
बिलासपुर : छत्तीसगढ़ कैडर के रिटायर ADG मुकेश गुप्ता की विश्वासपात्र स्टेनो रेखा नायर की अभियोजन स्वीकृति का ट्रायल जारी रहेगा | इस मामले में आरोपी स्टेनो की उस याचिका को हाईकोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है,जिसमे अभियोजन स्वीकृति की पूरी मूल फाइल, नोटशीट और विभागीय पत्राचार तलब करने तथा स्वीकृति देने वाले अधिकारी को अदालत में बुलाकर पूछताछ करने की मांग की गई थी।

अदालत ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया,जिसमें मामला Crime No.08/2019 से जुड़ा बताया जाता है।अभियोजन के मुताबिक,1 मार्च 2011 से 20 फरवरी 2019 के बीच पुलिस कर्मी रेखा नायर के पास करीब 1.21 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति थी, जिसे उनकी ज्ञात आय के स्रोतों की तुलना में अनुपातहीन बताया गया था। इसी आधार पर 27 फरवरी 2019 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(b) और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

छत्तीसगढ़ लोक आयोग ने 2017 में रेखा नायर के खिलाफ अनुपातहीन संपत्ति को लेकर जांच शुरू की थी। रिकॉर्ड के मुताबिक, 9 जनवरी 2019 को लोक आयोग ने उपलब्ध आय-व्यय और संपत्तियों की जांच के बाद यह निष्कर्ष दर्ज किया,कि उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति या कदाचार का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके बाद दूसरी शिकायत के आधार पर एसीबी की जांच आगे बढ़ी और रेखा नायर के ख़िलाफ़ नया आर्थिक प्रकरण दर्ज किया गया था । हालांकि,तत्कालीन ADG मुकेश गुप्ता के पद और प्रभाव के चलते अभियोजन स्वीकृति की फाइल प्रशासनिक गलियारों से कई बार आपत्तियों के साथ वापस टेबल पर लौटती रही।

जानकारी के मुताबिक,26 दिसंबर 2019, 3 जनवरी 2020 और 31 जनवरी 2020 को जांच की पूर्णता, आय-व्यय की गणना और एसीबी रिपोर्ट में कई तकनीकी खामियों को लेकर ACB-EOW की मंशा पर सवाल उठे थे। मामले के तूल पकड़ने के बाद 6 मार्च 2020 को राज्य सरकार ने आरोपी रेखा नायर प्रकरण में अभियोजन स्वीकृति प्रदान कर दी। अदालती गलियारों से प्राप्त जानकारी के अनुसार,आरोपी रेखा नायर ने इसी प्रक्रिया को चुनौती देते हुए विवेचना से जुड़ी पूरी मूल फाइल नस्ती सहित अदालत में बुलाने की मांग की थी, ताकि आन्तरिक विभागीय प्रक्रिया में इसे पता लगाया जा सके, कि अंतिम स्वीकृति स्वतंत्र और पूर्ण विचार के बाद दी गई थी या नहीं ?

सुनवाई के दौरान,छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आरोपी रेखा नायर की तमाम दलीलें ख़ारिज कर दी । अदालत ने कहा कि अंतिम अभियोजन स्वीकृति रिकॉर्ड पर मौजूद है और उसमें सक्षम प्राधिकारी द्वारा जांच में जुटाए गए तथ्यों, साक्ष्यों और दस्तावेजों पर विचार किए जाने का उल्लेख है। अदालत ने यह भी साफ़ किया,कि पहले के प्रस्तावों का आपत्तियों के साथ लौटना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि अंतिम स्वीकृति बिना विचार के दी गई।यही नहीं,कोर्ट ने स्वीकृति देने वाले अधिकारी को बुलाने की मांग भी खारिज कर दी । हाई कोर्ट ने यह भी पाया, याचिकाकर्ता की ऐसी मांग 22 अक्टूबर 2024 को ट्रायल कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका था और उस आदेश को चुनौती नहीं दी गई थी।आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के इस मामले में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने प्रत्येक पहलुओं पर विचार करने के बाद याचिका खारिज कर दी |

छत्तीसगढ़ में तत्कालीन ADG मुकेश गुप्ता के कार्यकाल के दौरान अवैध फ़ोनटैपिंग की कई घटनाएं सामने आई थी | पुलिस के ख़ुफ़िया तंत्र के सरकारी दुरूपयोग के कई गंभीर आरोप गुप्ता पर लगे थे | उनकी विश्वासपात्र स्टेनो रेखा नायर पर भी उद्योगपतियों, पत्रकारों,राजनेताओं, अफसरों और कई बिल्डरों के मोबाइल फोन टैपिंग के कई गंभीर आरोप लगे थे | इस मामलों को लेकर शिकायतें और वाद-विवाद भी आया था| लेकिन,मुकेश गुप्ता पर राजनैतिक वरदहस्त के चलते विधिसंगत कार्यवाही मूर्तरूप नहीं ले पाई थी|
वीडियो देखें : सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ DGP और DG जेल को दी सीधे जेल भेजने की चेतावनी,बगले झांकते रही गृह सचिव,देखें वीडियो(COURTESY-AR NEWS 18)…https://youtu.be/7vv3B1Gs61U?si=rPcV3qZ1V_VSkMH_

