
रायपुर/दिल्ली : रायपुर/दिल्ली : छत्तीसगढ़ PSC घोटाले की जाँच नए मोड़ पर आ गई है|बलरामपुर के अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया को फिर 8 दिनों की रिमांड पर सीबीआई के हवाले कर दिया गया है| उनकी पूर्व में जारी 8 दिनों की रिमांड अवधि बीतने के बाद आज बोरघारिया को रायपुर में सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया गया था| बताते है,कि मामले की गंभीर विवेचना को दृष्टिगत रखते हुए विचारण उपरांत अदालत ने पुनः बोरघारिया को 8 दिनों के लिए सीबीआई रिमांड पर भेज दिया है,इसके साथ ही नई ख़बर सामने आई है,बलरामपुर के अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया के CBI के हत्थे चढ़ने के बाद कई और संदिग्धों पर एजेंसी का शिकंजा कसने लगा है|बोरघरिया से हुई पूछताछ के बाद एजेंसी को कई ऐसे पुख़्ता सबूत हाथ लगे है,जिससे CGPSC घोटाले की असलियत जल्द सामने आ सकती है|

इस फेहरिस्त में अब वो नए नाम जुड़ते जा रहे है,जिन्होंने वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री से करीबी संबंध बनाकर CGPSC के जरिए होने वाली भर्ती को अपनी मुख्य अवैध आय का साधन बना लिया था| ताज़ा जानकारी के मुताबिक,उन कारोबारियों और उद्योगपतियों के भी गिरेबान पर हाथ डालने की ओर अब एजेंसी आगे बढ़ रही है,जिन्होंने बिचौलिया बनकर पिछले दरवाजे से कुपात्रों को “अधिकारी” बनाने का उपक्रम खोल रखा था|

छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल और उनके कई OSD,सलाहकार और उद्योगपति मिलजुल करCGPSC को “प्राइवेट लिमिटेड कंपनी” की तर्ज़ पर संचालित कर रोजाना लाखों-करोड़ों का कारोबार कर रहे थे | बताया जा रहा है,पिछले दरवाजे से कुपात्रों की नौकरियां मुहैया कराने के मामले की शुरुआत उस समय से हो गई थी,जब पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने करीबी टामन सिंह सोनवानी को CGPSC के चैयरमैन के पद पर नियुक्त किया था| यह भी बताया जाता है,कि वर्ष 2018 से लेकर 23 तक तत्कालीन मुख्यमंत्री के कतिपय सुरक्षा अधिकारियों (पुलिस) और उनके आवास और कार्यालय में कार्यरत कई अफसरों के पुत्र-पुत्रियां और अन्य सगे-संबंधी भी पिछले दरवाज़े से नौकरी पाने में कामयाब रहे है,अब एजेंसी ऐसे संदिग्धों की खोजबीन में जुट गई है|

सूत्रों का दावा है,कि आरोपी अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया से जारी पूछताछ से कई रहस्यों पर से पर्दा हटने लगा है | CGPSC घोटाले में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कई ‘‘रसूखदार” नाम सामने आ रहे है,इनमें सूरज कश्यप, विनोद वर्मा और गोयल बंधु भी जांच के घेरे में बताए जाते है | यह भी बताया जाता है,कि चर्चित उद्योगपति गोयल बंधुओं ने “CSR” फंड की रकम का इस्तेमाल जनहित के कार्यों पर करने के बजाए अपने करीबी नाते-रिश्तेदारों को “डिप्टी कलेक्टर” बनाने पर खर्च किए थे|

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बजरंग पावर के डायरेक्टर श्रवण गोयल के बेटे और बहू दोनों को डिप्टी कलेक्टर बनाने के लिए “CSR” फंड की रकम ”रिश्वत” देने के लिए उपयोग की गई थी | इस मामले को देशद्रोह के दायरे में आंका जा रहा है | बताते है,कि साल 2021 के CGPSC परिणामों में शशांक गोयल और उनकी पत्नी भूमिका (डिप्टी कलेक्टर) क्रमश: तीसरे और चौथे टॉपर थे। CBI ने पहले ही झटके में शशांक गोयल और भूमिका अपनी गिरफ़्त में लिया था |

