल संचालक, हवाला कारोबारी, पुलिस से जुड़े लोग, नेटवर्क मैनेजर और वित्तीय लेन-देन से जुड़े लोग शामिल हैं। एजेंसी ने आरोपपत्रों के जरिए कुल 116 आरोपियों को नामजद करने की जानकारी दी है। कई आरोपियों को अलग-अलग अदालतों से जमानत भी मिल चुकी है।
सौरभ चंद्राकर के खिलाफ सितंबर 2023 में रायपुर की विशेष PMLA अदालत से गैर-जमानती वारंट जारी हुआ था। नवंबर 2023 में इंटरपोल रेड नोटिस भी जारी किया गया। ED ने 20 अक्टूबर 2023 को उसके खिलाफ पहली अभियोजन शिकायत दाखिल की थी, जिस पर विशेष अदालत ने 19 जनवरी 2024 को संज्ञान लिया था।ओमान से भारत लाए जाने के बाद अब सौरभ से पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई अहम होगी। जांच एजेंसियों की नजर कथित नेटवर्क के बाकी संचालकों, विदेश में मौजूद संपत्तियों, हवाला के लेन-देन और राजनीतिक-प्रशासनिक संपर्कों पर है।
