
रायपुर : नवा रायपुर अर्थात अटल नगर में ही राज्य की बीजेपी सरकार का सुशासन का दावा दम तोड़ रहा है|राज्य में IT-ED और CBI की सक्रियता के बावजूद नोट कमाने में माहिर ”मगरमच्छ” दर्जा प्राप्त आलाधिकारी सरकारी तिजोरी में हाथ साफ़ करने के मामले में कतई पीछे नहीं है | अब तो,सरकारी टेंडर निविदा में भी ऐसे अफसरों की काली कमाई के लिए प्रशासनिक रास्ता साफ़ कर दिया गया है |

ताज़ा मामला,उस नई राजधानी डेवलपमेंट अथॉरिटी ”NRDA” का है,जिसके कंधों पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की याद में निर्मित नवा रायपुर ( अटल नगर ) के विकास की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है|आपको ताजुब्ब होगा,कि ”NRDA” जैसी महत्त्वपूर्ण एजेंसी ने लगभग 6 करोड़ के बागवानी कार्य के लिए जो टेंडर निविदा जारी की है,उसमें एक ऐसी खास शर्त जोड़ दी गई है,जो बीजेपी सरकार के “सुशासन के दावों” पर पलीता लगाने के लिए काफी ”कारगर” बताई जा रही है |

इस शर्त के मुताबिक,नवा रायपुर अटल नगर विकास परिषद द्वारा जारी 3 NIT Tender में छत्तीसगढ़ नर्सरी मेन एसोसिएशन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मांगा गया है,यह शर्त हैरान करने वाली और खास ठेकेदार को उपकृत करने से जोड़ कर देखी जा रही है|यह भी बताया जाता है,कि इस प्राइवेट बॉडी में रजिस्ट्रेशन की शर्त ना केवल गैर कानूनी है,बल्कि राज्य सरकार की मंशा और प्रचलित नियमों के खिलाफ आंकी जा रही है|

जानकारी के मुताबिक,निविदा टेंडर में ”NRDA” की इस मनचाही शर्त के पालन का एकाधिकार खासतौर पर सिर्फ 4 या 5 कारोबारियों के पास ही उपलब्ध है। ऐसे में उपरोक्त Tender कार्य में इस प्रकार की अनुचित शर्त और सर्टिफिकेट की मांग ने करोड़ों के सौदे की कलई खोलकर रख दी है |एक शिकायत में नगरीय विकास विभाग और मुख्य सचिव से मामले की निष्पक्ष जाँच की मांग की गई है |

इस शिकायत में शामिल ”NRDA” के चर्चित टेंडर निविदा को एक मंत्री के खास ठेकेदार को सौंपे जाने की एकतरफा कवायत से बवाल मच गया है | इस शिकायत में दावा किया गया है,कि खास ठेकेदार को उपकृत करने के लिए लगभग 100 करोड़ के ठेके को 2 भागों में विभाजित कर सरकारी तिजोरी पर सीधे तौर पर ”डाका” डाला जा रहा है |

शिकायत में ACB-EOW का ध्यान इस ओर दिलाया गया है,कि पूर्व में इस प्रकार के Tenders में Joint Ventures एवं Consortium के प्रचलित नियमों के तहत Tender-निविदा स्वीकृत की जाती थी | इस प्रक्रिया से प्रतियोगिता उत्पन्न होने से रियायती दरों पर बागवानी ठेका संपन्न होता था,इससे शासन की रकम बचती थी और वित्तीय भार में कमी आती थी | लेकिन ”NRDA” के हालिया इन 3 NIT Tender में Joint Ventures एवं Consortium की शर्त हटा कर व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने की विशेष शर्त जोड़ने से शासन को करोड़ों की क्षति उठाने का मामला सामने आया है |

यह भी बताया जाता है,कि ”NRDA” के चुनिंदा अधिकारी, इन दिनों जिन ठेकेदारों के हाथों की कठपुलती बनकर सुशासन पर पलीता लगा रहे है,उन चुनिंदा ठेकेदारों के खिलाफ ED भी जाँच में जुटी बताई जाती है | सूत्रों के मुताबिक,पूर्ववर्ती कांग्रेस की भू-PAY सरकार के कार्यकाल में ”DMF घोटाले” में जिन ठेकेदारों को ED ने धरदबोचा था,ऐसे कारोबारियों की ”NRDA” में ऊंची पैठ बताई जाती है | यह भी बताया जा रहा है,कि ”DMF घोटाले” की रकम बागवानी कारोबार में भी खपाई गई थी | ED की हालिया कार्यवाही में कई ठेकेदार एजेंसी के हत्थे चढ़े है |

