
रायपुर/दिल्ली : छत्तीसगढ़ कैडर के वर्ष 2004 बैच के IAS अमित कटारिया की गिनती देश के ‘सबसे अमीर‘ अधिकारी के रूप में होती है,दावा तो ये भी किया जाता है,कि वे शासन से मात्र 1 रुपये मासिक वेतन लेते है | लेकिन,उनकी कार्यप्रणाली पर गौर फ़रमाए तो,पूरा मामला “हाथी के दांत खाने के कुछ और दिखाने के कुछ” की तर्ज पर बताया जाता है | उनकी सरकारी निष्ठा और जनता के प्रति जवाबदेही ना केवल फिसड्डी साबित हो रही है,बल्कि स्वास्थ्य विभाग की कई योजनाएं ”वेंटिलेटर” पर है| साहब का चाल,चरित्र और चेहरा किसी राजनैतिक दल के चुनावी ”प्रदर्शन” की तर्ज पर बताया जाता है,हकीकत से इसका नाता दूर-दूर तक मरीजों को नजर नहीं आ रहा है| प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की छवि किसी ‘‘घोटाले के कारखाने’‘ से कम नहीं आंकी जा रही है |

यदि आप सोचते है,कि अमित कटारिया बेहद ईमानदार और सख़्त कार्यप्रणाली के तहत अपनी कर्तव्यनिष्ठा साबित कर रहे है,तो यह आपकी सबसे बड़ी भूल हो सकती है ? यह भी शिगूफा साबित हो रहा है,कि इन IAS महोदय को जिन सरकारी महकमों की जिम्मेदारी सौंपी जाती है,वहाँ कम से कम भ्रष्टाचार की गुंजाइश लगभग ना के बराबर होगी ? यह सोचना भी ”गैर लाज़मी” बताया जाता है | यदि आप यह भी सोचते है,कि साहब,भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ ”जीरो टॉलरेंस” नीति का पालन कड़ाई से सुनिश्चित कर रहे है,तो यह भी सिर्फ नजरों का धोखा बताया जाता है|

महकमे में यह भी चर्चा है,कि घोटाले और अनियमिताओं के खिलाफ ”साहब” कड़ा रुख़ अपनाने पर जोर देते है,तो यह सोचना भी बेमानी है| उनकी कार्यप्रणाली पर गौर फरमाएं तो,जो बाहर से नजर आ रहा है,महकमे के भीतर ऐसा कुछ नहीं है| साहब का ”1 रुपए” वेतनमान सिर्फ़ शिगूफा मात्र है,जनता की सेवा का उनका संकल्प सिर्फ ‘ज़ुबानी जमा रकम” ख़र्च करने तक ही,सीमित बताया जाता है| इस होनहार IAS के प्रभार वाले स्वास्थ्य विभाग में घोटालों ही नहीं,बल्कि ”महाघोटालों” की लगी झड़ी ने साहब की कार्यप्रणाली को सवालों के कटघरे में ला खड़ा कर दिया है ? विधानसभा से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं का हाल-चाल देखकर आप ख़ुद आसानी से अंदाज़ा लगा सकते है,कि साहब की मंशा क्या है ?

अब पीड़ित जनता और मरीज भी स्वास्थ्य सचिव से कहने लगे है,कि “साहब वेतन और तमाम भत्ते भले ही पूरे ले लो, लेकिन कम से कम अपनी विभागीय जिम्मेदारी और काम-काज तो ईमानदारी के साथ करो” ? राज्य में अब ”1 रुपये वेतन” लेने वाला मामला सिर्फ IAS अमित कटारिया की ”स्टंटबाजी” और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने से जोड़कर देखा जाने लगा है ,साहब का मंसूबा देख-सुनकर लोग हैरान है !

स्वास्थ्य विभाग में लगातार सामने आ रहे एक से बढ़कर एक घोटाले,कटारिया की सिर्फ कार्यप्रणाली पर ही नहीं,बल्कि मंशा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। सरकारी और गैर-सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ स्वास्थ्य योजनाओं की बदहाल व्यवस्था पर अब जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग जोरों पर बताई जा रही है। दावा किया जा रहा है,कि बतौर स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया विभागीय अनियमितताओं पर समय रहते ना तो कोई, प्रभावी कार्रवाई करते है और ना ही खुद की प्रशासनिक जवाबदेही का निर्वहन कर रहे है ?

