“राज दरबारी” ! पढ़िए,छत्तीसगढ़ के राजनैतिक और प्रशासनिक गलियारों की खोज परख-खबर, व्यंग्यात्मक शैली में,लेखक और वरिष्ठ पत्रकार ‘‘राज’’ की कलम से, व्यंग-लेख का मकसद किसी की भी मानहानि नहीं बल्कि कार्यप्रणाली का इज़हार मात्र है…( इस कॉलम के लिए संपादक की सहमति आवश्यक नहीं, यह लेखक के निजी विचार भी हो सकते है )

 स्मृति ताई आएगी,नया सबेरा लाएगी – 

छत्तीसगढ़ में बीजेपी के प्रदेश प्रभारी के फेर बदल से सत्ता के गलियारों में हलचल तेज़ देखी जा रही है,प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने अपनी उल्लेखनीय सेवाएं प्रदान करने के बाद नए लक्ष्य को लेकर झारखण्ड का रुख़ कर लिया है | जबकि,उनके स्थान पर नए संगठन मंत्री कर्मवीर भी जल्द ही कार्यभार ग्रहण करने की ओर बढ़ गए है | लेकिन,सत्ता के गलियारों में बेचैनी,स्मृतिताई के दौरे को लेकर देखी जा रही है | बताते है,कि ज्योतिष गणित के बजाए जमीनी हकीकत से रूबरू होने में ज़्यादा दिलचस्पी दिखाने वाली स्मृति ईरानी पितृ पक्ष में आमद दर्ज कर सकती है |

खास बात यह है,कि बीजेपी के गलियारों से ज़्यादा चर्चाकांग्रेस के ठिकानों में स्मृति ईरानी की ज़ोर-शोर से हो रही है | कांग्रेसियों को इस बात की चिंता सता रही है,कि कही पूर्व मुख्यमंत्री की मुश्किलें ना बढ़ जाए ? यही नहीं,मोदी गारंटी यदि वाक़ई प्रभावशील हो गई तो,चोरों के सरदार की ख़ैर नहीं ? उनका मानना है,कि अब तो 2028 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के अरमानों पर पानी फेर कर ही स्मृति ताई दम लेंगी | उन्हें अंदेशा यह भी सता रहा है,कि यदि,पूर्व मुख्यमंत्री असमय अन्दर चले गए तो,कांग्रेस का क्या होगा ? फिर क्या पलीत के कारण ”पार्टी” की मिट्टी पलीत होगी ?

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दरअसल,दोबारा सत्ता में काबिज़ होने का सपना देख रही,कांग्रेस के भीतर अभी से ही “सीएम इन वेटिंग” की दौड़ शुरू हो गई है,इस रेस में जीर्ण-शीर्ण पड़ चुके,ज़्यादातर लगभग 70 साल पुराने मॉडल के नेताओं की बाढ़ आई हुई है | जबकि,बुजुर्गों ने युवा नेताओं को ठिकाने लगाने के लिए विभिन्न प्रकार के ”लॉलीपॉप” अभी से पकड़ा  दिए है | बताते है,कि वयोवृद्धों के बाल यूँ ही सफ़ेद नहीं हुए है,युवाओं को चित्त करने,पटखनी देने के कई गुर उनके तरकश में समाएं हुए है | 

उधर,सत्ता के गलियारों का भी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है,ताई को प्रभार मिलने से आम कार्यकर्ताओं की उम्मीदें अभी से जग गई है | उन्हें,कुछ तो अच्छा होने की,आस नजर आ रही है,हो भी क्यों ना ? स्मृति ताई का अपना मिज़ाज़ है,लक्ष्य निर्धारित कर के अपने प्रथम दौरे का आगाज जो उन्हें करना है | हालांकि,छत्तीसगढ़ की राजनीति और सत्ताधारी दल के राजनेताओं से वो भली-भांति वाक़िफ़ है,काम कैसे करना है ? करवाया कैसेजाता है ? जन आकांक्षाओं पर खरा उतरने के लिए अपनाए जाने वाले तमाम ”योग शास्त्रों” की अच्छी खासी शिक्षा स्मृति ईरानी को प्राप्त है | इसलिए,उन नेताओं के गलियारों में गहमा-गहमी तेज़ देखी जा रही है,जिनके ठिकानों में “कैश हैंडलिंग” के कारोबार ने अच्छी ख़ासी जड़े जमा ली है |

