रायपुर : छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक परिवहन की तस्वीर बदलने की तैयारी है। अब रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और कोरबा की सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसों की स्टीयरिंग महिला चालकों के हाथों में नजर आ सकती है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत प्रदेश में 240 इलेक्ट्रिक बसें स्वीकृत हैं। इनमें महिला ड्राइवरों और कंडक्टरों को प्राथमिकता के साथ रोजगार देने की योजना बनाई जा रही है। इसका मकसद महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खोलना और सार्वजनिक परिवहन में महिला यात्रियों का भरोसा बढ़ाना है।

इस पहल के तहत बसों का संचालन करने वाली एजेंसियां महिला अभ्यर्थियों को निशुल्क विशेष ड्राइविंग प्रशिक्षण भी देंगी। हालांकि, महिला चालक बनने के लिए भारी वाणिज्यिक वाहन (H​​MV) का वैध लाइसेंस, जरूरी तकनीकी प्रशिक्षण और ड्राइविंग अनुभव जैसी शर्तें पूरी करनी होंगी। इलेक्ट्रिक बसों में ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन और डिजिटल कंट्रोल सिस्टम होने से इन्हें चलाने की प्रक्रिया पारंपरिक डीजल बसों की तुलना में कुछ आसान हो सकती है। लेकिन सुरक्षित संचालन के लिए प्रशिक्षित चालक होना जरूरी रहेगा।

चार शहरों में 240 ई-बसें, किसे कितनी मिलेंगी?

योजना के तहत स्वीकृत बसों का शहरवार ब्योरा इस प्रकार है:

  1. रायपुर: 100 इलेक्ट्रिक बसें
  2. बिलासपुर: 50 इलेक्ट्रिक बसें
  3. दुर्ग-भिलाई: 50 इलेक्ट्रिक बसें
  4. कोरबा: 40 इलेक्ट्रिक बसें

बसों के संचालन के लिए डिपो और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। इन सुविधाओं के पूरा होने के बाद बस सेवा शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।

दिल्ली, भुवनेश्वर और नागपुर में दिखा महिला भागीदारी का मॉडल

सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए देश के कई शहरों में पहले से प्रयास किए जा रहे हैं। भुवनेश्वर की ‘मो बस’ सेवा में महिला कंडक्टरों की अच्छी भागीदारी बताई जाती है। नागपुर में महिला स्टाफ द्वारा संचालित ‘तेजस्विनी’ बस सेवा भी इस दिशा में एक उदाहरण है। वहीं, दिल्ली परिवहन निगम में महिला कंडक्टरों और चालकों को जिम्मेदारी दी गई है।

इन्हीं अनुभवों से प्रेरणा लेकर छत्तीसगढ़ में भी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की तैयारी है। इससे महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलने के साथ परिवहन क्षेत्र में उनकी भूमिका मजबूत होने की उम्मीद है।

रायपुर ई-बस डिपो निर्माण में पीछे, 60 प्रतिशत काम बाकी

ई-बस सेवा शुरू करने की तैयारियों के बीच डिपो निर्माण की स्थिति भी अहम है। राज्य शहरी विकास एजेंसी (SUDA) के अनुसार, विभिन्न शहरों में निर्माण कार्य अलग-अलग चरणों में है।

  1. दुर्ग-भिलाई के कदंबरी नगर डिपो: 90 प्रतिशत काम पूरा
  2. कोरबा के दर्री डिपो: 80 प्रतिशत काम पूरा
  3. बिलासपुर के कोनी डिपो: 80 प्रतिशत काम पूरा
  4. रायपुर के जरवाय डिपो: 40 प्रतिशत काम पूरा

रायपुर के जरवाय डिपो के लिए 31 दिसंबर संभावित पूर्णता तिथि बताई गई है। यानी राजधानी में अभी निर्माण का करीब 60 प्रतिशत काम बाकी है।

रोजगार के साथ सुरक्षित परिवहन पर नजर

छत्तीसगढ़ के चार प्रमुख शहरों में ई-बस सेवा शुरू होने से शहरी परिवहन को पर्यावरण के अनुकूल बनाने और महिलाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोलने की उम्मीद है। हालांकि, योजना का वास्तविक असर बसों की उपलब्धता, डिपो निर्माण, प्रशिक्षण और भर्ती की समयसीमा पर निर्भर करेगा। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ये ई-बसें सड़कों पर कब उतरेंगी और महिला चालकों की भर्ती कब शुरू होगी।