प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को लचर हालत से ”एक्टिव मोड” में लाने के तमाम प्रयास उस समय दम तोड़ते नजर आ रहे है,जब महकमे में,दर्जनों ठेकेदार घटिया और निम्न स्तरीय दवाओं की आपूर्ति कर करोड़ों का मुनाफ़ा कमा रहे है | जबकि,साहब की चर्चित ब्रांडिंग जनता की सेवा के बैनर तले ”भ्रम” की स्थिति पैदा कर रही है| दावा किया जा रहा है,कि ”1 रूपये” वेतन की आढ़ में करोड़ों का घोटाला,छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग की इन दिनों पहचान बन गया है,भुक्त-भोगियों को प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव की कार्यप्रणाली ”हाथी के दांत दिखाने कुछ और खाने के कुछ” की तर्ज पर साफ़-साफ़ नजर आने लगी है|

जनता पूछ रही है,अगर साहब ईमानदार है,तो स्वास्थ्य विभाग में गड़बड़ियां और घोटाले आखिर कैसे अंजाम दिए जा रहे है ? क्या इस IAS की प्रशासनिक सख्ती केवल “दिखावा” या फिर ”कागजों” तक सीमित रह गई है ? आखिर जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं कब मिलेगी और विभागीय सचिव की जिम्मेदारी कौन तय करेगा ? राज्य में IAS कटारिया की ”1 रुपये” की सैलरी से ज्यादा चर्चा अब महकमे में व्याप्त भ्रष्टाचार की हो रही है |

अमानक दवाओं की ख़रीद-फ़रोख़्त को लेकर विधानसभा में गलत जानकारी दिए जाने को लेकर स्वास्थ्य महकमा और विभागीय सचिव कटारिया सुर्ख़ियों में है | जबकि,सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं से ”महरूम” सैकड़ों एड्स पीड़ित संक्रमित जीवन-रक्षक एआरटी की दवा छोड़ने का दावा कर रहे हैं। यही हाल,उन उपकरणों का है,जो बाजार भाव से लगभग तीन और चार गुनी कीमत पर ख़रीदे गए और अब अस्पतालों में पड़े-पड़े कबाड़ हो रहे है| सरकारी अस्पतालों में एमआईआर, सिटी स्कैन और कैंसर समेत कई बीमारियों की जाँच को लेकर आम मरीज प्राइवेट अस्पतालों का रुख कर रहे है | बताते है ,कि विधानसभा के हालिया मॉनसून सत्र में लोक स्वास्थ्य विभाग द्वारा पेश एक लिखित जवाब हाथ पर हंगामा बरपा है |

विधायक पुरंदर मिश्रा के प्रश्न के उत्तर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा विधानसभा में कहा गया है,कि अप्रैल 2022 से 31 दिसंबर 2025 तक मेसर्स नाइन एम इंडिया लिमिटेड द्वारा आपूर्ति की गई दवाओं की गुणवत्ता संबंधी कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई, जबकि स्वास्थ्य विभाग के ही आंतरिक दस्तावेज कुछ और कहानी बयां कर रहे है| सूत्रों के मुताबिक,डाइसाइक्लोमाइन एचसीएल 10 मिलीग्राम के विभिन्न बैचों को लेकर दो दर्जन से अधिक शिकायतें विभागीय दस्तावेजों में दर्ज है| एचसीएल के बैच आरटी 220 आरटी 22050 और आरटी 22052 के खिलाफ देवभोग, रिसाली, कोहका और जशपुर सहित कई स्वास्थ्य संस्थानों में शिकायतें दर्ज की गई है।इसमें यह भी साफ़तौर पर बताया गया है,कि कहीं गोली स्ट्रिप से निकालते ही चूर्ण बन रही थी तो कहीं नमी के कारण पूरी खेप उपयोग योग्य नहीं बची है।