हालांकि,दोनों ही आरोपी जमानत पर रिहा बताए जाते है,जबकि ”रिश्वत” के लिए “CSR” फंड स्वीकृत करने वाले कंपनी के डायरेक्टर समेत लेन-देन करने वाले अन्य संदेही अब एजेंसी की रडार पर बताए जाते है| सूत्रों के मुताबिक,उद्योगपति गोयल बंधुओं ने अपने बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका को नौकरी दिलाने के लिए पूर्व चैयरमैन टामन सिंह सोनवानी के करीबी शख्स के एनजीओ को सीएसआर फंड से 45 लाख रुपये दिए थे। बताते है,कि इस रकम की डिलीवरी पीएसपी भर्ती के सलेक्शन के दौरान क्रमशः 20 लाख और 25 लाख दो किश्तों में दिए गए थे।

जाने क्या होता है “CSR” फंड ?
सीएसआर का मतलब कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी होता है | इसके तहत कंपनियां अपने बिजनेस से होने वाले प्रॉफिट का कुछ हिस्सा सामाजिक और पर्यावरण संबंधी कार्यों में खर्च करती है. सीएसआर कानून 2013 के मुताबिक, सभी बड़े व्यवसायों को सालाना अपने कुल लाभ का 2% सीएसआर के लिए खर्च करना होता है | देश में पहली बार यह बानगी देखने मिली,कि किसी औद्योगिक इकाई के भागीदारों द्वारा अपने बहू-बेटों को अफसर बनाने के लिए सीएसआर फंड का उपयोग किया गया है,सिर्फ गोयल बंधु ही नहीं,बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के दो और OSD CGPSC के बिचौलियों के रूप में कार्यरत बताए जाते है| सूत्रों के मुताबिक,इनमें से एक अजित मढ़रिया उर्फ़ बजरंगी जबकि,दूसरा तत्कालीन OSD सूरज कश्यप (डिप्टी कलेक्टर ) का नाम सामने आया है | अजित मढ़रिया उर्फ़ बजरंगी से प्रवर्तन निर्देशालय (ED) “दो बार” लंबी पूछताछ कर चुकी है |

बताया जाता है,कि कांग्रेस के सत्ता में आने के,चंद महीनों के भीतर ही,पिछले दरवाजे से भर्ती के खेल में बजरंगी एक तरफ़ा करीब 100 करोड़ की रकम पर हाथ साफ़ कर चुका था| यह भी बताया जाता है,कि तत्कालीन उपसचिव सौम्या चौरसिया के भी CGPSC रैकेट में एंट्री करने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री बघेल और अजित मढ़रिया के बीच गंभीर मतभेद उत्पन्न हो गए थे| नतीजतन,पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने करीबी रिश्तेदार और PWD विभाग में ”चपरासी” (चतुर्थ श्रेणी कर्मी) के पद पर कार्यरत अजित मढ़रिया उर्फ़ बजरंगी की मुख्यमंत्री आवास में तैनाती की सेवाएं समाप्त कर दी थी|

CGPSC भर्ती कांड में अपर कलेक्टर चेतन बोरघारिया की गिरफ़्तारी के बाद जारी पूछताछ निर्याणक बताई जा रही है | सूत्रों के मुताबिक,सुकमा के मौजूदा डिप्टी कलेक्टर और पूर्व मुख्यमंत्री के तत्कालीन निज सचिव सूरज कश्यप,पूर्व सलाहकार विनोद वर्मा समेत अन्य पर भी कानूनी कार्यवाही के आसार जाहिर किए जा रहे है, कई महत्त्वपूर्ण साक्ष्यों की मौजूदगी सामने आने के बाद एजेंसियों के गलियारे में हलचल तेज़ देखी जा रही है|

