रायपुर/कोरबा : छत्तीसगढ़ में गहराते बिजली संकट से निपटने के लिए CSPDCL ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है,जल्द ही बिजली संकट टलने के आसार जाहिर किए जा रहे है | राज्य सरकार ने बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच सामंजस्य स्थापित करने के लिए एक कार्य योजना को हरी झंडी दी है | बताया जा रहा है,कि जल्द ही ग्रामीणों को ना केवल बिजली कटौती से निज़ात मिलेगी,बल्कि उद्योगों को समुचित बिजली उपलब्ध कराने का रास्ता भी तय हो जाएगा | इस योजना को ''अमलीजामा'' पहनाने के लिए महकमे ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है |

प्रदेश में औद्योगिक और घरेलू क्षेत्रों में बिजली की बढ़ती मांग और आपूर्ति को समायोजित करने के लिए इन दिनों कई इलाकों में लोगों को बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है | CSPDCL ( Chhattisgarh State Power Distribution Company Limited ) ने मौजूदा हालात से निपटने के लिए लगभग चार राज्यों से बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की है |तस्दीक की जा रही है,कि बिजली की मांग और ख़पत में अंतर लगातार बढ़ते जा रहा है, नतीजतन ग्रामीण क्षेत्र व औद्योगिक इकाइयों में बिजली कटौती की नई समस्या खड़ी हो गई है|

CSPDCL को उम्मीद है,कि जल्द ही हालात पर काबू पा लिया जाएगा | प्रदेश में बिजली की मांग में भारी बढ़ोतरी के चलते खासकर अधिकतम मांग के समय (पीक आवर्स) में ग्रामीण इलाकों और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती का असर अब जन-जीवन पर पड़ने लगा है। जानकारों के मुताबिक,राज्य में पहली बार बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच एक हजार से 1,500 मेगावाट तक का भारी-भरकम अंतर दिखाई दे रहा है। राज्य में बिजली की ख़पत को ध्यान में रखते हुए,बिजली वितरण कंपनी को अब महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा से मोटे दामों में बिजली खरीदनी पड़ रही है।

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जानकार यह भी तस्दीक करते है,कि राज्य में करीब दो दशक बाद ऐसी स्थिति पहली बार निर्मित हुई है,दरअसल प्रदेश में दर्जनों नई औद्योगिक ईकाइयां अस्तित्व में है,निवेश की बहती बयार के बीच बिजली की जबरदस्त मांग ने बिजली वितरण कंपनियों को मुश्किल में डाल दिया है | यह भी बताया जाता है,कि बिजली की कमी दूर करने और हालात को सामान्य बनाने के लिए महकमे ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है |

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एक जानकारी के मुताबिक,इसी अक्टूबर माह में पहली बार सामने आए बिजली संकट के पीछे तापमान में वृद्धि और कृषि कार्यों के लिए बिजली की खपत में आई तेज़ी को मुख्य कारण बताया जा रहा है।गौरतलब है,कि कुछ माह पूर्व तक बिजली उत्पादन के मामले में छत्तीसगढ़ की गिनती बिजली सरप्लस वाले राज्य में होती थी | लेकिन,अक्टूबर से अन्य राज्यों से बिजली खरीदने की स्थिति बन गई। बढ़ती गर्मी और कृषि क्षेत्र में सिंचाई की आवश्यकता के कारण बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है। सितंबर 2026 में भारत में बिजली की कमी बढ़कर 560 मिलियन किलोवाट-घंटे यानी करीब 56 करोड़ यूनिट दर्ज की गई थी, जिससे पूरी बिजली व्यवस्था पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है।

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बिजली कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, पहले गर्मियों में सुबह के समय थोड़ी कमी होने पर सरप्लस राज्यों से बिजली लेकर आपूर्ति कर ली जाती थी, और सर्दियों में जब जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों को बिजली की आवश्यकता पड़ती थी, तब छत्तीसगढ़ उन्हें बिजली उपलब्ध कराता था। लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल अलग है। इतना ही नहीं, देश के अन्य राज्यों जैसे राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में भी बिजली की उपलब्धता को लेकर भारी दबाव बना हुआ है। देश के कई राज्य अपनी मांग को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार से अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने की मांग पर लगातार जोर दे रहे है।

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प्रदेश में बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर देखने को मिल रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, बिजली की मांग 6,500 से 6,800 मेगावाट तक पहुंच रही है, जबकि उपलब्धता करीब 5,500 मेगावाट तक ही है। ऐसे में मांग और आपूर्ति के बीच लगभग 1,000 से 1,500 मेगावाट तक का अंतर बना हुआ है। बिजली की बढ़ती मांग के मुकाबले पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना चुनौती बन सकता है। हालांकि, इन आंकड़ों की पुष्टि संबंधित विभाग के आधिकारिक विवरण से की जानी चाहिए।