
रायपुर/जगदलपुर : नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ में अब ट्रांसफर पोस्टिंग को लेकर वर्दी के भीतर बढ़ती बेचैनी जा रही है,कई वर्षों से नक्सल इलाकों में पदस्थ पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण आखिर कब होगा ? इसे लेकर पीड़ित पुलिस परिवार राज्य के डीजीपी से सीधी गुहार लगा रहा है| जबकि,अज्ञात मिशन में व्यस्त डीजीपी के पास ना तो निचले स्तर के पुलिस कर्मियों की गुहार सुनने का वक्त है और ना ही अपने पद के अंतर्गत फैसले लेने की कार्य क्षमता ? नतीजतन,पुलिस परिवार से जुड़े एक संगठन ने डीजीपी को उनके अधिकार क्षेत्र का पाठ पढ़ाया है|

उसकी दलील है,कि पुलिस विभाग में निरीक्षक से आरक्षक स्तर के अधिकारियों का स्थानांतरण करने का अधिकार पुलिस महानिदेशक को होता है। लेकिन,डीजीपी महोदय अपने अधिकार का उपयोग करने के मामले में फिसड्डी साबित हो रहे है,नतीजतन नक्सल प्रभावित इलाकों में पदस्थ कांस्टेबल, उप निरीक्षक और निरीक्षक स्तर के कर्मी कई वर्षों से अपने स्थानांतरण की बांट जोह रहे है|

उनकी माने तो,अपने मूलभूत कार्यों के प्रति बेरूख़ी बरतने से जहाँ सैंकड़ों पुलिस परिवारों को कई समस्याओं से जूझना पड़ रहा,वही प्रदेश के कई जिलों में अपराधों पर नियंत्रण महकमे के लिए अबूझ पहेली बन गया है| पूर्व पुलिस कर्मी और संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने राज्य के डीजीपी से मेल-मुलाकात का वक्त माँगा है| उन्होंने साफ़ किया है,कि डीजीपी की गैर जिम्मेदाराना कार्य प्रणाली से पुलिस परिवार में लगातार असंतोष फ़ैल रहा है,उन्होंने आंदोलन की चेतावनी भी दी है|
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उज्जवल दीवान के मुताबिक,नक्सल क्षेत्रों में लंबे समय से पदस्थ कई पुलिस कर्मी जिले के भीतर और बाहर स्थानांतरण के लिए मानवीय आधार पर गुहार लगा रहे है| उन्होंने कहा,कि यही हाल उप निरीक्षकों और निरीक्षकों का भी है,जिनकी ”ऊंची पहुंच” है,वो आसानी से इधर से उधर हो रहे है| जबकि,”पहुंच विहीन” के लिए कायदे कानूनों की दुहाई दी जा रही है| उज्जवल दीवान ने कहा,कि पीड़ित पुलिस परिवार हकीकत से रूबरू कराने के लिए डीजीपी से समय की मांग कर रहा है लेकिन,डीजीपी कार्यालय उनकी सुध तक नहीं ले रहा है |

उज्जवल दीवान ने दावा किया,कि नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ में सिर्फ बस्तर रेंज में ही,सैकड़ों आरक्षकों के अलावा लगभग 200-250 निरीक्षक और उपनिरीक्षक पिछले 08 से 10 वर्षों और कई तो इससे अधिक समय से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पदस्थ है | इनमे से कई कर्मियों के माता-पिता वृद्ध हो चुके हैं,उनका इलाज कराने के लिए आवश्यक छुट्टियां भी समय पर स्वीकृत नहीं होती | उन्होंने बताया,कि तनाव के चलते पारिवारिक रिश्ते भी खराब हो रहे हैं,जबकि कई कर्मियों के बच्चों की उच्च शिक्षा को लेकर भी पुलिस परिवारों को परेशनियां उठानी पड़ रही है |

उज्ज्वल दीवान ने कहा,कि अब तो नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ में जरूरतमंद पुलिस कर्मियों के स्थानांतरण के लिए डीजीपी को स्वयं पहल करनी चाहिए| उन्होंने पुलिस परिवार की आपबीती सुनाते हुए बताया,कि अब स्थानांतरण की उम्मीद में कई पुलिस कर्मी अपने बच्चों के स्कूल और कॉलेज में दाखिले को लेकर पसोपेश की स्थिति में है| ऐसे परिवार पुलिस महानिदेशक के अधिकार क्षेत्र के स्थानांतरण आदेश की आस लगाए बैठे है।

उनकी माने,तो स्थानांतरण की राह तक रहे कई पीड़ित पुलिस परिवार अब मानसिक रूप से हताश और निराश होने लगे हैं। इसलिए,डीजीपी से सामान्य मेल-मुलाकात के लिए भी सुनवाई नहीं होने पर पत्र लिख कर समय मांगा गया है| संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने पुलिस मुख्यालय में प्रेषित पत्र का जिक्र करते हुए राज्य सरकार ध्यान भी इस ओर आकर्षित किया है |
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