जानकारी के मुताबिक,राज्य प्रशासनिक सेवा 2017 बैच के डिप्टी कलेक्टर सूरज कुमार कश्यप को 18 अक्टूबर 2019 को तत्कालीन मुख्यमंत्री का ओएसडी बनाया गया था। जबकि,बीजेपी के सत्ता में आते ही 4 दिसंबर 2023 को उनकी सेवाएं वापस मूल विभाग को सौंप दी गई थी| तस्दीक की जाती है,कि OSD के सौंपे गए प्रभार के बजाए सूरज कुमार कश्यप द्वारा सौम्या चौरसिया के निर्देशन पर छत्तीसगढ़ शासन के विभिन्न महकमों में ठेके और सप्लाई,अवैध उगाही समेत “नगद नारायण” वाली योजनाओं को सुनियजित रूप से संचालित किया जाता था | जेल की हवा खा रहे CGPSC के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के साथ ”ग्राहक-बिचौलियाँ “ से जुड़े कई प्रकरणों में सूरज कश्यप का नाम शुमार और उनकी कार्यप्रणाली जाँच के घेरे में बताई जाती है |

यह भी बताया जाता है,कि तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल का ”सरकारी आवास” आमतौर पर सटोरियों और गैर कानूनी गतिविधियों से जुड़े असामाजिक तत्वों व आपराधिक छवि के राजनेताओं का अड्डा बन गया था | इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री के सचिवालय में ”निष्ठावान सेवको” के बजाए ”बिचौलियों” ने अपना कब्ज़ा जमा लिया था| इनमे प्रमुख पूर्व मुख्यमंत्री के तत्कालीन सरकारी सलाहकार विनोद वर्मा और उपसचिव सौम्या चौरसिया का नाम भी शुमार बताया जाता है |

15 हज़ार करोड़ के महादेव एप्प सट्टा घोटाले में 2001 बैच के आईपीएस आनंद छाबड़ा, 2004 बैच के आईपीएस शेख़ आरिफ के अलावा 2007 बैच के प्रशांत अग्रवाल के साथ-साथविनोद वर्मा को भी सटोरियों से मोटी रकम प्राप्त होती थी | बताते है,कि सत्ता का दुरूपयोग कर रोजाना लाखों-करोड़ों कमाने वालों में कोयला माफिया सूर्यकांत तिवारी,कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामअवतार अग्रवाल,रिटायर आईएएस अनिल टुटेजा और ढेबर बंधुओं द्वारा भी CGPSC के बैनर तले कई कुपात्रों को उपकृत किया गया था |

सूत्रों का दावा है,कि सीबीआई प्याज़ के छिलकों की तर्ज पर CGPSC की परतें खोल रही है, परत दर परत उसके तार “पूर्व मुख्यमंत्री” बघेल के सरकारी और निजी आवास में डेरा जमाए करीबियों से जुड़ते प्रतीत हो रहे है | CGPSC समेत कई अन्य घोटालों में तत्कालीन मुख्यमंत्री और उगाही के स्त्रोतों के बीच महत्त्वपूर्ण कड़ी का कार्य इसी चौकड़ी के हवाले बताया जाता है,जबकि बेजा उगाही के इस गिरोह का ‘‘सरगना” खुद ‘‘पूर्व मुख्यमंत्री” भू-PAY बताया जाता है|

फ़िलहाल,बलरामपुर के अपर कलेक्टर चेतन बोरघारिया से हुई पूछताछ एवं संदेहियों पर संभावित कार्यवाही समेत एजेंसी के अगले कदम को लेकर सीबीआई की ओर से अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई हैं,अलबत्ता पूर्व मुख्यमंत्री बघेल और उनके करीबियों पर एजेंसी के कसते शिकंजे से दिल्ली का कांग्रेस गलियारा सरगर्म बताया जाता है |
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