कोरबा में लैंडस्लाइड ! सड़क पर मलबा ही मलबा,हिमाचल-उत्तराखंड नहीं,छत्तीसगढ़ में खतरनाक खदानों से लबरेज़ कोयला नगरी…

कोरबा/रायपुर : छत्तीसगढ़ में बारिश पूरे शबाब में है, उसने अब अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोडना शुरू कर दिया है|मौसम विभाग ने प्रदेश के आधा दर्जन जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है|राज्य सरकार भी सूरते हाल को लेकर अलर्ट मोड़ पर बताई जाती है | इस बीच काले हीरे की धरती कहे जाने वाली कोरबा नगरी से ख़तरनाक संकेतों वाली ख़बर सामने आई है|यहाँ एक महत्त्वपूर्ण मार्ग पर “लैंडस्लाइड” की जानकारी सामने आई है|यह संकेत पर्यावरण की दृष्टि से भी गंभीर माना जाना चाहिए|

लिहाज़ा,हालात पर शासन-प्रशासन ने भी अपनी नजरे टिका दी है| बताया जाता है,कि जितनी खदानें कोरबा जिले में संचालित हैं. उतनी देश के किसी भी अन्य जिले में नहीं हैं. कोल इंडिया लिमिटेड को अकेले कोरबा जिले से 20 फीसदी कोयला मिलता है. यह एक बड़ा कीर्तिमान के रूप में देखा जाता है| जबकि,“लैंडस्लाइड” की घटना सामने आने के बाद इस ”कीर्तिमान” के अभिशाप में तब्दील होने का खतरा भी मंडराने लगा है|

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ताज़ा जानकारी के मुताबिक,अब छत्तीसगढ़ में भी लैंडस्लाइड होने लगा है, ये सुनकर आपको जरूर हैरानी हो रही होगी,लेकिन ये सच है| कोयला नगरी,कोरबा में भारी बारिश के बीच लैंडस्लाइड होने से सड़क पर मलबा आ गिरा,फिर वही हुआ,आमतौर पर जो पहाड़ों पर नज़र आता है,मसलन सड़कों पर बस,कार समेत कई वाहनों का फंसना,यही नहीं सड़कों पर जलसैलाब दिखाई देने लगा है|

जिले के छोटे-बड़े कई गांव-कस्बों में ”जलभराव” की स्थिति आम हो चली है,प्रभावित आबादी तस्दीक कर रही है,कि जिन इलाकों में कभी बारिश का पानी सरपट बह जाता था,अब वहां भारी-भरकम ”जलभराव” की स्थिति बन गई है,गांव-गांव,डगर-डगर कृत्रिम रूप से स्वमेव निर्मित हो रहे गड्ढे मुसीबत का सबब बन गए है| उनकी लगातार बढ़ती संख्या निचली बस्तियों के लिए ख़तरे की घंटी बजाने लगी है| ऐसे हालातों के बीच“लैंडस्लाइड” की खबर ने इलाके के लोगों  की चिंता बढ़ा दी है |   

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 सोशल मीडिया से लेकर अखबारों में वायरल कोरबा की तस्वीरें और वीडियो को लेकर इलाकों के लोगों में गहमा-गहमी तेज़ है | वायरल कंटेंट बताता है,कि ये हिमाचल और उत्तराखंड की वादियां नहीं, बल्कि कोयले की खदानों के लिए प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ के कोरबा का नजारा है| यहाँ की सड़को पर सैलाब नजर आने के साथ-साथ ”लैंडस्लाइड” की शुरुआत सामने आई  है|जानकारी के मुताबिक,सर्वमंगला से कांबेरी जाने वाले मुख्य मार्ग पर अचानक हुए लैंडस्लाइड से बड़ी मात्रा में मलबा, मिट्टी और पत्थरों के टुकड़े सड़कों पर आ गया|सिर्फ मलबा ही नहीं,बल्कि सड़कों पर पानी का सैलाब भी लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन गया|   

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 प्रभावितों के मुताबिक,लैंडस्लाइड का भयानक नजारा दादर नाला इलाके में दिखाई दिया|यहाँ उफनते नाले के बीच बेलगाम  स्कॉर्पियो वाहन लापरवाही पूर्वक आगे बढ़ते रहा,वाहन चालक ने ग्रामीणों की चेतावनी और गुहार को नजरअंदाज कर दिया|नतीजतन, हुआ वही जिसका अंदेशा जाहिर किया जा रहा था|बताते है,कि देखते ही देखते स्कॉर्पियो वाहन उफनते नाले में बहने लगी|मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने जैसे तैसे ड्राइवर समेत गाड़ी में सवार 3 लोगों का रेस्क्यू किया| ग्रामीण तस्दीक करते है,कि ड्राइवर नशे में था,अब घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है| 