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चोरों के संग पहरेदारी करता चौकीदार मिला,प्रशासनिक गलियारों में गहमा गहमी तेज़ –

छत्तीगसगढ़ में आखिर वही हुआ,जिसका अंदेशा था,ED और CBI के गलियारों से ख़बर आ रही है,कि राज्य में चोरों के संग पहरेदारी करता चौकीदार आखिरकार मिल गया है,उसकी शिनाख्ती को लेकर,हलचल  तेज़ देखी जा रही है,मय कागजी और डिजिटल सबूतों की लंबी फ़ेहरिस्त एजेंसियों के हाथों में बताई जा रही है | 

बताते है,कि पूर्व चौकीदार के तत्कालीन OSD अजीत मढ़रिया उर्फ़ बजरंगी से ED दो बार लंबी पूछताछ कर चुकी है | PWD विभाग में चपरासी के पद पर कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पास कांग्रेस के 5 साल के भीतर लगभग 100 करोड़ की चल-अचल संपत्ति देख कर एजेंसियां हैरत में बताई जाती है |

जबकि,एक और तत्कालीन OSD और बलरामपुर के वर्तमान अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया के सीबीआई के हत्थे चढ़ने के बाद CGPSC घोटाले के तार भी अब पूर्व मुख्यमंत्री के ठिकाने की ओर जुड़ते नजर आ रहे है | 

खबर है,कि “छत्तीसगढ़ का पूर्व चौकीदार चोर” है,सिर्फ CGPSC ही नहीं,बल्कि 15 हज़ार करोड़ के महादेव एप्प सट्टा घोटाले,3500  करोड़ के शराब घोटाले,5 हज़ार करोड़ के चावल-धान घोटाले,700 करोड़ के कोल खनन परिवहन घोटाले,500 करोड़ के DMF घोटाले,2000 करोड़ के राजीव मितान क्लब घोटाले,छत्तीसगढ़ चिप्स (CHiPS – Chhattisgarh Infotech Promotion Society) में 4601 करोड़ रुपए का ई-टेंडरिंग घोटाले समेत भ्रष्टाचार के दर्जनों मामलों में वर्ष 2018-2023 तक  सत्ता की ”बागडोर” संभाल रहे,प्रदेश के “प्रधान चौकीदार” की कार्यप्रणाली सुर्ख़ियों में है | बताते है,कि चोरों के साथ पहरेदारी कर रहे,तत्कालीन चौकीदार का लाभार्थी कुनबा भिलाई से लेकर “सौम्या भाभी” के ठिकानों तक फैला हुआ है |

इस कुनबे की कई अचल संपत्तियां अभी भी बेरोक-टोक बाजार में उछाल मार रही है | यह भी बताया जाता है,कि ये वो अचल संपत्तियां है,जो सिर्फ एग्रीमेंट के आधार पर हथियाई गई थी | पाटन,भिलाई,दुर्ग से लेकर रायपुर तक लह-लहा रही,ऐसी अचल संपत्तियों पर एजेंसियों की नजर अब तक नहीं पड़ पाई है ? अंदेशा तो यही जाहिर किया जा रहा है,चर्चा है,कि 40 चोरों के जेल की हवा खाने के बाद अब बारी उस अली बाबा की है,जिसने खुद के कुनबे की सलामती के लिए कांग्रेस की नैया डूबाना ही एक दौर में मुनासिफ समझा था | इसमें से कई जेल की सैर कर वापस अपने ठिकाने लौट चुके है |

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नकली लॉरेंस बिश्नोई- आरोपी शोएब ढेबर और रायपुर कमिश्नरेट पुलिस का ”यू-टर्न”-

राजधानी रायपुर की कमिश्नरेट पुलिस ने चर्चित गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नाम से फिरौती के लिए करोड़ों की अवैध वसूली में जुटे फ़र्जी नेटवर्क का  जिस तेज़ी से खुलासा किया,उतनी ही तत्परता से अब  ”यू-टर्न” भी ले लिया है | पुलिस सूत्रों से जानकारी सामने आ रही है,कि पूर्व मेयर एज़ाज़ ढेबर को गिरफ्तार करने के बाद जिस तर्ज़ पर दबाव झेलना पड़ा,वो भी कतिपय अफसरों के लिए कम हैरतअंगेज नहीं है |  

