हिंदी सिनेमा के दमदार कलाकारों में शुमार नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। गुरुवार सुबह गोवा स्थित उनके घर पर उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया। हालत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक लगातार CPR देकर उनकी जान बचाने की कोशिश की, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी सांसें नहीं लौट सकीं। डॉक्टरों के मुताबिक, सुबह करीब 5 बजकर 20 मिनट पर उनका निधन हुआ। मामले में मेडिको-लीगल केस दर्ज किया गया है और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया भी की जाएगी।

नाना पाटेकर का फिल्मी सफर करीब पांच दशक लंबा रहा। ‘गमन’ से हिंदी सिनेमा में कदम रखने के बाद उन्होंने ‘सलाम बॉम्बे!’, ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘प्रहार’, ‘तिरंगा’, ‘खामोशी’, ‘अब तक छप्पन’, ‘राजनीति’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में अपनी अलग छाप छोड़ी। गंभीर किरदार हों या कॉमेडी, नाना हर भूमिका में अपनी दमदार अदायगी के लिए पहचाने गए। उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और चार फिल्मफेयर पुरस्कार मिले, जबकि 2013 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। अभिनेता के साथ-साथ वह निर्देशक और लेखक के तौर पर भी सक्रिय रहे। नाना पाटेकर के निधन से हिंदी और मराठी सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिनकी आवाज और अभिनय की पहचान हमेशा याद की जाएगी।