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कोरबा में तमाम छोटे बड़े जल स्त्रोतों के अलावा नदी-नालों पर पानी का स्तर लगातार बढ़ते जा रहा है,जब सड़कों का ये हाल है,तो डूबान में आए घरों का क्या हाल होगा ? इसका अंदाज़ा आप लगा सकते है |छत्तीसगढ़ में पिछले 2 हफ़्तों से कभी रुक-रुक कर,तो कभी मूसलाधार बारिश हो रही है| इस बारिश ने कई जिलों में अपने पिछले सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए है|मौसम विभाग के अलर्ट पर,SDRF-NDRF समेत अन्य संस्थाओं की निगाहे टिकी हुई है| कोरबा जिले में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है. इसके चलते पहाड़ी और ढलान वाले इलाकों में मिट्टी खिसकने का खतरा बढ़ गया है| विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश का दौर जारी रहा तो ऐसे क्षेत्रों में और भी सावधानी बरतने की जरूरत होगी |

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 पर्यावरण पर नज़र रखने वाले जानकार ”लैंडस्लाइड” को इलाके के दूरगामी परिणामों से जोड़कर देख रहे है| उनकी माने तो,कोरबा जिले में पहली बार 1960 के दशक ही कोयले का अनियंत्रित उत्खनन शुरू हो गया था,अब इसके गंभीर परिणाम भी नजर आने लगे है | तस्दीक की जाती है,कि कोयला नगरी अब “कोल माफियाओं” के कब्जे में है| केंद्र और राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के विपरीत कोल उत्खनन के मामले आम हो गए है| इसके गैर कानूनी कारोबार ने पूरे प्रदेश में अपनी जड़े जमा ली है| एक जानकारी के मुताबिक,अकेले कोरबा जिले में 11 पावर प्लांट स्थापित हैं. जिनमें 7 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन करने की क्षमता है. ये प्लांट प्रदेश के लगभग 400 मेगावाट प्रतिदिन खपत की बिजली को आपूर्ति तो करते ही हैं. साथ ही साथ मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, गुजरात जैसे कई राज्यों को बिजली मुहैया (Korba gives electricity to many states) कराई जाती हैं | 

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कोरबा में कोयला उत्खनन के एक तरफ़ा बढ़ते दबाव और खदानों के लगातार होते विस्तार से हरियाली के साथ-साथ एक बड़ी आबादी को नुकसान पहुंच रहा है|पर्यावरणीय असंतुलन के साथ ही इलाके के लोग कोयले की धूल फांकने को विवश (People are facing the brunt of pollution in Korba ) बताए जाते हैं| पावर प्लांट से निकले राख ने जल-जंगल और जमीन को भी भारी नुकसान पहुंचाया है | 

जानकारी के मुताबिक,कोरबा जिले में विभाजित चार कोयला क्षेत्र के इलाके अब ख़तरनाक पर्यावरण असंतुलन की राह पकड़ चुके है | इन इलाकों में स्थित  दर्जन भर से ज्यादा खदानो में “स्वीकृत”उत्खनन से ज्यादा मात्रा में (लगभग 4 गुना अधिक)  कोयले का उत्खनन किया जा रहा है|कोरबा जिले मे दीपका, गेवरा,कोरबा और कुसमुंडा कोयला क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले 1 दर्जन खदानें हैं. दीपका, गेवरा और कुसमुंडा जैसी खदानें ना सिर्फ एसईसीएल बल्कि देश की सबसे बड़ी खदानों में गिनी जाती हैं. यहीं से देश को ऊर्जा जरूरतों के लिए कोयले की आपूर्ति की जाती है. जीएसआई के एक सर्वे के अनुसार कोरबा कोल फील्डस में 11 हजार 828.98 मीट्रिक टन कोयला रिजर्व स्टॉक में बताया जाता है.बावजूद इसके अनियंत्रित उत्खनन के लिए लगातार खदानों के विस्तार की प्रक्रिया जारी बताई जाती है | इसे प्रकृति असंतुलन की निर्मित स्थिति के रूप में दर्ज किया जा रहा है |

जानकारों के मुताबिक,देश के किसी जिले में इतनी खदानें नहीं है,जितनी की अकेले कोरबा जिले में स्थित और क्षमता से अधिक उत्खनन के मामलों में संलग्न है|तस्दीक की जाती है,कि इलाके के लोग भारी-भरकम प्रदूषण की चपेट में हैं| इससे उनके स्वास्थ्य पर साल दर साल विपरीत असर पड़ रहा है और अब इस आबादी को ”लैंडस्लाइड” का खतरा भी महसूस होने लगा है | दावा किया जा रहा है,कि कोयला उत्पादन के लक्ष्य के साथ-साथ कोरबा में प्रदूषण का स्तर भी लगातार बढ़ा (Korba also tops in terms of pollution ) है | 

छत्तीसगढ़ में सरगुजा संभाग से लेकर कोरबा तक कोयला खदानों के विस्तार के लिए लाखों की संख्या में पेड़ों कीअँधाधुन कटाई ने मौसम का संतुलन ( LOCAL SYSTEM ) बिगाड़ दिया है|दर्जनों कोयला माफिया अब उद्योगपति बन गए है,जबकि उत्खनन में जुटे मजदूरों से लेकर आम आबादी विकास की मार झेल रही है|फ़िलहाल,”लैंडस्लाइड” की घटना ने लोगों की बेचैनी बढ़ा दी है |  

छत्तीसगढ़ के कोरबा में लैंडस्लाइड,उफनते नाले में बही Scorpio,हैरत में लोग..  

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