बीजेपी की पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री रमन सिंह सरकार को तत्कालीन ADG मुकेश गुप्ता की आपराधिक कार्यप्रणाली का जमकर खामियाजा भोगना पड़ा था| उनके खिलाफ कई गंभीर मामले सिर्फ शिकायतों तक सिमट कर रह गए थे,जबकि तत्कालीन DGP की जाँच रिपोर्ट में ऐसे गंभीर आरोपों की पुष्टि के बाद वैधानिक कार्यवाही की सिफारिश भी की गई थी |बीजेपी की तत्कालीन सरकार के कार्यकाल खत्म होते ही,वर्ष 2018 में मुकेश गुप्ता के खिलाफ विधिसंगत कार्यवाही ने मूर्त रूप लिया था|

कांग्रेस की तत्कालीन ”भू-PAY” सरकार के निशाने पर आए ADG मुकेश गुप्ता से जुड़े कई गंभीर मामलों के दस्तावेजी प्रमाण जाँच अधिकारियों के हाथ लगे थे | इन प्रकरणों की जाँच शुरू की गई और फौरी तौर पर गुप्ता को निलंबित भी कर दिया गया था| हालाँकि, वर्ष 2023 में एक बार फिर बीजेपी के सत्ता में आते ही,मुकेश गुप्ता को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली राज्य की बीजेपी ने ‘आश्चर्यचकित’ तोहफा प्रदान किया था | ऐसी जाँच-पड़ताल फ़ौरन रोक दी गई,और शिकायतों का निराकरण किए बगैर ही निलंबित ADG मुकेश गुप्ता को ”रिटायरमेंट” के बाद ना केवल बहाल कर दिया गया था,बल्कि तमाम कायदे-कानूनों को दरकिनार कर उन्हें ”DG” पद पर पदोन्नत कर दिया गया था|

”अतुलित बल धाम” श्री शैलम से चर्चित श्रीमान अमन चैन सिंह साहब का गुप्ता को ”वरदहस्त’ –
“डबल इंजन” सरकार का यह नायाब प्रोत्साहन सुशासन की लहर में आज भी चमचमा रहा है|प्रशासनिक ”क्षमता” के जाने-मानेधनी और राजनैतिक गलियारों में ”अतुलित बल धाम” श्री शैलम से चर्चित श्रीमान अमन चैन सिंह साहब का मुकेश गुप्ता को ”वरदहस्त” प्राप्त माना जाता है | प्रदेश के प्रशासनिक और राजनैतिक गलियारों में चर्चा यह भी है,कि गुप्ता के एक से बढ़ कर एक आपराधिक दायरे से घिरे होने के बावजूद भी राज्य सरकार की बीजेपी सरकार ने विधिसंगत कार्यवाही को अंजाम देने में कोई रूचि नहीं दिखाई थी,अलबत्ता कायदे-कानूनो को रद्दी की टोकरी में डाल कर मुकेश गुप्ता प्रकरण पर विराम लगा दिया था|इसके लिए बगैर कोई सोच-विचार किए बकायदा केबिनेट नोट लिखा गया और मुकेश गुप्ता को ”उपकृत अलंकरण” प्रदान किया गया था |

मुकेश गुप्ता की पूर्व स्टेनो रेखा नायर का रहस्यमय लोक-
छत्तीसगढ़ में मुकेश गुप्ता की कार्यप्रणाली और फोन टैपिंग विवाद अभी विभागीय फाइलों में कैद है | इसमें फोन इंटरसेप्शन/टैपिंग विवाद से जुड़े तमाम दस्तावेज संग्लन बताए जाते है इन दस्तावेजों में स्टेनो रेखा नायर के साथ-साथ तत्कालीन ख़ुफ़िया प्रमुख मुकेश गुप्ता के खिलाफ गंभीर सबूत संलग्न बताए जाते है| यह भी तस्दीक की जाती है,कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के रेखा नायर से जुड़े मौजूदा फैसले की समरी में अवैध इंटरसेप्शन से जुड़े अलग मामले और उसमें आरोपी बनाए जाने का उल्लेख है।

हालाँकि,तस्दीक यह भी की जाती है,कि इस मामले की जांच पर सुप्रीम कोर्ट ने 2 सितंबर 2019 को रोक लगा दी थी। इस मामले को विधिसंगत रूप देने में मौजूदा बीजेपी सरकार ने कोई रुचि नहीं दिखाई |सूत्रों के मुताबिक,दस्तावेजों में यह भी साफ़ किया गया है,कि ख़ुफ़िया प्रमुख अवैध फ़ोनटैपिंग अपने हितों को दृष्टिगत रखते हुए कर रहे थे|इन दस्तावेजों में रायपुर के कचना स्थित एक निजी आवास का हवाला भी है|इसमें रेखा नायर के सरकारी दफ्तर में तैनाती के बावजूद निजी आवास में उपस्थिति संबंधित जानकारी भी संलग्न बताई जाती है|

इस दौरान रेखा नायर को ड्यूटी पर नियमित रूप से उपस्थित नहीं होने के बावजूद पुलिस मुख्यालय से वेतन और सुविधा मिलने जैसी तथ्य शामिल बताए जाते है| हालांकि इन विशिष्ट आरोपों की पुष्टि मौजूदा हाईकोर्ट फैसले में नहीं होती, इसलिए इन्हें फ़िलहाल,सिर्फ आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है । फिलहाल,रेखा नायर की ख़ारिज याचिका ने रिटायर DG मुकेश गुप्ता प्रकरण को एक बार फिर सुखियों में ला दिया है|
इनकी कौन काट रहा टिकट ? ये काटेंगे तो किसकी कटेगी टिकट ? ”टीटी की बजी सीटी”, ट्रेनों में सवार “नाग-सांप”…