इस मामले को लेकर अब नई थ्योरी सामने आ रही है |  नकली लॉरेंस बिश्नोई गैंग के कई सदस्य इस वक़्त पुलिस की रडार में है,आधी रात  को पूर्व मेयर के भतीजे शोएब ढेबर को धर दबोचने के चंद घंटों के भीतर पुलिस का मनोबल उफान पर बताया जाता था,लेकिन अब पुलिस की थ्योरी में नया ट्विस्ट आ गया है | देश-काल और  परिस्थिति के अनुसार,पुलिस की गले ना उतरने वाली,दलील के मुताबिक,पूर्व मेयर एज़ाज़ ढेबर को लॉरेंस बिश्नोई के नाम पर  50 करोड़ की वसूली के लिए किया गया फ़ोन कॉल के लिए हॉटस्पॉट का इस्तेमाल शोएब ढेबर के  मोबाइल से एक्सेस किया गया था | यह भी बताया जाता है,कि एक कुख्यात पूर्व मुख्यमंत्री के ठिकाने से उत्पन्न हुई  शोएब ढेबर के प्रति सहानुभूति की लहर ने देखते ही देखते पुलिस की मौजूदा विवेचना को संदेह के घेरे में ला दिया है |


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सवाल उठ रहा है,कि जब,सिर्फ हॉटस्पॉट ही दिया गया था,तो आधी रात शोएब ढेबर को उठाने की नौबत क्यों आन पड़ी ? उससे तो,सुबह कार्यालीन समय पर पूछताछ की जा सकती थी,यही नहीं,नई थ्योरी के मुताबिक,पूर्व मेयर एज़ाज़ ढेबर को नकली  लॉरेंस बिश्नोई के नाम पर फिरौती वसूली का फोन कॉल किसी अन्य शख़्स ने किया था | जबकि,मेयर के भतीजे शोएब ढेबर ने तो सिर्फ, हॉटस्पॉट ही दिया था | यू -टर्न के बाद शोएब ढेबर के बच निकलने का रास्ता साफ़ बताया जाता है | जबकि,शेष संदेहियों पर निगाहें करम की गुंजाईश भी महसूस की जाने लगी है |विदेशी मोबाइल सिम आरोपियों के हाथ कैसे लगे ? इसका इस्तेमाल किन-किन वारदातों को अंजाम देने में किया गया ? पुलिस के  लिए गंभीर जाँच का विषय बताया जाता है | 

खैर, कमिश्नरेट पुलिस की इस मामले को लेकर अपनी ढपली-अपना राग है | उधर,राजनैतिक गलियारों में चर्चा है,कि कांग्रेस के नए प्रदेश प्रभारी के आगमन पर स्वागत-सत्कार की जिम्मेदारी एक कुख़्यात पूर्व मुख्यमंत्री ने एक पूर्व मेयर को सौंपी थी,लेकिन ”सिर मुंडाते ही,पड़े ओले” | चाचा को 50 करोड़ का चूना लगाने के नेटवर्क में आधी रात भतीजा पुलिस के हत्थे चढ़ गया | कांग्रेस के साथ-साथ पूर्व मेयर की फ़जीहत होना तो तय था,लिहाज़ा,फ़ेस सेविंग के एक नए उपक्रम को हरी झंडी देकर कमिश्नरेट के द्वार ”समझौता एक्सप्रेस” को रवाना किया गया | यह गाड़ी निर्धारित समय पर अपने गंतव्य तक पहुंची और यूटर्न की नई दास्तान भी धीरे-धीरे सामने आने लगी |

तस्दीक की जा रही है,कि  ”समझौता एक्सप्रेस” में सवार नकली गैंगस्टर नेटवर्क गिरोह जल्द ही पुलिस स्टेशन से अपने गंतव्य की ओर  रवाना किया जा सकता है, इसके आसार नज़र आने लगे है,लेकिन पूर्व मेयर ही नहीं,प्रदेश के कई कारोबारियों,उद्योगपतियों और नेताओं को लॉरेंस बिश्नोई गैंगस्टर के नाम से धमकाने वाले गिरोह और उनके काले कारनामों से लोगों को छुटकारा कब मिलेगा ? सवाल तो,अब यह उठने लगा है,कि हाथ आई मछली को छोड़ने के लिए आखिर कौन सा नुस्खा आज़माया गया है | 

