
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का अंदरूनी संकट लगातार गहराता नजर आ रहा है। शुक्रवार को पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं—पूर्व राज्य मंत्री ज्योति प्रिय मल्लिक और सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब—ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। हालिया चुनावी झटकों के बाद पार्टी में बढ़ती नाराजगी, इस्तीफों और अंदरूनी असंतोष ने टीएमसी नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले ज्योति प्रिय मल्लिक ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए पार्टी की सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों से उनकी तबीयत लगातार खराब चल रही है। बढ़े हुए ब्लड शुगर स्तर और किडनी संबंधी गंभीर समस्या के कारण उनके लिए पार्टी की जिम्मेदारियां निभाना मुश्किल हो गया है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ समय पहले ही ममता बनर्जी ने संगठन में फेरबदल करते हुए मल्लिक को दोबारा पार्टी की वर्किंग कमेटी में शामिल किया था। ऐसे में उनका इस्तीफा राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

ज्योति प्रिय मल्लिक उत्तर 24 परगना जिले में टीएमसी के मजबूत नेताओं में गिने जाते रहे हैं। वह पांच बार विधायक रह चुके हैं और राज्य सरकार में खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री तथा बाद में वन मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वर्ष 2023 में कथित राशन वितरण घोटाले में उनकी गिरफ्तारी हुई थी और करीब 15 महीने जेल में रहने के बाद उन्हें जमानत मिली थी।हालिया विधानसभा चुनाव में उन्हें हाबड़ा सीट पर भाजपा उम्मीदवार के हाथों बड़ी हार का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद ममता बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से उनका बचाव किया था और उनके खिलाफ कार्रवाई को राजनीतिक साजिश बताया था। वहीं, उत्तर बंगाल के प्रभावशाली टीएमसी नेता और सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने नगर निगम आयुक्त को इस्तीफा सौंपने के साथ ही सरकारी वाहन और सुरक्षा सुविधाएं भी वापस कर दीं।गौरतलब है कि हाल के दिनों में टीएमसी के कई वरिष्ठ नेता अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं। इससे पहले कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम, बिधाननगर की मेयर कृष्णा चक्रवर्ती और गोरखा टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन के प्रमुख अनित थापा भी अपने पद छोड़ चुके हैं। लगातार हो रहे इन इस्तीफों को टीएमसी के लिए एक बड़े राजनीतिक संकट के रूप में देखा जा रहा है।







