
रायपुर : छत्तीसगढ़ के महासमुंद में कलेक्टर की अफसरशाही का नया चेहरा सामने आया है ? नतीजतन,प्रशासनिक टकराव के तेज होने से एक ओर जहाँ कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए है,वही कृषि महकमे में ‘सस्पेंशन पॉलिटिक्स’ से कृषि विभाग और जिला प्रशासन आमने-सामने आ गए है| जानकारी के मुताबिक, कलेक्टर ने दो कृषि विस्तार अधिकारियों को झूठी जानकारी और बगैर ठोस तथ्यों के हालिया निलंबित कर दिया था|अभी इस घटना को गुज़रे हफ्ता भर भी नहीं बीता है,कि एक बार फिर कलेक्टर ने जिले के डिप्टी डायरेक्टर कृषि को निलंबित करने की चेतावनी दी है|

बताया जा रहा है,कि कलेक्टर महोदय ने उन फर्मो के खिलाफ एक तरफ़ा FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए है,जो कृषि माफिया “जिग्नेश पटेल” के कारोबार के लिए चुनौती पेश कर रहे है| यह भी बताया जाता है,कि अपने अधिकारों का दुरूपयोग करते हुए,कलेक्टर कृषि विभाग के अधिकारियों को एक के बाद एक निलंबित कर रहे है| जबकि, कलेक्टर की सूझबूझ और गैर कानूनी निलंबन आदेशों को देखकर कृषि महकमा हैरानी जता रहा है| कृषि विभाग के उच्चाधिकारी इस तथ्य को लेकर परेशान है,कि मानसून सिर पर है और कलेक्टर साहब कृषि विभाग के अधिकार क्षेत्र पर अतिक्रमण करते हुए, ख़ुद-बा-ख़ुद बग़ैर कोई वैधानिक कारणों के उनके अफसरों का निलंबन कर रहे है |कृषि अधिकारियों के संगठनों ने कलेक्टर की कार्यवाही पर एतराज जताया है | इन संगठनों के पदाधिकारियों ने कृषि मंत्री रामविचार नेताम से हस्तक्षेप मांग की है | उनकी दलील है,कि अपनी सिफारिशों से कृषि विभाग को अवगत कराने के बजाए कलेक्टर ने खुद अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जा कर दो कृषि विस्तार अधिकारियों को निलंबित किया है |

ताज़ा जानकारी के मुताबिक,महासमुंद में पदस्थ एक डिप्टी डायरेक्टर इन दिनों गंभीर अवसाद में है,तनाव का कारण कलेक्टर का वो अनुचित फरमान है,जो छोटे और मंझोले करोबारियों के खिलाफ झूठी और गैर जरुरी FIR दर्ज कराने से जुड़ा बताया जाता है | सूत्र तस्दीक कर रहे है,कि “फागु राम कश्यप” नामक डिप्टी डायरेक्टर कृषि को आज FIR दर्ज़ ना कराने की सूरत में कलेक्टर ने निलंबित करने की चेतावनी जारी कर दी है | डिप्टी डायरेक्टर कृषि पर दबाव बनाते हुए कलेक्टर ने उन चुनिंदा कारोबारियों पर FIR दर्ज़ कराने के लिए निर्देशित किया है,जो कृषि विभाग में नियमों का पालन करते हुए यूरिया और खाद्य की ईमानदारी के साथ आपूर्ति कर रहे है | यह भी बताया जाता है,कि कलेक्टर के निर्देश पर कृषि विभाग द्वारा ऐसे लगभग आधा दर्जन कारोबारियों के खिलाफ जाँच-पड़ताल की गई थी,जिन्होंने विगत वर्षों में यूरिया की आपूर्ति की थी |