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छत्तीसगढ़ में 13 मंत्रियों के 26 “सुपर मिनिस्टर”-


अंधेरनगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी टके सेर खाजा,छत्तीसगढ़ में संवैधानिक तौर पर 13 मंत्री उंगलियों में गिने जा सकते है,लेकिन उनके अधीनस्थ  “सुपर मिनिस्टर” की लंबी फ़ेहरिस्त देख कर,आप भी चौंक जाएंगे | ऐसे”सुपर मिनिस्टर” की गिनती करने के लिए हाथ और पैर दोनों की उंगलियों से भी गिनती की जाए तो,पंजा भी कम पड़ जाएगा | राजनैतिक और प्रशासनिक  गलियारों में चर्चा है,कि नगद नारायण के मामलों में यही ”पंजा” कमल को थामे हुए है | वैसे तो,13 मंत्रियों के 26 सुपर मिनिस्टर के कारनामों से लेन-देन की पूरी महफ़िल सजी हुई है |

फ़िलहाल तो चर्चा,PWD विभाग के उस ठेकेदार की,जो वसूली का लाइसेंस लेकर करीब 100 करोड़ की रकम वसूलने के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगाए हुए है | बताते है,कि पिछले 2 वित्तीय वर्षों में महकमे में 2 हज़ार करोड़ से ज़्यादा के कार्य स्वीकृत होकर, निर्माणधीन अवस्था में है | लेकिन,ठेकेदारों से उचित-अनुचित दरों पर वसूली अपने लक्ष्य के करीब भी नहीं पहुंच पाई |बताते है,कि सुपर मिनिस्टर की उपाधि से अलंकृत 
बेमेतरा के किसी ”शिव-हरे” नामक ठेकदार को इस समस्या से निज़ात पाने का ठेका सौंप दिया गया है | अब सुपर मिनिस्टर ठेकेदार उन प्रतियोगी ठेकेदारों को “नगद नारायण” का पाठ पढ़ा रहे है,जिनके कार्य निर्माणाधीन अवस्था में है |

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यह भी बताया जाता है,कि सुपर मिनिस्टर के लगभग 20 फीसदी कमीशन के आंकड़े के चलते प्रदेश भर के सैंकड़ों ठेकेदारों की सांसे फूली हुई है,मोटे कमीशन को लेकर कोई मोलभाव कर रहा है,तो कोई वसूली के मोबाइल कॉल को रिकॉर्ड कर असली (संवैधानिक) मिनिस्टर को हकीकत से रूबरू कराने के लिए हाथ पैर मार रहा है | यह भी बताते है,कि सिर्फ “शिव-हरे” ही नहीं बल्कि मिनिस्टर साहब के बंगले में एक और सुपर मिनिस्टर ”रजनीश” महोदय भी है,जिन्हे अलग महकमे का प्रभार सौंपा गया है |

उधर,संवैधानिक मिनिस्टर के प्रभार वाले महकमों में निर्माण कार्यों की दास्तान भी अजीबो-गरीब और जाँच के दायरे में बताई जाती है | अपव्यय, सरकारी धन के दुरूपयोग,घटिया निर्माण और गड्ढों से भरी सड़कों से बीजेपी सरकार की पर साख पलीता लग रहा है | लेकिन,महकमे के कर्णधारों के ठिकानों में कमीशन की बारिश छप्पर-फाड़ कर  हो रही है | यह भी बताया जाता है,कि महकमे के ENC के पुत्र ”शिव-हरे” नामक ठेकदार के साथ पार्टनर बन गए है | इसलिए राजमार्गों का बुरा हाल है |

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यहाँ,गुणवत्ता में कमी और घटिया निर्माण कार्यों का दारों-मदार ENC पुत्र की इसी पार्टनरशिप पर निर्भर बताया जाता है | नज़र दौड़ाएं तो विभिन्न प्रभारों से लैस मंत्री जी तो,एक ही है लेकिन उनकी अदम्य संवैधानिक शक्तियों से भरपूर सुपर मिनिस्टर की संख्या दो दर्जन पार हो चुकी है,जरूरतमंदों का सामना पहले इन्हीं महोदय से होता है,फिर बारी आती है,संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे,मंत्रियों की | फ़िलहाल,सुपर मिनिस्टर की माली हालत से लेकर कार्यालीन क्रियाकलापों पर केंद्र और राज्य सरकार को गौर फरमाना होगा ? वरना,वो दिन दूर नहीं जब,कोलकाता  के राजनेताओं की तर्ज पर यहाँ भी,सड़कों पर ऐसे-वैसे नज़ारे देखने को मिले ?