दस्तावेज यह भी बताते है,कि ऐसी गंभीर शिकायतें मिलने पर डीपीडीएमआइएस साफ्टवेयर में संबंधित बैचों के वितरण और उपयोग पर रोक लगाई गई तथा पुनः परीक्षण के लिए अधिकृत प्रयोगशालाओं को भेजा गया था। सवाल उठ रहा है, कि विधानसभा में ‘कोई शिकायत नहीं’ का जवाब आख़िर अमित कटारिया ने किस आधार पर दिया था। यह भी बताया जा रहा है,कि विभागीय अभिलेखों में पीड़ितों की शिकायतें दर्ज होना और उन पर कार्रवाई का मामला विभागीय सचिव की मंशा पर सवाल खड़ा करता है। स्वास्थ्य महकमे ने 190 करोड़ की दवा खरीदी को अमित कटारिया के निर्देश पर ही हरी झंडी दी थी|

छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग में हाल के वर्षों में कई बड़े घोटाले और भ्रष्टाचार के दर्जनों मामले सामने आए हैं, जिनमें चिकित्सा उपकरण खरीदी में अनियमितताएं और फर्जीवाड़े शामिल बताए जाते हैं। ये मामले ना केवल,पूर्ववर्ती कांग्रेस की ”भू-PAY” सरकार के बल्कि,मौजूदा बीजेपी शासनकाल में ”1 रुपए” वेतन प्राप्त करने वाले IAS अमित कटारिया के बतौर स्वास्थ्य सचिव के पद पर तैनात रहते अंजाम दिए गए है | यह भी बताया जाता है,कि पूर्ववर्ती ”भू-PAY” सरकार के दौर में सामने आए घोटालों की जाँच और वैधानिक कार्यवाही को लेकर स्वास्थ्य सचिव का रुख चौंकाने वाला है| ऐसे गंभीर और बड़े घोटालों के प्रति स्वास्थ्य सचिव की सहानुभूति से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और योजनाओं के क्रियान्वन पर प्रश्न चिन्ह लग गया है| नतीजतन,बीजेपी शासन काल में मरीजों के खून से सने कई ”मेडिकल माफिया” कानूनी कार्यवाही से लगातार ”सस्ते” में बचते जा रहे है| विभागीय सचिव की कमजोर कार्यप्रणाली से ”पब्लिक मनी” का बड़े पैमाने पर दुरूपयोग भी सुर्ख़ियों में है |

नेशनल डिबेटर डॉ हर्षवर्धन त्रिपाठी पहुंचे रायपुर,वरिष्ठ पत्रकार सुनील नामदेव से की खास मुलाकात…
स्वास्थ्य विभाग में घोटालों की लंबी फ़ेहरिस्त –
1 .₹650 करोड़ की गड़बड़ी: छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) के माध्यम से पिछले वर्षों में करोड़ों रुपये की मेडिकल जांच सामग्री और उपकरणों की खरीदी में नियमों की अनदेखी के कई गंभीर आरोप हैं,लेकिन कुछ चुनिंदा कंपनियों के खिलाफ ही कानूनी कार्यवाही की गई | शेष दागी कंपनियों पर वैधानिक कार्यवाही को लेकर मौजूदा स्वास्थ्य सचिव का ढुलमुल रवैया सुर्ख़ियों में है |

2.घोटालों का गढ़ माने जाने वाले स्वास्थ्य महकमे में केंद्रीय व राज्य की जाँच एजेंसियों की कार्रवाई भी सुर्ख़ियों में बताई जाती है | इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मोक्षित कॉर्पोरेशन से जुड़े ठिकानों और जेल में बंद CGMSC के तकनीकी महाप्रबंधक के आवास पर छापेमारी की थी। लेकिन,मोक्षित कॉर्पोरेशन के अलावा शेष दागी कंपनियों पर IAS अमित कटारिया मेहरबान बताए जाते है |