सूत्र तस्दीक करते है,कि कृषि महकमे में संचालित ज्यादातर सरकारी योजनाओं में आवश्यक सामग्री की सप्लाई में जिग्नेश पटेल एंड कंपनी का एकक्षत्र राज है | बताते है,कि जिग्नेश के कारोबार में पूर्व मुख्यमंत्री भू-पे बघेल की ”प्रिय” (करीबी ) निलंबित उप सचिव सौम्या चौरसिया की अघोषित बड़ी हिस्सेदारी है| वर्ष 2018 से 2023 के बीच इस ”जुगल-जोड़ी’‘ ने लगभग 5 हज़ार करोड़ का कारोबार सिर्फ कृषि महकमे में ही किया था | जबकि,बीजेपी शासन के बीते ढाई सालों में जिग्नेश पटेल की विभिन्न कंपनिया हर माह 1 हज़ार करोड से ज्यादा का
कारोबार कर रही है| यह भी बताया जा रहा है,कि कांग्रेस की तर्ज पर बीजेपी सरकार के चलनशील नेताओं के दरबार में कारोबारी पटेल ने अपनी अच्छी खासी पैठ स्थापित कर ली है|

गौरतलब है,कि पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के काले कारोबार में संलिप्तता सामने आने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सौम्या चौरसिया के साथ जिग्नेश पटेल को भी चार्जशीट किया था |उसके खिलाफ EOW में भी आपराधिक प्रकरण दर्ज है,इसकी विवेचना जारी बताई जाती है | जिग्नेश पटेल ज़मानत पर रिहा है,जबकि कृषि महकमे के अलावा अब महिला बाल विकास समेत अन्य महकमों में उनकी कई घोषित- अघोषित कंपनियां करोड़ो का कारोबार कर भरपूर मुनाफ़ा अर्जित कर रही है ।

यह भी बताया जाता है, कि ईडी और ACB-EOW ने पदस्थ अधिकारियों के साथ प्रगाढ़ सम्बन्धों का हवाला देकर जिग्नेश पटेल इन जांच एजेंसियों के नाम पर प्रकरण सुलझाने की नई दुकानदारी में जोर शोर से जुटे बताए जाते है । उनके ठिकानों पर ED और ACO-EOW के कई चर्चित आरोपी अपनी मौजूदगी दर्ज़ कराते है । सूत्रों की माने तो, रायपुर के बेबीलॉन टावर स्थित जिग्नेश पटेल का दफ़्तर इन दिनों जांच एजेंसियों की तर्ज पर समानांतर संचालित है। यहां दवा घोटाले से लेकर DMF, शराब और कोल घोटालों की जद में आए कई संदेही और आरोपी अपना प्रकरण सुलझाने के लिए दस्तक दे रहे है। महासमुंद में कलेक्टर कार्यालय से लेकर कृषि विभाग तक आरोपी कारोबारी जिग्नेश पटेल का बोल-बाला बताया जाता हैं।

बताते है,कि जांच अधिकारियों को उन कारोबारियों के ठिकानों पर कोई भी आपत्तिजनक लेन-देन और यूरिया की अफ़रा-तफरी जैसे गैर कानूनी तथ्य प्राप्त नहीं हुए थे,लिहाज़ा,कृषि अधिकारियों ने कलेक्टर की मंशानुरूप कारोबारियों के खिलाफ FIR दर्ज़ कराने से इंकार कर दिया था|यह भी बताया जाता है,कि FIR दर्ज़ कराने में विफल बागबाहरा और सरायपाली में पदस्थ दो कृषि विस्तार अधिकारियों क्रमशः गंगा प्रसाद शरणागत और बुंदरलाल मिर्धा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर नए सिरे से जाँच-पड़ताल की जिम्मेदारी डिप्टी डायरेक्टर कृषि फागु राम कश्यप को सौंप दी गई थी|