“राज दरबारी”! पढ़िए,छत्तीसगढ़ के राजनैतिक और प्रशासनिक गलियारों की खोज परख-खबर, व्यंग्यात्मक शैली में,लेखक और वरिष्ठ पत्रकार ‘‘राज’’ की कलम से, व्यंग-लेख का मकसद किसी की भी मानहानि नहीं बल्कि कार्यप्रणाली का इज़हार मात्र है…
( इस कॉलम के लिए संपादक की सहमति आवश्यक नहीं, यह लेखक के निजी विचार भी हो सकते है )

विकास की ओर विकासशील –

छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील की धमाकेदार पारी से प्रदेश की फ़िज़ा तेज़ी से बदलने लगने लगी है,गरीब प्रदेश के नागरिकों को अमीर बनाने के प्रयास धरातल पर नजर आने से गांव कस्बों में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार की जय-जयकार शुरू हो गई है,दरअसल,प्रदेश के दर्जनों जिलों में विकास की झड़ी लगी है,सरकार के प्रयासों से आम नागरिकों को खास बनाने की पहल से नौजवानों के चेहरे खिल उठे है |

दरअसल,बीजेपी सरकार ने धमतरी में रेडीमेड फैक्टरी के लिए  96 उद्योगों और राजनांदगांव में  इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर बनाने का बीड़ा उठाया है | बताते है,कि मुख्य सचिव ने जोर देकर इसकी रूपरेखा तय की और पीएफआईसी की बैठक की अध्यक्षता करते हुए,विकास की गति को आगे बढ़ाने की मुहिम छेड़ दी | उनके द्वारा निवेश के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए धमतरी में 96 एमएसएमई फ्लैटेड फैक्टरी कॉम्प्लेक्स और राजनांदगांव में 470 करोड़ रुपए के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 की अधोसंरचना निर्माण योजना को मंजूरी दी गई। बताते है,कि धमतरी के एक ग्राम में बहुमंजिला औद्योगिक इमारत में आवासीय फ्लैट्स की तर्ज पर अलग-अलग तलों पर छोटे-छोटे उद्योगों की स्थापना की जाएगी | यह पूरी तरह ‘प्लग एंड प्ले’ मॉडल पर आधारित बताई जाती  है।

इसमें भवन का ढांचा, उच्च क्षमता की बिजली आपूर्ति, औद्योगिक जल निकासी, सामान ढोने के लिए इंडस्ट्रियल लिफ्ट, पक्की सड़कें और कॉमन फैसिलिटी सेंटर जैसी सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं सरकार या विकास एजेंसी द्वारा पहले से विकसित की जाएगी। यहाँ हितग्राही सीधे मशीनें स्थापित कर तुरंत उत्पादन शुरू कर सकते हैं। इसी तर्ज पर नवा रायपुर सेक्टर-22 में,उरला में गारमेटिंग फ्लैटेड कॉम्प्लेक्स/प्लग एंड प्ले शेड विकसित किया गया है। जबकि,दुर्ग और कोरबा प्लग एंड प्ले शेड इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित कर विकासशील ने विकास की बयार बहा दी है,इसे देख कर लोग कहने लगे है,कि जो काम कांग्रेस राज के 5 सालो में अपने तक में सोचा नहीं गया,उसे बीजेपी सरकार ने मात्र 2 साल के भीतर धरातल पर उतार दिखाया | 

लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर मांगी रंगदारी,पूर्व महापौर का भतीजा शोएब ढेबर गिरफ़्तार, 50 करोड़ की कथित साजिश में कितने चेहरे? पुलिस के रडार पर पूरा नेटवर्क…

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