शिकायत के मुताबिक,”NRDA”के Joint Ventures एवं Consortiums की शर्तों को इस खास टेंडर से हटवाने के मामले में इन्हीं दागी ठेकेदारों की भूमिका शामिल बताई जाती है| शिकायत में कहा गया है,कि एनआरडीए में कार्यरत ठेकेदारों ने समूह बनाकर लगभग 100 क़रोड़ के बागवानी कार्य का ब्योरा तैयार किया है,वे अपनी सुविधानुसार टेंडर-निविदा को कई टुकड़ो में बांट रहे हैं और विभाग भी उनके निर्देशों के अनुसार शर्तों में बदलाव कर रहा है । उनकी माने तो छत्तीसगढ़ नर्सरी मेन एसोसिएशन की सदस्यता की अनोखी शर्त जोड़ने से दर्जनों कारोबारी प्रतियोगिता से बाहर हो गए । उनके मुताबिक विवादित टेंडर को निरस्त कर नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए! सवाल उठ रहा है,कि आखिर किसके निर्देश पर टेंडर-निविदा की शर्तों के साथ छेड़छाड़ की गई थी? कारोबारियों की निजी (PRIVATE) संस्था की सदस्यता को किस नियम तहत ”NRDA” ने अपने टेंडर-निविदा में शामिल किया था? इस टेंडर-निविदा ने ”NRDA” के दफ़्तर से लेकर नवा रायपुर के विभिन्न महकमों में बीजेपी सरकार की पारदर्शिता और सुशासन के दावों को लेकर अच्छी खास बहस छेड़ दी है |
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गौरतलब है,कि ”NRDA” की विकास की गति से नवा रायपुर अटल नगर जिस तर्ज पर चमचमा रहा है,उसी तर्ज पर चंद अधिकारियों के भ्रष्टाचार के मामलों ने इस गौरवमयी संस्था को दिवालिया बनाने में कोई कसर बाकि नहीं छोड़ी है | तस्दीक की जा रही है,कि करोड़ों के कर्ज की बकाया अदायगी को लेकर पूर्ववर्ती कांग्रेस की भू-PAY सरकार के कार्यकाल में ”NRDA” कंगाली की कगार पर आ गया था | यहाँ तक की उसके तत्कालीन चैयरमेन की ”कुर्सी की कुर्की” का फरमान तक जारी हो गया था | ऐसी तंगहाली की नौबत सामने आने पर तत्कालीन भू-PAY सरकार ने एक बार फिर बैंकों से मोटा कर्ज़ लेकर ”NRDA” का भुगतान सुनिश्चित किया था |

यही नहीं,बीजेपी के सत्ता में आते ही पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर के भाई अजगर की कंपनी के हज़ारों करोड़ के भ्रष्टाचार की जाँच के निर्देश दिए थे | इस दौरान सरकारी तिजोरी पर चूना लगाने से जुड़े लगभग 250 करोड़ के टेंडर-निविदा को रद्द करते हुए,”दूध का दूध और पानी का पानी” साफ़ करने का दावा किया गया था | लेकिन,ढाई साल गुजर जाने के बावज़ूद ”NRDA” के भ्रष्टाचारों पर ना तो अंकुश लग पाया और ना ही प्रभावशील पूर्व मंत्री के भ्रष्टाचारों पर शासन की ओर से कोई जाँच रिपोर्ट अब तक सामने आई है |

पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर के कार्यकाल में नवा रायपुर में अंजाम दिए गए करोड़ों की जमीनों की अफरा-तफरी और टेंडर घोटाले की जाँच में जुटे अफसर भी इस मामले में चुप्पी साधे हुए है| जबकि,ताज़ा टेंडर-निविदा मामले से भी उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है| न्यूज़ टुडे छत्तीसगढ़ संवाददाता ने 3 NIT Tender को लेकर सामने आए विवाद पर ”NRDA” के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से संपर्क किया|

उधर NRDA के सीईओ चंदन कुमार ने 100 करोड़ के टेंडर के दावे को ख़ारिज करते हुए कहा है कि मात्र 5 करोड़ का टेंडर जारी किया गया था। उनके मुताबिक टेंडर प्रक्रिया में 5 कंपनियो ने दिलचस्पी दिखाई है, जो कि प्रतियोगिता के लिए अच्छा है!उन्होंने छत्तीसगढ़ नर्सरी मेन एसोसिएशन की शर्त के असरहीन होने का दावा भी किया ।उन्होंने बताया कि 2.85 करोड़ की Bid – 05 , Central boulevard – 1.88 करोड़,Bid – 05 Swagat vatika – 01 cr Bid – 05 है,उनके मुताबिक़ नर्सरी मेन एसोसिएशन में नर्सरी लैंडस्केपिंग का कार्य करने वाले सदस्य रहते हैं,उन्होंने कहा कि अभी एसोसिएशन के सदस्य 50 से अधिक है।फ़िलहाल,”NRDA” के टेंडर-निविदा की मनचाही शर्तों की चर्चा जाँच एजेंसियों के गलियारों से लेकर राजनैतिक हलकों में ख़ूब सुर्खियां बटोर रही है|





