
रायपुर/दिल्ली : छत्तीसगढ़ के PDS सिस्टम ने देशभर में सुर्खियां बटोरी लेकिन,अब राज्य का सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System) सवालों के घेरे में है|इस सिस्टम की हवा निकालने के लिए नौकरशाही के वे जिम्मेदार तत्व शामिल बताए जाते है,जिनके अनुभवहीन हाथों में PDS सिस्टम की बागडोर सौंप दी गई है|ताज़ा जानकारी के मुताबिक,राजधानी रायपुर समेत दर्जनों जिलों में इस माह का “चावल” सोसाइटी में नहीं पहुंच पाया है|जबकि,कुछ चुनिंदा दुकानों में ही जरूरत का चावल आबंटित कर,जिम्मेदार अधिकारियों ने कागजी घोड़े दौड़ा दिए है|

उधर,समय पर (अगस्त माह) खत्म होने में महज 04 दिन ही शेष बचे है,ऐसे हालात में कई सोसाइटी में खाद्यान्न (चावल) को लेकर उहापोह की स्थिति बन गई है,प्रभावित सोसाइटी को अंदेशा है,कि निष्क्रिय सिस्टम और अनुभवहीन अफसरों की ”कर्तव्य विमुखता” के चलते यह खाद्यान्न ”लैप्स” हो जायेगा |उनकी माने तो,रोजाना सैंकड़ों हितग्राही सोसाइटी का चक्कर लगा रहे है,राखी-भुजली का त्यौहार सिर पर है,लेकिन जिम्मेदार अफसरों के कानों में ”जूं” तक नहीं रेंग रही है|

सोसाइटी के कई कर्ता-धर्ता यह आरोप लगा रहे है,कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार को बदनाम करने की ”नीयत” से प्रदेश के मशहूर PDS सिस्टम की बखियां उधेड़ी जा रही है| तीज़-त्यौहार के मौके पर “चावल” मुहैया नहीं होने से भूखे-गरीब लोगों की सांसे फूंली हुई है | इनमें से कई ऐसे पीड़ित परिवार है,जो रोजाना खाते-कमाते है,ऐसे घर परिवारों के लिए PDS सिस्टम वरदान साबित हो रहा था | इस वर्ग के अलावा निन्न आय वाले सैंकड़ों घर-परिवार भी इन दिनों राशन दुकानों से चावल प्राप्त करने के लिए दिनभर पसीना बहा रहे है,उनकी थैली और हाथ खाली बताए जाते है,प्रभावित सोसाइटी से बैरंग लौट रहे लोग,शासन-प्रशासन और उसके सिस्टम को धत्ता बता रहे है | जबकि,तीखी-बहसबाज़ी और असहज स्थिति से बचने के लिए कई सोसाइटी अपनी राशन दुकानों में तालाबंदी करना ही मुनासिब समझ रही है |

सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System) के धराशाही नमूना का राजधानी रायपुर में भी हाल-बेहाल बताया जाता है | सूत्रों का दावा है,कि जहाँ राजधानी में सरकार बसी हुई है,जिस इलाके में बीजेपी का प्रदेश मुख्यालय स्थित है,उस माना बस्ती-कैंप इलाके की राशन दुकान में तो,हितग्राहियों की फटकार के बाद तालाबंदी हो गई है | राजधानी रायपुर में ही PDS सिस्टम जब पटरी से उतरने लगा है,तो बाकी जिलों में क्या हाल-बेहाल होगा ? इसका अंदाज़ा सहज लगाया जा सकता है |

यह भी बताया जाता है,कि सिर्फ रायपुर ही नहीं,बल्कि दर्जनों जिलों में इसी तर्ज पर लेट-लतीफी बरतते हुए,हज़ारों क्विंटल चावल “लैप्स” करार देकर खुले बाजार में मुहैया कराया जा रहा है |दावा यह भी किया जा रहा है,कि इस रैकेट में बीजेपी विरोधी नेताओं के अलावा खाद्यान्न माफिया अहम् भूमिका निभा रहे है|हालाँकि,हकीकत क्या है ? इसका खुलासा तो,शासन-प्रशासन की जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा ? लेकिन,जरूरतमंद गरीबों को समय पर खाद्यान्न मुहैया ना कराने का मामला सुशासन के दावे पर सवालियां निशान जरूर लगा रहा है | पीड़ितों ने मामले की उच्च स्तरीय जाँच की मांग भी की है |

जानकारी के मुताबिक,राजधानी रायपुर के माना कैंप इलाके में स्थित संस्था ममता सुलभ वस्तु प्राथमिक सहकारी उपभोक्ता भंडार ने माह अगस्त 26 का आबंटित चावल अब तक प्रदाय नही करने को लेकर जिला कलेक्टर से शिकायत भी की है| संस्था ने कलेक्टर से गुहार लगाते हुए,मामला संज्ञान में लाया है,कि आज दिनांक तक माह अगस्त का आवंटन मे लगभग 300 क्विंटल चावल की आपूर्ति नहीं होने से कठिनाइयों के दौर से गुजरना पड़ रहा है | नागरिक आपूर्ति निगम के रुख को लेकर इस सोसाइटी ने कड़ी आपत्ति जाहिर की है |

शिकायत के मुताबिक,अगस्त माह खत्म होने को है,फिर भी आपूर्ति निगम ने चावल संस्था को नहीं पहुंचाया है,वहाँ के अफसरों को कई बार फोन कर तो कभी,स्वयं उपस्थित हो कर निवेदन भी किया,लेकिन कोई हल नहीं निकल|उन्होंने,प्रभारी अधिकारी से लेकर गोदाम लिपिक के संज्ञान में भी हालात से रूबरू कराया गया,फिर भी कोई ध्यान नहीं दिया गया |

शिकायत में यह भी कहा गया है,कि पुराने माह का चावल आवंटित किए बगैर अब माह सितंबर-26 का चावल आवंटन करने की कवायत शुरू कर दी गई है| ऐसे में सितंबर का चावल,अब अगस्त माह में कैसे वितरण किया जाएगा ? इसके कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए गए है। शिकायत में गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए यह भी,साफ़ किया गया है,कि यदि सितंबर का चावल अगस्त माह मे वितरण करेंगे, तो सितंबर मे लगभग 600 राशन कार्डधारी अगस्त माह का चावल प्राप्त करने से वंचित हो जायेंगे।

इस शिकायत में यह भी स्पष्ट किया गया है,कि सरकारी लापरवाही के कारण ऐसे अप्रिय हालात निर्मित होने पर कलेक्टर स्वयं जिम्मेदार होंगे? यही नहीं, नागरिकआपूर्ति निगम की जवाबदेही भी तय करने की मांग,इस शिकायत में की गई है|सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, राजधानी रायपुर में शासन-प्रशासन की नाक के नीचे माना कैंप की एक मात्र राशन दुकान में ही माह अगस्त का बकाया लगभग 300 क्विंटल चावल संस्था को उपलब्ध ही नहीं कराया गया ? तो,राजधानी रायपुर की लगभग 450 PDS सोसाइटी और प्रदेश भर की 14 हज़ार से ज्यादा राशन दुकानों का सिस्टम किस तर्ज पर कार्य कर रहा है ? इसकी बानगी अब सामने आने लगी है|

फ़िलहाल,छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक रंग और तीज-त्योहारों के मौके पर “चावल” को लेकर गहमा-गहमी तेज़ है| हालाँकि,मामले को लेकर शासन-प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है|बताया गया,कि आज “ईद-ए-मिलाद-उन-नबी” के मौके पर “साहब” छुट्टी पर है|
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