3.यही हाल ब्लैकलिस्टेड कंपनियों से खरीदी गई,अमानक दवाओं को लेकर भी अपनाया गया है | भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट और शुरुआती जांच के आधार पर यह तथ्य सामने आया है,कि ब्लैकलिस्टेड कंपनियों से करोड़ों के उपकरण व दवाइयां खरीदी गईं थी | इस मामले के सामने आने के बाद दर्जनों छोटी-बड़ी दागी कंपनियां अभी भी महकमे में सक्रिय बताई जाती है | उन कंपनियों पर भी साहब की मेहरबानी सुर्ख़ियों में है |

4 प्रदेश में ”भू-PAY” समर्पित ‘हमर अस्पताल’ और CGMSC के वेयरहाउसों में कथित तौर पर एक्सपायरी (अमानक या समय-सीमा पार) दवाइयों के भंडारण और वितरण को लेकर दर्जनों शिकायतों का बतौर विभागीय सचिव अमित कटारिया ने अब तक निपटारा लंबित रखा है| जबकि,दूसरी ओर कुछ चिंहित मामलों में ही दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है |

5.प्रदेश के आदिवासी और दूरस्थ अंचलों में स्थित प्राथमिक और अन्य सरकारी अस्पतालों में मरीजों को उच्च स्तरीय मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ख़रीदे गए कई उपकरण स्टोर में रखे-रखे कबाड़ हो रहे है| जबकि, बाजार भाव से कई गुना अधिक कीमत पर नए उपकरणों की खरीदी को विभागीय सचिव आए दिन हरी झंडी देने पर जोर दे रहे है |

6. मेडिकल उपकरण और रीजेंट खरीदी घोटाले में शामिल छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (CGMSC) के कई अफसरों के खिलाफ अभी तक विभागीय कार्यवाही सुनिश्चित नहीं हो पाई है|दरअसल,2022-2023 के दौरान लगभग 550 से 660 करोड़ रुपये की दवाइयों, सीबीसी मशीनों और ब्लड टेस्ट ट्यूबों की अत्यधिक ऊंची कीमतों पर खरीदी का मामला सामने आने के बाद राज्य की विष्णुदेव साय सरकार ने कड़ी कार्यवाही के निर्देश दिए थे| सूत्रों के मुताबिक, बाजार में 8.50 रुपये मिलने वाली EDTA ट्यूब को 2,352 रुपये में खरीदने और टेंडर में सुनियोजित धांधली बरती गई थी |

7 .सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़ा में भी जाँच के निर्देश देने में लेट-लतीफ़ी – बिलासपुर के CIMS अस्पताल के अलावा अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में प्राकृतिक या अन्य कारणों से हुई मौतों को भी सर्पदंश (Snakebite) बताकर मुआवजा प्राप्त करने के मामलों में फ़ौरी कार्यवाही करने के बजाए विभागीय सचिव की लेट-लतीफी भी सुर्ख़ियों में है | इस रैकेट में शामिल डॉक्टरों द्वारा फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कर सरकार को करोड़ो का चूना लगाने के मामले के उजागर हुए महीनों बीत जाने के बावजूद विभागीय सचिव ने जाँच को लेकर कोई सक्रियता भूमिका नहीं निभाई|बताते है,कि प्रेस मीडिया में सरकारी मुआवजा हड़पे जाने की खबरों के तूल पकड़ने के बाद स्वास्थ्य महकमा नींद के आगोश से बाहर आया था|

8.कोरोना जांच किट खरीदी अनियमितता महालेखाकार (AG) की ऑडिट रिपोर्ट में कोरोना काल के दौरान 46 करोड़ रुपये की जांच किट को लगभग 80 करोड़ रुपये में खरीदे जाने का भ्रष्टाचार उजागर हुआ था। बतौर विभागीय सचिव अमित कटारिया ने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में भारी लापरवाही और कोताही बरती |

फ़िलहाल,राज्य में ”1 रुपए” वेतनमान वाले IAS का ”ऑफिस ऑफ प्रॉफिट” सुर्ख़ियों में है| न्यूज़ टुडे छत्तीसगढ़ ने स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया से इन मामलों को लेकर प्रतिक्रिया लेनी चाही लेकिन,कोई प्रतिउत्तर नहीं प्राप्त हो सका|
सावन की बहार ! आस्था का रंग शिवालयों में बम-बम भोले..






