डोंगरगढ़ : - छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल डोंगरगढ़ में स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर अपने प्राचीन इतिहास, धार्मिक महत्ता और लोक आस्थाओं के लिए विशेष पहचान रखता है। करीब 2000 फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजित माता के मंदिर को लेकर कई प्राचीन कथाएं प्रचलित हैं। लोकमान्यता के अनुसार, राजा वीरसेन ने देवी की आराधना के बाद पुत्र रत्न की प्राप्ति होने पर मंदिर का निर्माण कराया था। वहीं, माधवानल और कामकंदला की प्रेमकथा में उज्जैन के राजा विक्रमादित्य का प्रसंग भी माता की महिमा से जोड़ा जाता है। इन कथाओं ने पीढ़ियों से श्रद्धालुओं के बीच मंदिर की धार्मिक पहचान को मजबूत किया

मां बम्लेश्वरी के नाम की उत्पत्ति को लेकर धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण अलग-अलग हैं। गोंड समुदाय माता को अपनी पारंपरिक आराध्य देवी मां बमलाई मानता है और इसे गोंडवाना की प्राचीन संस्कृति से जुड़ा विषय बताता है। वहीं, कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने माता के नाम को भगवान शिव के डमरू से निकलने वाली ‘बम’ ध्वनि से जोड़कर व्याख्या की थी, जिस पर आदिवासी समाज ने आपत्ति जताई। दूसरी ओर, कुछ धार्मिक मान्यताओं में मां बम्लेश्वरी को मां बगलामुखी का स्वरूप बताया जाता है। अलग-अलग मान्यताओं और परंपराओं के बावजूद मंदिर आज भी छत्तीसगढ़ सहित देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।