अब जानकारी सामने आ रही है,कि फागु राम कश्यप ने भी कलेक्टर के आरोपों की बारिकी से जाँच-पड़ताल की | लेकिन उन्हें भी ऐसे कोई तथ्य प्राप्त नहीं हुए,जो FIR दर्ज़ कराने योग्य हो| बताते है,कि डिप्टी डायरेक्टर कृषि फागु राम कश्यप ने भी बग़ैर ठोस आधार के कारोबारियों के खिलाफ FIR दर्ज़ कराने से इंकार कर दिया| इससे नाराज़ कलेक्टर ने फ़र्जी शिकायतकर्ताओं को अरेंज कर किसी भी सूरत में आज ही FIR दर्ज कराने का फ़रमान जारी कर दिया है|अन्यथा उन्हें भी निलंबित करने की चेतावनी जारी कर दी है |

कलेक्टर महासमुंद के अब नए कृषि अफसर को सस्पेंड करने की धमकी से महकमे में बवाल मच गया है| किसान हित या माफियाओं के इशारे पर कलेक्टर की दबाव की चेतावनी वाली राजनीति से नया विवाद खड़ा हो गया है | कलेक्टर की कार्यप्रणाली और कारोबार को लेकर अब सवाल उठने लगे है | इस मामले में प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए,कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने साफ़ किया है,कि कलेक्टर की कार्यवाही और अनुचित हस्तक्षेप की जाँच कराई जाएगी| उन्होंने ने यह भी कहा,कि कृषि विभाग में योग्य और वरिष्ठ अधिकारियों की कोई कमी नहीं है| वे जल्द ही पूरे मामले को अपने संज्ञान में लेंगे |

महासमुंद कलेक्टर का रैवया जिले में शासन-प्रशासन की मंशा पर भी सवाल खड़े कर रहा है|दलील दी जा रही है,कि सरायपाली और बागबाहरा में जब जाँच के बाद भी यूरिया की अफ़रा-तफरी के तथ्य झूठे पाए गए तो, कृषि विभाग के अफसरों को कलेक्टर द्वारा सस्पेंड करने की धमकी आख़िर क्यों दी जा रही है ? इसे किसानों के बीच सरकार की साख पर चोट के रूप में देखा जा रहा है,दो अधिकारियों के निलंबन के बाद अब डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर को निलंबित करने की धमकी कृषि महकमे में “माफिया राज़” के बोल-बाले का नतीजा बताया जा रहा है| समय पर यूरिया और खाद्य की आपूर्ति सुनिश्चित करने वाले कृषि अधिकारियों के निलंबन से इलाके के किसान भी परेशान बताएं जाते है| जबकि,नियमों के तहत कार्य करने वाले कृषि अफसरों को निशाने पर लेने से प्रशासनिक विवाद सुर्खियों में है|

कलेक्टर की कार्यपप्रणाली से सरकार की छवि पर भी बुरा असर देखा जा रहा है |महासमुंद में सिर्फ किसानों ही नहीं बल्कि आम नागरिकों के बीच गैस और डीज़ल-पेट्रोल की कालाबाज़ारी मामले में कलेक्टर के प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठ रहे है | इन मामलों में खाद्य विभाग के कई अधिकारियों के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज कर अपनी कार्यवाही शुरू कर दी है,जबकि इस प्रकरण में कलेक्टर से पूछताछ लंबित बताई जाती है|

सूत्र तस्दीक करते है,कि महासमुंद में तेल-गैस की अफ़रा-तफरी में कलेक्टर की कार्यप्रणाली गंभीर जाँच के दायरे में है| विवेचना अभी तक जारी बताई जाती है|मामले में कलेक्टर के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करने हेतु कई साक्ष्य पुलिस की जाँच में सामने आए है| इस मामले में एक मंत्री के हस्तक्षेप से मामला अधर में लटका बताया जाता है|फ़िलहाल,गैस-तेल की कालाबाज़ारी में सुर्ख़ियों में आए कलेक्टर का कृषि माफियाओं से गठजोड़ राज्य की बीजेपी सरकार के लिए मुसीबत साबित हो रहा है |
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